मिर्जापुर से बसन्त कुमार गुप्ता की रिपोर्ट यूपी आजतक
मिर्जापुर:27 जनवरी 26 *जातिगत राजनीति देश के लिए विष के समान – मुकेश पाण्डेय*
*तुष्टिकरण की नीति अब नहीं चलेगी*
*यूजीसी का काला कानून वापस लो– सवर्ण आर्मी*
मीरजापुर। मिर्जापुर जिला अधिकारी सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष मुकेश पांडे ने यूजीसी के काले कानून को वापस लेने के लिए सरकार से मांग की है। तुष्टिकरण की राजनीति ,जातिगत राजनीति, ना तो भारत संविधान का स्वरूप रही है और ना ही भारत देश की संस्कृति रही है । वर्तमान समय में जातिगत राजनीति करके पार्टियां अपना उल्लू सीधा कर रही हैं । जनता भाड़ में जाए इसे कोई मतलब नहीं है । वर्तमान सरकार द्वारा यूजीसी का जो काला कानून लाया गया है उसे समूचा सवर्ण समाज पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा। तुष्टिकरण की राजनीति के चलते सवर्णों पर पहले से ही काफी अत्याचार हो रहा है । सवर्ण समाज करणी सेना अब अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेगा। सरकार की दूषित मानसिकता राजनीति से उठकर अब स्कूल कॉलेज तक पहुंच गई है जो बहुत ही खराब है ,और छात्रों को भी राजनीति में शामिल किया जा रहा है और देश को बर्बाद करने की यह नीति है। करणी सेना समूचा जिला इकाई व हम सभी स्वर्ण आर्मी इस यूजीसी के काले कानून का विरोध करते हैं और इसे वापस लेने की मांग करते हैं। और यदि सरकार ने यूजीसी का काला कानून वापस नहीं लिया तो इसके लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करने से स्वर्ण समाज पीछे नहीं रहेगा।
जरा सोचिए , सामान्य कैटेगरी के माता-पिता, एक बार गौर से सोचिए… कल जब आपका बेटा/बेटी रात भर जागकर पढ़ाई करेगा, नीट में 680+ लाएगा, जी में टॉप रैंक लाएगा, फिर भी उसका सपना टूट जाएगा… सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका जन्म “जेनरल कैटेगरी” में हुआ है। आप चुप रहेंगे, क्योंकि “हम तो शांतिप्रिय हैं”, “हम तो समाजसेवा करते हैं”… और आपके बच्चे की आँखों में वो आंसू होंगे जो आपने कभी नहीं देखे। ये लड़ाई सिर्फ नौकरी-सीट की नहीं है। ये लड़ाई आपके बच्चे के आत्मसम्मान, उसके सपनों, और उसके भविष्य की है।
देश को जोड़ने वाली शिक्षा नीति की आवश्यकता थी, लेकिन UGC के *Promotion of Equity Regulations, 2026* शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता के बजाय भय और असंतुलन पैदा कर रहे हैं। यह किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि उस प्रणाली पर सवाल है जहाँ न्याय की प्रक्रिया एकतरफा होती दिखाई दे रही है।
करणी सेना के जिला अध्यक्ष सभी सामाजिक वर्गों के सम्मान और सुरक्षा के पक्ष में हैं, लेकिन समानता के नाम पर किसी एक वर्ग को न्याय से बाहर रखना उचित नहीं हो सकता। न्याय की परिभाषा पहचान के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए।
इन नियमों के तहत गठित इक्विटी कमेटियों में निष्पक्ष और स्वतंत्र प्रतिनिधित्व की कमी है। शिकायत की परिभाषा अत्यंत व्यापक है, जबकि झूठी शिकायतों पर जवाबदेही स्पष्ट नहीं है। शिक्षा संस्थान डर नहीं, संवाद और ज्ञान के केंद्र होने चाहिए।
हम मांग करते हैं कि नियमों पर पुनर्विचार हो, सभी छात्रों के लिए समान शिकायत तंत्र बने और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, क्योंकि देश को बाँटने नहीं, जोड़ने वाले फैसलों की ज़रूरत है।
सरकार कहती है- “समानता” पर वो समानता सिर्फ कागज पर लिखी जाती है, असली जिंदगी में तो सिर्फ जन्म के आधार पर सजा मिल रही है। जो बच्चा मेहनत से आगे बढ़ना चाहता है, उसे पीछे धकेला जा रहा है… और हम सब चुपचाप तमाशा देख रहे हैं। अगर आज आपकी चुप्पी बनी रही, तो कल आपके बच्चे पूछेंगे – “पापा/मम्मी, आपने मेरे लिए आवाज क्यों नहीं उठाई?” उस दिन आपके पास जवाब नहीं होगा। ये आपकी चुप्पी नहीं, ये आपके बच्चों का कल है।
सवर्ण आर्मी और करणी सेना समूचा श्रवण समाज परिवार इस यूजीसी के काले कानून और गंदी राजनीति विषैली राजनीति का भरपूर विरोध करता है और समूचे स्वर्ण समाज का आवाहन करता है कि वह एक पटल पर आए और इस काले कानून का विरोध करें और अपने और अपने आने वाली वीडियो की भविष्य को काला कलंक लगने से बचें और तुष्टिकरण की राजनीति जातिगत राजनीति गंदी राजनीति भारत देश में बंद हो जो कभी भी इसका स्वरूप नहीं रही है प्रदर्शन में प्रमुख रूप से राजमणि दुबे, मधुकर मिश्रा विनोद सिंह, शिवचंद्र प्रकाश पाठक, प्रदीप कुमार सिंह, मोनू सिंह, संदीप तिवारी, अभिषेक सिंह धवल सहीत सवर्ण आर्मी मिर्जापुर एवं करणी सेना मिर्जापुर के पदाधिकारी ने जिला पंचायत से मार्च करते हुए कलेक्ट मिर्जापुर पहुंचकर यूजीसी कानून का विरोध प्रदर्शन किया और इस बिल को वापस करने की मांग की

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