February 1, 2026

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सुल्तानपुर, लंभुआ२६ जनवरी २६*नौ दिवसीय श्रीराम कथा के विश्राम दिवस के उपरांत श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला।

सुल्तानपुर, लंभुआ२६ जनवरी २६*नौ दिवसीय श्रीराम कथा के विश्राम दिवस के उपरांत श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला।

सुल्तानपुर, लंभुआ२६ जनवरी २६*नौ दिवसीय श्रीराम कथा के विश्राम दिवस के उपरांत श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला।

सुल्तानपुर *भदैंया ब्लॉक के अंतर्गत स्थित कामता गंज बाजार की पावन धरा इन दिनों राममय हो उठी, जहाँ नौ दिवसीय श्रीराम कथा के विश्राम दिवस के उपरांत श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा समापन के अवसर पर भव्य व विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
इस दिव्य आयोजन की शोभा तब और बढ़ गई, जब मथुरा–वृंदावन धाम से पधारीं सुप्रसिद्ध कथावाचिका आंचल मिश्रा ने अपने मधुर कंठ और ओजस्वी वाणी से श्रीराम कथा का अमृतपान कराया। उनके मुखारविंद से निकली कथा की प्रत्येक चौपाई मानो जन-जन के हृदय में उतरती चली गई। कथा के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन चरित्र—पितृभक्ति, भ्रातृ प्रेम, त्याग, सत्य, करुणा और धर्म—का ऐसा जीवंत चित्रण हुआ कि श्रोता भावविभोर हो उठे।
कथा स्थल पर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो त्रेता युग स्वयं उतर आया हो। कहीं राम का वनगमन, कहीं केवट की भक्ति, कहीं भरत का त्याग तो कहीं लंका दहन की गाथा—हर प्रसंग में भक्ति की सरिता प्रवाहित होती रही। विश्राम दिवस पर आयोजित भंडारे में जाति-पंथ का भेद मिटा और सबने एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण कर राम नाम की समानता को आत्मसात किया।
इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में क्षेत्र के समाजसेवियों एवं सहयोगी गण का विशेष योगदान रहा। आयोजन में जिन श्रद्धालु सेवाभावियों ने तन-मन-धन से सहयोग प्रदान किया, उनमें प्रमुख रूप से
अनुपम पाठक, उमेश जायसवाल, ददन दूबे, बब्बन दूबे, राहुल जायसवाल, रोहित जायसवाल, तारकेश्वर पांडे, हरिशंकर अग्रहरि, दिनेश जायसवाल, गया प्रसाद शर्मा, पुरुषोत्तम पांडे, छोटू यादव, बबलू यादव, आशुतोष यादव, राजेश तिवारी एवं रमेश जायसवाल शामिल रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी कथाएँ न केवल आध्यात्मिक चेतना जागृत करती हैं, बल्कि समाज को संस्कार, संयम और एकता का मार्ग भी दिखाती हैं। कामता गंज बाजार में आयोजित यह राम कथा आने वाले समय तक श्रद्धा और भक्ति की मिसाल के रूप में स्मरण की जाती रहेगी।

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