इटावा19अप्रैल*इटावा की गली-गली में चर्चित काला बैंगन छाप जूता खोर पट्टलकार पर फिर पड़े जूते*
एक मामले में प्रदेश स्तर के एक पत्रकार ने फिर दुबारा काले बैंगन का मुंह काला कर दिया है। अब जल्द इसे गधे पर बैठाकर शहर कराने की तैयारी है। इसके साथ गटुआ पत्रकार भी अब निशाने पर है जो अपनी करोड़ों की अवैध संपति को बचाने के लिए पत्रकारिता कर रहा है। शीघ्र ही इसकी सम्पत्ति की जांच कराई जाएगी। फर्जी पत्रकारों के भेष में इन दलालों को शहर से बाहर करने का वक्त आ गया है। इन दलालों का मुंह काला करके घुमाने का वक्त आ गया है।
पूरा वाकया इटावा शहर के एक थाने का है जहां प्रदेश स्तरीय पत्रकार पर आरोप था कि उनकी एक अधिकारी से फोन पर तू तू में में हुई थी। जब कि सच्चाई यह थी पत्रकार व अधिकारी में दोनों तरफ से तू तू में में हुई है। पहले तू तू में में अधिकारी ने पत्रकार के साथ की उसके बाद पत्रकार ने अधिकारी के साथ की। किसी दोगले की पैदाइश पत्रकार ने इसकी सूचना अपने आका काले बैगन छाप जूताखोर पत्रकार को दे दी। काले बैंगन ने पुलिस पर फर्जी मुकदमा लिखने का दबाव बनाया और पुलिस को पत्रकार के विरुद्ध दर्ज फर्जी मुकदमे की जानकारी भी दे दी ताकि पुलिस गुमराह हो सके। इस दो कौड़ी के पत्तलकार ने मुकदमा लिखने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। वहीं पत्रकार व विपक्षी अधिकारी मुकदमा लिखाने को तैयार नहीं थे। और सुलह समझौता चाहते थे। लेकिन काले बैगन छाप जूता खोर पट्टलकार ने थाने में मुकदमा लिखाने की पूरी ताकत लगाई। लेकिन इसी बीच पत्रकार और अधिकारी में समझौता हो गया। और एक बार फिर काला बैंगन छाप जूता खोर पत्रकार हाथ मलता रह गया है। कोई नया मामला नहीं है। यह इतना नीच है कि अपने साथ रहने वाले पत्रकार को भी उसने फर्जी मुकदमे में जेल भिजवा दिया था। पत्रकारों का नेता बनकर यह पूरे दिन अधिकारियों के यहां कुर्सियां तोड़ता है और उन्हे गुमराह कर रहा है। बल्कि इटावा के पत्रकारों को भी गुमराह कर रहा है इटावा के पत्रकारों की पता नहीं क्या मजबूरी है इटावा के कुछ पत्रकार इस दो कौड़ी के जूता खोर को अपना नेता क्यों मानते हैं। क्या योग्यता देखकर मानते है मुझे क्या किसी को नही पता। गधे को शेर की खाल पहनाकर गधा शेर नही बन जाता। रहेगा तो गधा ही।
मुझे तो बस इतना पता है कि इसकी औकात मेरे सामने खड़े होने की नही है।
इसकी औकात क्या है एक बार सभी लोग जान लें। एक बार इसके मुंह मे जूते मार मार कर इसे मरणासन्न कर दिया गया था। उन अभियुक्तों का आज तक बाल टेढ़ा नहीं कर पाया और खुद को बहुत बड़ा पत्रकार समझता है।
मैं फिर कह रहा हूं काले बैंगन छाप जूता खोर पत्रकार तुझे मेरी सलाह है मुझसे और मेरी टीम के साथियों से दूर रहना। वरना जिस दिन मेरी हट गई उस दिन पागल कुत्ते की तरह तुझे दौड़ा-दौड़ा कर खदेडूंगा।

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