लखनऊ22अगस्त25*यूपी में अब पुश्तैनी जमीन का भू-मानचित्र यानी नक्श पाना आसान होगा
यूपी में अब पुश्तैनी जमीन का भू-मानचित्र यानी नक्श पाना आसान होगा. बार-बार अब तहसील और विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. अगर नक्शा नष्ट या खराब हो गया है तो इसे नए सिरे से बनवाकर तहसीलों पर रखवाया जाएगा. राजस्व विभाग ने आदेश जारी किया है कि तहसील स्तर पर भू-मानचित्र उपलब्ध न होने या जीर्ण-शीर्ण होने की स्थिति में उसे नए सिरे से बनवाकर सुरक्षित रखा जाएगा और आवेदकों को उसकी कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी.
आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद एसवीएस रंगाराव ने इस संबंध में जिलाधिकारियों को निर्देश भेज दिया है. जिलाधिकारियों को आयुक्त और सचिव के भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि तहसील और जिला स्तर पर राजस्व अभिलेखागार के साथ बंदोबस्त अधिकारी, सहायक अभिलेख अधिकारी कार्यालय में खोजबीन कराते हुए इसे संग्रहीत कर सुरक्षित किया जाएगा. भू-मानचित्र अनुपलब्ध व जीर्ण-शीर्ण होने की स्थिति में इसके कारणों की जांच कराते हुए उत्तरदायित्व निर्धारित कर कार्रवाई की जाएगी. यदि नक्शा नष्ट हो गया है या उपलब्ध नहीं है, तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी और रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेजी जाएगी.
प्रयागराज से मिलेंगे नक्शे
जिन ग्रामों के भू-मानचित्र तहसील, जिला या फिर राजस्व परिषद स्तर पर भी उपलब्ध नहीं है, उसे लेने के लिए निदेशक मुद्रण एवं लेखन सामग्री प्रयागराज से संपर्क किया जाएगा. उनके यहां से इसे प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा. वहां भी भू-मानचित्र उपलब्ध न होने की स्थिति में संबंधित राजस्व ग्रामों के भू-मानचित्रों का निर्माण कराया जाएगा. इसके बाद इसे सुरक्षित रखा जाएगा और लोगों द्वारा मांग किए जाने पर इसे उपलब्ध कराया जाएगा. जो भी व्यक्ति अपनी पुश्तैनी जमीन जानने के लिए नक्शा के लिए आवेदन करता है. उसे मानचित्र की कॉपी उपलब्ध कराई जाए.
आम नागरिकों को मिलेगा लाभ
निर्मित व सुरक्षित रखे गए मानचित्रों की कॉपी आम नागरिकों को उनके आवेदन पर उपलब्ध कराई जाएगी. इससे पुश्तैनी जमीन संबंधी विवादों के निस्तारण में आसानी होगी और लोगों को अपनी जमीन की सटीक जानकारी मिल सकेगी.

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