January 13, 2026

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अयोध्या 8 जनवरी 26*पंचधातु का 286 किलो का 'कोदंड' ओडिशा से अयोध्या रवानाः

अयोध्या 8 जनवरी 26*पंचधातु का 286 किलो का ‘कोदंड’ ओडिशा से अयोध्या रवानाः

अयोध्या 8 जनवरी 26*पंचधातु का 286 किलो का ‘कोदंड’ ओडिशा से अयोध्या रवानाः आठ महीने में हुआ तैयार, 22 जनवरी को पहुंचेगा राम मंदिर*

राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से श्रद्धालुओं द्वारा भेंट किए जा रहे अनुपम तोहफों की श्रृंखला थमने का नाम नहीं ले रही है। तीसरे वर्ष की शुरुआत में ही रामलला के लिए एक और अद्वितीय भेंट अयोध्या लाई जा रही है। यह भेंट है पंचधातु से निर्मित 286 किलोग्राम वजनी धनुष ‘कोदंड’।ओडिशा के राउरकेला से तीन जनवरी 2026 को इस ऐतिहासिक धनुष की भव्य शोभायात्रा अयोध्या के लिए रवाना हो चुकी है। सनातन जागरण मंच राउरकेला की ओर से निकाली गई यह शोभायात्रा ओडिशा के सभी 30 जिलों से होकर गुजरेगी। यात्रा 19 जनवरी को भगवान जगन्नाथ की पावन नगरी पुरी पहुंचेगी और वहां दर्शन-पूजन के बाद आगे बढ़ेगी। इसके बाद 22 जनवरी को यह कोदंड अयोध्या राम मंदिर पहुंचेगा और रामलला को श्रद्धापूर्वक समर्पित किया जाएगा। संयोग यह भी है कि 22 जनवरी को ही रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि रही है, इसलिए इसी दिन समर्पण का निर्णय लिया गया।पंचधातु से बने इस कोदंड में सोना, चांदी, एल्युमिनियम, जस्ता और लोहे का उपयोग किया गया है। इसे तमिलनाडु के कांचीपुरम की 48 महिला कारीगरों ने आठ महीने की मेहनत और समर्पण से तैयार किया है।करीब आठ फीट लंबे और साढ़े तीन फीट चौड़े इस धनुष पर भारत की सैन्य शक्ति और वीरता की गाथा भी उकेरी गई है। कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक की उपलब्धियों के साथ-साथ शहीद सैनिकों के नाम भी इस पर अंकित हैं।इस भव्य कोदंड में लगभग 986 ग्राम सोना और ढाई किलोग्राम चांदी का प्रयोग किया गया है। इसकी अनुमानित लागत सवा करोड़ रुपए बताई जा रही है।श्रद्धालुओं का कहना है कि यह धनुष रामलला के चरणों में समर्पित आस्था, शक्ति और देशभक्ति का प्रतीक है।इससे पहले दिसंबर परे कर्नाटक के श्रद्धालुओं ने प्रभु राम लला की भव्य सोने और रत्नों से जड़ित प्रतिमा राम मंदिर को उपहार स्वरूप दिया था, जिसकी कीमत करीब 30 करोड़ रूपए की थी। जिसकी प्रतिष्ठा अंगद टीला स्थित भवन में स्थापित कराई गई है। यह मूर्ति दक्षिण भारतीय तंजौर कला शैली पर बनी है। इसे अलावा प्राण प्रतिष्ठा के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से भक्तों ने विशाल गदा, धनुष, घंटा त्रिशूल भी दान दे चुके है।