June 18, 2026

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बस्ती १८ जून २०२६ * धरातल पर 10 मजदूर, कागजों में 61 की हाजिरी गोरखर में मनरेगा कार्य की खुली रही पोल

बस्ती १८ जून २०२६ * धरातल पर 10 मजदूर, कागजों में 61 की हाजिरी गोरखर में मनरेगा कार्य की खुली रही पोल

बस्ती १८ जून २०२६ * धरातल पर 10 मजदूर, कागजों में 61 की हाजिरी गोरखर में मनरेगा कार्य की खुली रही पोल

-मनरेगा में बाल संरक्षण कानूनों की अनदेखी, किशोरों से कराया जा रहा काम, खुली बाल श्रम की पोल

-प्रधान-सचिव और रोजगार सेवक की मिलीभगत से सरकारी धन पर डाका

-सिकंदरपुर पुलिया से गिधानी सरहाद तक नाला खुदाई मे फर्जी हाजिरी गोरखर से जुड़ा मामला

Sachin Kumar Basti
+91 75650 22591 

बस्ती। जनपद में मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना केवल फर्जी हाजिरी तक सीमित नहीं रह गयी है, बल्कि नियमों को ताक पर रखकर 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराए जाने तक पहुंच गयी है। इससे न केवल योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।
प्राप्त समाचार के अनुसार – विकास खंड सल्टौआ गोपालपुर की ग्राम पंचायत गोरखर में सिकंदरपुर पुलिया से गिधानी सरहद तक नाला खुदाई एवं सफाई कार्य भ्रष्टाचार की भेट चढ़ रही है संबंधित मस्टर रोल में 61 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गयी है, जबकि मौके पर मात्र 10 मजदूर ही कार्य करते पाए गए। इतना ही नहीं, कार्यस्थल पर दो किशोर भी काम करते मिले, जो मनरेगा प्रावधानों एवं बाल संरक्षण कानूनों की सीधा उल्लंघन किया जा रहा है। शेष 51 मजदूरों को अनुपस्थित रहने के बावजूद हाजिर दर्शाया गया है। सरकारी अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टि कर सरकारी धन के दुरुपयोग उजागर हो रहा है। रोजगार सेवक रामतौल मौर्य एवं पंचायत सचिव अमरनाथ गौतम की मिलीभगत से फर्जी हाजिरी लगाकर मनरेगा की धनराशि का गबन करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकारी धन के इस दुरुपयोग से न केवल मनरेगा की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है, बल्कि योजना के मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने को भी नुकसान पहुंच रहा है।सवाल उठना लाजिमी हो जाता है कि जब मौके पर केवल 10 मजदूर मौजूद थे तो 61 की हाजिरी किस आधार पर दर्ज की गयी है और 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराने की अनुमति किसने दी? ब्लाक प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आखिर नियमित निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?यदि ऐसे ही फर्जी हाजिरी रजिस्टर में दर्ज होता रहेगा तो सरकारी धन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।

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