*कानपुर नगर, दिनांक 19 अगस्त, 2023 (सू0वि0)*
कानपुर19अगस्त23*निम्नवत प्रारूप पर अपना वाद पत्र तीन प्रतियों में पंजीकृत डाक से 31 अगस्त तक अवश्य जमा करें।
अपर निदेशक/संयोजक, पेंशन अदालत, कोषागार एवं पेंशन, कानपुर मण्डल यशवन्त सिंह ने बताया है कि उ0प्र0सरकार के सेवानिवृत्त/मृत राजकीय सेवकों के सेवानैवृत्तिक लाभों से संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2023-24 की कानपुर मण्डल की द्वितीय पेंशन अदालत (84वीं) का आयोजन माह सितम्बर, 2023 के चतुर्थ सप्ताह में किया जाना प्रस्तावित है। अतः कानपुर मण्डल के जनपदों से ऐसे सेवानिवृत्त अथवा मृत राजकीय सेवकों के आश्रितों से अपेक्षित है कि वह निम्नवत प्रारूप पर अपना वाद पत्र तीन प्रतियों में पंजीकृत डाक से अपर निदेशक, कोषागार एवं पेंशन, कलेक्ट्रेट कम्पाउण्ड, कानपुर मण्डल, कानपुर को ऐसे भेजें कि वह दिनांक 31 अगस्त, 2023 तक प्राप्त हो जाये। उक्त तिथि के पश्चात प्राप्त वाद पत्रों को पेंशन अदालत में नहीं रखा जायेगा।
उन्होंने बताया है कि वादी से यह भी अपेक्षित है कि अपने वाद पत्र की एक प्रति अपने संबंधित कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष जहां अन्तिम तैनाती के समय कार्यरत थे, को अनिवार्य रूप से उपलब्ध करा दें। पेंशन अदालत में किसी न्यायालय/शासन द्वारा निर्णीत मामले तथा किसी माननीय न्यायालय/शासन स्तर पर विचाराधीन एवं नीतिगत मामलों से संबंधित वाद पत्र पर विचार नहीं किया जायेगा। पेंशन अदालत में केवल पूर्णतः राजकीय कार्मिकों के प्रकरण ही स्वीकार किये जायेंगे।
उन्होंने सेवानिवृत्त अथवा मृत राजकीय सेवकों के आश्रितों को सूचित किया है कि वह प्रार्थी का नाम (पदनाम सहित), पिता/पति का नाम, कार्यालय जहां से सेवानिवृत्त हुये हैं, विभागाध्यक्ष का नाम, जन्म तिथि, सेवा में आने की तिथि, मृत्यु/से0नि0 तिथि, कार्यालयाध्यक्ष को पेंशन स्वीकृति/पुनरीक्षण हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की तिथि (साक्ष्य सहित), कार्यालयाध्यक्ष द्वारा प्रकरण पेंशन स्वीकर्ता अधिकारी को भेजे जाने की तिथि, पेंशन स्वीकर्ता अधिकारी द्वारा आपत्ति का विवरण यदि कोई उठाया गया हो (प्रति संलग्न करे), यदि आपत्ति का उत्तर भेजा गया हो,तो विवरण दें (प्रति भी संलग्न करें), पेंशन अदालत से जो राहत चाहते हों, उसका विवरण औचित्य सहित दें, पत्र व्यवहार का पता (पिन कोड सहित), कोषागार का नाम जहां से पेंशन प्राप्त करते हों, अथवा चाहते हों, मैं भलीभांति समझता हूं/समझती हूं कि नीतिगत मामले अदालत में नहीं सुने जायेंगे कानूनी मामले जैसे उत्तराधिकारी/संरक्षक प्रमाण पत्र के विवाद एवं कोर्ट केसेज से संबंधित मामले आदि पेंशन अदालत में नहीं उठाये जायेंगे। इसके अतिरिक्त यदि किसी मामले में शासन स्तर पर विभागीय मंत्री के अनुमोदन से निर्णय हो चुका है एवं संविदा मामले भी नहीं सुने जायेगें। न्यायालय में विचाराधीन मामले भी तब तक ग्राहय नहीं होंगे जब तक कि याची द्वारा शपथ पत्र के साथ यह घोषणा न की जाये कि वह न्यायालय से बाहर समझौता चाहता है तथा अपना वाद वापस लेने हेतु सहमत है।
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