July 6, 2026

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रीवा6जुलाई26*स्कूल खुले, पढ़ाई शुरू पर किताबें नहीं आईं हिंदी मीडियम को आधी किताबें, अंग्रेजी मीडियम अब भी खाली हाथ*

रीवा6जुलाई26*स्कूल खुले, पढ़ाई शुरू पर किताबें नहीं आईं हिंदी मीडियम को आधी किताबें, अंग्रेजी मीडियम अब भी खाली हाथ*

रीवा6जुलाई26*स्कूल खुले, पढ़ाई शुरू पर किताबें नहीं आईं हिंदी मीडियम को आधी किताबें, अंग्रेजी मीडियम अब भी खाली हाथ*

*सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 2 महीने हो गए, 90% छात्रों को पूरी किताबें नहीं मिलीं, शिक्षक और अभिभावक परेशान*

रीवा। प्रदेश में शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन सरकारी स्कूलों में किताबों का वितरण अब भी अधूरा है। स्कूलों की घंटी बज रही है, बच्चे पढ़ने जा रहे हैं, पर हाथ में किताबें नहीं हैं। हिंदी मीडियम के छात्रों को भी आधी-अधूरी किताबें ही मिली हैं, वहीं अंग्रेजी मीडियम के बच्चों को एक भी किताब नहीं मिल पाई है।

*क्या है स्थिति*
शिक्षा विभाग के आदेश के बाद भी पुस्तकों का वितरण पूरा नहीं हो सका है। सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्र 2 महीने से किताबों का इंतजार कर रहे हैं। कई स्कूलों में शिक्षक बिना किताब के ही ब्लैकबोर्ड पर पढ़ा रहे हैं। छात्रों को पुरानी किताबें या फोटो कॉपी से काम चलाना पड़ रहा है।

*हिंदी मीडियम: आधी किताबें आईं*
हिंदी मीडियम में कुछ विषयों की किताबें स्कूलों तक पहुंची हैं, लेकिन सभी विषयों की सेट नहीं आई है। अभिभावकों का कहना है कि बाजार से किताबें खरीदना महंगा पड़ रहा है।

*अंग्रेजी मीडियम: अब तक शून्य*
अंग्रेजी मीडियम के छात्रों की हालत सबसे खराब है। जिले में अंग्रेजी माध्यम वाले किसी भी स्कूल में अब तक एक भी नई किताब नहीं पहुंची है। प्राचार्यों का कहना है कि डिमांड भेजी जा चुकी है, लेकिन ऊपर से सप्लाई नहीं आ रही।

*विभाग क्या कर रहा है*
इस मामले में जांच के लिए 10 सदस्यीय टीम बनाई गई है जो आज से विभिन्न स्कूलों का निरीक्षण करेगी और वितरण की हकीकत देखेगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रिंटिंग और सप्लाई में देरी की वजह से दिक्कत हुई है। जल्द ही सभी छात्रों को किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी।

*प्राचार्यों और शिक्षकों का दर्द*
स्कूलों के प्राचार्यों का कहना है कि बिना किताब के बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। सत्र शुरू हुए 2 महीने बीत गए, सिलेबस पीछे छूट रहा है। एक प्राचार्य ने कहा “हम हर रोज बच्चों से माफी मांगते हैं कि किताबें क्यों नहीं आईं”।

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