January 24, 2026

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वाराणसी २३ जनवरी २६*बसंत पंचमी स्नान : कोहरे की चादर में लिपटा बनारस, लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी*

वाराणसी २३ जनवरी २६*बसंत पंचमी स्नान : कोहरे की चादर में लिपटा बनारस, लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी*

वाराणसी २३ जनवरी २६*बसंत पंचमी स्नान : कोहरे की चादर में लिपटा बनारस, लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी*

*वाराणसी।* बसंत पंचमी के पावन अवसर पर धर्मनगरी काशी में आस्था का अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। घने कोहरे की चादर में लिपटे गंगा घाटों पर तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। ठंड और कोहरे की परवाह किए बिना लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में पुण्य की डुबकी लगाकर अपने जीवन को धन्य किया।

सुबह होते ही रीवा घाट, तुलसी घाट, अस्सी, दशाश्वमेध, मणिकर्णिका, पंचगंगा, राजघाट सहित सभी प्रमुख घाटों पर हर-हर महादेव और गंगा मैया की जयकारों से वातावरण गूंज उठा। चारों ओर धुंध और कोहरे के बीच जल में उतरते श्रद्धालुओं का दृश्य बेहद मनोहारी और भावुक कर देने वाला रहा। घाटों पर पीले वस्त्र धारण किए श्रद्धालु, हाथों में फूल, दीप और अगरबत्ती लिए मां गंगा की आराधना करते नजर आए।

श्रद्धालुओं का मानना है कि बसंत पंचमी के दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। काशी में यह विश्वास और भी गहरा है कि यहां गंगा स्नान से मां गंगा पापों का नाश करती हैं और बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों को तारक मंत्र देकर मोक्ष प्रदान करते हैं। घाटों पर मौजूद तीर्थ पुरोहित बटुक महाराज ने बताया कि बसंत पंचमी का दिन स्नान, दान और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। उन्होंने कहा कि “आज के दिन गंगा स्नान का बहुत बड़ा महत्व है। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, मां सरस्वती की पूजा करते हैं और उन्हें अबीर अर्पित करते हैं। यह दिन विद्या, विवेक और शुभता का प्रतीक है।”

उन्होंने आगे बताया कि इस दिन किए गए स्नान और पूजा से ज्ञान की वृद्धि होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। घाटों पर पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहीं, वहीं नाविकों और स्वयंसेवकों ने भी श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान कराने में सहयोग किया। बसंत पंचमी पर काशी की यह सुबह आस्था, श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम बन गई, जहां कोहरा भी श्रद्धालुओं के उत्साह को रोक नहीं सका। गंगा की लहरों में डूबती-उतराती आस्था ने एक बार फिर साबित कर दिया कि काशी में भक्ति और विश्वास हर मौसम से ऊपर है।

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