October 14, 2026

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लखनऊ 14 अक्टूबर 26*यूपी में बिना कारण वोटर काटने के 85,854 फॉर्म: CEO की सफाई के बाद भी सवाल बाकी।

लखनऊ 14 अक्टूबर 26*यूपी में बिना कारण वोटर काटने के 85,854 फॉर्म: CEO की सफाई के बाद भी सवाल बाकी।

लखनऊ 14 अक्टूबर 26*यूपी में बिना कारण वोटर काटने के 85,854 फॉर्म: CEO की सफाई के बाद भी सवाल बाकी। नया अभियान शुरू लेकिन अपने ही बयान में फंस गया आयोग का यूपी ऑफिस।

लखनऊ *उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर द रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने एक और दावा किया है। कलेक्टिव का कहना है कि प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने उसकी रिपोर्ट को “भ्रामक” तो बताया, लेकिन अपने वीडियो बयान में उसकी मुख्य बात खुद मान ली। यह बात है कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने 85,854 मतदाताओं के नाम हटाने के फॉर्म बिना कोई कारण लिखे तैयार कर दिए।
कलेक्टिव ने 9 अक्टूबर को छपी अपनी पड़ताल में बताया था कि आयोग के सॉफ्टवेयर ERONET से ये फॉर्म अपने आप बने और चुनाव अधिकारियों से उन पर दस्तखत कराए गए। कई फॉर्म में नाम हटाने की वजह की जगह सिर्फ “A”, “N”, “H” या “E” जैसे अकेले अक्षर लिखे थे। कलेक्टिव के मुताबिक ये सारे आवेदन दावा-आपत्ति की अवधि खत्म होने के बाद आए। उसका कहना है कि कानून और SIR के लिए आयोग के बदले हुए नियमों में भी हटाने का कारण लिखना जरूरी है।
रिपोर्ट छपने के कुछ ही मिनट बाद रिणवा ने X पर इसे “झूठ और गलतियों” से भरा बताया और कहा कि वे उसी दिन जवाब देंगे। शाम को उन्होंने वीडियो जारी किया। कलेक्टिव के अनुसार रिणवा ने इसमें 85,854 फॉर्म से इनकार नहीं किया। उनका तर्क यह था कि जिन लोगों के नाम फॉर्म-7 के आधार पर हटाए गए, उन सभी को सुनवाई का नोटिस भेजा गया था, जिसमें साफ लिखा था कि वे “अनमैप्ड” हैं या उनके रिकॉर्ड में “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” है। इसलिए उनके हिसाब से प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई।
कलेक्टिव का कहना है कि इस जवाब से दो बड़े सवाल अब भी जस के तस हैं। पहला, ज्यादातर फॉर्म में कारण क्यों खाली था और अकेले अक्षर क्यों लिखे गए। दूसरा, हटाए गए मतदाताओं में कितने “अनमैप्ड” थे और कितने “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” वाले। कलेक्टिव के मुताबिक यह आंकड़ा रिणवा ने न इस बार दिया, न पिछली प्रेस कॉन्फ्रेंस में और न फाइनल रोल के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में।
इसी जांच में कलेक्टिव ने यह भी दावा किया था कि यूपी में मुस्लिम मतदाताओं के नाम सामूहिक रूप से हटवाने की 200 से ज्यादा कोशिशें हुईं। कलेक्टिव के अनुसार रिणवा ने इसे नकारा नहीं, बल्कि इसे SIR की सफलता का सबूत बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 13.39 करोड़ मतदाता हैं और बहुत से फॉर्म-7 वाले नाम सिर्फ करीब 4,700 मिले, यानी संख्या बहुत छोटी है।
रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग मुख्यालय ने इस पूरे विवाद में यूपी CEO के पक्ष में कुछ नहीं कहा। उलटे 9 अक्टूबर को उसने आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति एक महीने में मतदाताओं को हटाने की 30 से ज्यादा आपत्तियां दाखिल नहीं कर सकेगा। कलेक्टिव याद दिलाता है कि आयोग इससे पहले SIR के नियमों से थोक में आवेदन देने की सीमा हटा चुका था।

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