September 1, 2026

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बांदा31 अगस्त 26*बिना लाइफ जैकेट नाव-स्टीमर में सफर! पैलानी क्षेत्र में जिम्मेदारों की लापरवाही से खतरे में ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की जान*

बांदा31 अगस्त 26*बिना लाइफ जैकेट नाव-स्टीमर में सफर! पैलानी क्षेत्र में जिम्मेदारों की लापरवाही से खतरे में ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की जान*

ब्रेकिग न्यूज बांदा-

*बांदा31 अगस्त 26*बिना लाइफ जैकेट नाव-स्टीमर में सफर! पैलानी क्षेत्र में जिम्मेदारों की लापरवाही से खतरे में ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की जान*

**उफनती यमुना के बीच जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर लोग,सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल; हादसे का इंतजार कर रहा तहसील प्रशासन?*

यूपीआजतक बांदा से ब्यूरो सुनैना निषाद की रिपोर्ट

बांदा- पैलानी/बांदा।पैलानी तहसील क्षेत्र में यमुना,केन एवं चन्द्रावल नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।नदी के रास्ते आवागमन करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम न होने के आरोप सामने आ रहे हैं।सबसे चिंताजनक तस्वीर यह है कि ग्रामीण और स्कूली बच्चे बिना लाइफ जैकेट पहने नाव और स्टीमर से नदी पार करते नजर आ रहे हैं।नदी में पानी का बहाव तेज होने के बावजूद नाव और स्टीमर में सवार यात्रियों के लिए सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है।कई स्कूली बच्चे भी इसी तरह जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हैं।ऐसे में अगर नाव या स्टीमर का संतुलन बिगड़ा अथवा कोई अप्रिय घटना हुई तो बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ क्यों?

ग्रामीणों का कहना है कि नदी पार करने के लिए नाव और स्टीमर ही प्रमुख साधन हैं। रोजाना बड़ी संख्या में लोग और बच्चे इनसे आवागमन करते हैं।इसके बावजूद लाइफ जैकेट समेत जरूरी सुरक्षा इंतजामों को लेकर प्रशासन की गंभीरता सवालों के घेरे में है।ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित है।मौके पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था है,इसकी नियमित जांच नहीं की जा रही है।

हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना लाइफ जैकेट के नदी में सफर कर रहे लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा या उससे पहले सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त किए जाएंगे?ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन से मांग की है कि नदी में संचालित नावों और स्टीमर की तत्काल जांच कराई जाए,सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई जाएं और विशेष रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाए।बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के बीच नावों में क्षमता से अधिक यात्रियों के बैठने की स्थिति की भी जांच जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय तत्काल सुरक्षा व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

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