उत्तर प्रदेश 15 जनवरी 26 *सार्वजनिक या फिर धर्म की आड़ में उसका अंत. .
खामनेई की सत्ता का अंत वक्त की मांग है लेकिन रजा पहलवी उनका विकल्प हरगिज नहीं हो सकते..
दुनिया के तमाम मुल्कों में तानाशाही चाहे वो छिपी हुई हो या सार्वजनिक या फिर धर्म की आड़ में उसका अंत होना ही चाहिए .
लेकिन राजशाही की कीमत पर हरगिज नहीं।
यह नहीं भूलना चाहिए कि रजा की नसों में शाह का रक्त दौड़ रहा है।
वह बात लोकतंत्र की भले कर रहे हों लेकिन उनकी बात पर यकीन नहीं किया जा सकता।
निश्चित तौर पर वह जो सरकार चलाएंगे वह अमेरिकी सरपरस्ती में ही चलेगी।
रजा खुद को 1980 में राजा घोषित कर चुके हैं।
यह बात हर कट्टरपंथी को समझ लेना चाहिए वह हिन्दू हो या मुस्लिम कि अब दुनिया की सहनशीलता खत्म हो रही है।
आप धर्म की आड़ में जनता को धोखा लंबे समय तक नहीं दे सकते।
दुनिया का कोई भी मुल्क अगर चौराहों पर सरेआम लाशें लटकाता है तो उस देश की सरकार को उखाड़ फेंकने में ही दुनिया की भलाई है।
दुनिया को न नेतन्याहू चाहिए न खामेनेई न रजा।

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