लखनऊ16नवम्बर23*”अरे वाह बाबा जी के दरोगाओं का एक अलग ही जलवा है हमारा नेगेटिव पोइंट निकलोगे तो हम गाड़ी सीज करेंगे चालान करेंगे*”
लखनऊ – पुलिस सोये तो सोने दो पुलिस मनमानी करे तो करने दो पुलिस कार्रवाई न करके पीड़ित पर कोर्ट कचहरी का दहशत दिखा कर अपराधिक मामलों का समझौता दबाव बना कर करे तो करने दो।
यदि आप पत्रकार हो ख़बर चलाओगे अधिकारी के संज्ञान में डालोगे तो दरोगा जी आप का चालान कर देंगे आपकी गाड़ी सीज कर देंगे आप पर साजिश के तहत फर्जी मुकदमा भी लिख देंगे क्योंकि आप पत्रकार हो आपके पास कलम है तो दरोगा जी भी दरोगा हैं उनको भी क़लम मिली है।
क्योंकि तमाम पत्रकार हेलमेट नहीं लगाते उनकी गाड़ी काफ़ी पुरानी है जिसका बीमा नहीं है ऐसे लोगों का गाड़ी सीज और चालान करके अपना ख़बर का बदला ले लेंगे।
नहीं तो चुपचाप रहो चौकी पर आओ चाय पीयो दीपावली होली में मिठाई लो और गुड वर्क चलाते रहो।
यदि कहीं खिलाफ में ख़बर चली तो सीधा नाप देंगे।
क्यों कि अधिकारी भी हमारे सिस्टम में भागीदार है फिर पत्रकारिता करते रहना।
पर शायद दरोगा जी भूल रहें हैं कि आज की तारीख में भी तमाम ऐसे पत्रकार हैं जो चाय और मिठाई नहीं लाखों रुपए पर भी अपनी क़लम से समझौता नहीं करते।
गाड़ी की चालान हो जाये गाड़ी सीज हो जाये फिर भी फर्क नहीं पड़ता।
क्योंकि कुछ पत्रकार आज भी पैदल चल के पत्रकारिता करने की छमता रखतें हैं।
उनको न अच्छा पहनें की ख्वाहिश है न अच्छा खाने की उन्हें आवश्यकता है तो सिर्फ सच लिखने की सच दिखाने की।
पर सवाल यहां अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बाबा आदित्यनाथ योगी महाराज पर उठ रहा है जो ज़ीरो टारेन्स पर काम करना चाहते हैं देश से अपराध भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहतें हैं यदि उन्हीं की पुलिस पत्रकारों को टारगेट करेगी सच लिखने से सच दिखाने से रोकेगी गाड़ियां सीज करके पत्रकार को पैदल कर देगी तो कौन पत्रकार सच लिखने की जुर्रत कर पायेगा।
फिर वही क्रप्पट पुलिस क्रप्पट पत्रकार क्रप्पट अधिकारी मनमानी करेंगे और आम जनता शिकार अपराधियों की भ्रष्टाचारियों की होती रहेगी और बाबा का सपना सिर्फ सपना रह जायेगा।
बाबा को भी ये बात समझनी चाहिए कि इमानदार अधिकारी इमानदार थाना प्रभारी इमानदार दरोगा इमानदार पत्रकार मारे मारें फिर रहें हैं पर जो क्रप्शन में लिप्त है वो ऐशो आराम से जीवन का आनंद ले रहे हैं।
ऐसे लोगों पर जांच लगवा कर उचित कार्रवाई करें।
तभी देश का भला होगा।
बाबा के पुलिस के डर से मैं अपनी गाड़ी खड़ी करके पैदल दोबारा से पत्रकारिकता करने जा रहा हूं।
क्योंकि हमारी कमाई इतनी नहीं है कि हम गाड़ी जूता पहन कर चलाये गाड़ी का बीमा समय समय पर करायें दो हजार वाला हेलमेट लगायें।
पैदल चलेंगे न ग़लत करेंगे न ग़लत होने देंगे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी का भी कहना है ना खायेंगे न खाने देंगे उन्हीं के नीतियों को अपनायेंगे।
*आवाज़ जन जन की अपराध भ्रष्टाचार के खिलाफ*।
*स्वतंत्र पत्रकार अटल बिहारी शर्मा लखनऊ*?

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