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कानपूर नगर १३ अप्रैल २६ * सत्ता संरक्षण के चलते विभागों में भ्रष्टाचार चरमपर बेशुमार, निर्दोषों पर कार्यवाही बेहिसाब, बल्कि निर्दोषों पर अंधेरे में राहचलते निपटाने की भी की गई कोशिश
कानपुर विकास प्राधिकरण में 90 करोड़ 88 लाख 56 हजार 667 रुपये जमा होने के खुलासे ने नया बवाल खड़ा कर दिया है।जूही स्थित मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल प्रकरण में यह रकम प्राधिकरण कोष में जमा होने के बाद पुराने फैसलों पर सवाल उठे।
प्रगतिशील कर्मचारी संघ ने इसे लगातार संघर्ष की जीत बताते हुए तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।आरोप है कि करोड़ों के खेल और काले कारनामों को छुपाने के लिए अनुसूचित जाति के निर्दोष कर्मचारी को निलंबन-बर्खास्तगी की बलि चढ़ाया गया।
प्रगतिशील कर्मचारी संघ कार्यवाहक अध्यक्ष राकेश रावत द्वारा काले खेल का उजागर किया गया था तो निर्दोष कर्मचारी पर ही कर दी थी अन्य प्रकरण पर निलंबन / बर्खास्त की कार्यवाही।
केडीए में पद के रसूख का फ़ायदा उठाते हुए करोड़ो के घोटाले के खेल पर लगानी थी मोहर, लेकिन अनुसूचित कर्मचारी ने भ्रष्टाचार पर लगा दी थी रोक खोल दिया था ख़िलाफत का मोर्चा
अनुसूचित जाति से आने वाले कर्मचारी राकेश रावत ने तत्कालीन अधिकारियों का पर्दाफाश किया है कि पूर्व में उसके खिलाफ़ दि लायर्स एसोसिएशन सम्मानित अधिवक्ता की संस्था का फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी पुष्टि कराई गई और इसी पत्र के आधार पर सतर्कता विभाग से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की जांच कराई जिसमें राकेश रावत दोष मुक्त हुए अब उनका कहना है कि जांच उनकी भी आय से अधिक की होनी चाहिए जो इसमें दोषी है और सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के मामले में झोल करने के लिए 90 करोड़ 88 लाख 55 हजार 667 रुपये छोड़ने का खेल खेला गया,जो कि बोर्ड के प्रस्ताव के हस्तक्षेप से पास हुआ।
इस बड़े खुलासे के बाद न सिर्फ भ्रष्टाचारियों का काला खेल उजागर हुआ, बल्कि करोड़ों की परियोजनाओं में घोटाले की मानसिकता भी सामने आ गई है।
राकेश रावत के अनुसार भ्रष्टाचार को उजागर करने के चलते आवाज़ उठाई गई तो करोड़ों के सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल पर मनमानी को छुपाने के लिए पहले निर्दोष कर्मचारी को निशाना बनाया गया, जबकि अब वही मामला केडीए वीसी द्वारा पारित होने की बात सामने आई है। उन्होंने फर्जी पत्र, आई जी आर एस पोर्टल पर फर्जी रिपोर्ट और जांच प्रभावित करने के आरोप भी लगाए हैं।
न्याय की लड़ाई में संघर्षशील रहने वाले राकेश रावत आज भी लड़ाई लड़ रहे हैं,राकेश रावत ने सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर भरोसा जताते हुए मांग की है कि सत्ता संरक्षण में पनपे भ्रष्ट अधिकारियों के काले कारनामे जनता के सामने लाए जाएं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।

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