October 22, 2026

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बनारस 22 अक्टूबर 26*नवरात्रि समापन पर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में सजी दिव्य भजन संध्या:

बनारस 22 अक्टूबर 26*नवरात्रि समापन पर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में सजी दिव्य भजन संध्या:

बनारस 22 अक्टूबर 26*नवरात्रि समापन पर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में सजी दिव्य भजन संध्या:

सुप्रसिद्ध गायिका रंजना राय के भजनों पर झूमी धर्मनगरी, उमड़ा आस्था का महासागर

​वाराणसी से नीलिमा राय की विशेष रिपोर्ट | यूपीआजतक

​बनारस 22 अक्टूबर 26*नवरात्रि समापन पर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में सजी दिव्य भजन संध्या:

वाराणसी:आदिशक्ति मां भगवती की उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्रि के विधि-विधान पूर्वक और शांतिपूर्ण समापन के उपरांत, धर्म और मोक्ष की पावन नगरी काशी में भक्ति की एक अनूठी और भव्य धारा प्रवाहित हुई। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी के प्रधान कोतवाल और नगर के दंडाधिकारी माने जाने वाले बाबा काल भैरव के पावन दरबार में एक अलौकिक व अविस्मरणीय भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संपूर्ण मंदिर परिसर बाबा के जयकारों, वैदिक मंत्रोच्चार और सुरमयी आध्यात्मिक धुनों से गुंजायमान हो उठा।

​कार्यक्रम में बनारस के ख्यातिप्राप्त और लब्धप्रतिष्ठित भजन गायकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपनी साधना व गायन के माध्यम से बाबा के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। भजन संध्या का मुख्य आकर्षण बनारस की सुप्रसिद्ध भजन गायिका रंजना राय का ओजस्वी एवं भावपूर्ण गायन रहा, जिसने वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

​बनारस 22 अक्टूबर 26*नवरात्रि समापन पर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में सजी दिव्य भजन संध्या:

भव्य श्रृंगार एवं वैदिक मंगलाचरण से हुआ शुभारंभ

​भजन संध्या का आरंभ मंदिर के मुख्य अर्चकों द्वारा बाबा काल भैरव के दिव्य एवं मनोहारी महाश्रृंगार के साथ हुआ। बाबा को सुगंधित पुष्पों, नीबू की विशेष मालाओं, सुगंधित इत्र, चंदन और विशेष आभूषणों से सुसज्जित किया गया था। मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से दुल्हन की तरह सजाया गया था।

​कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत पुरोहितों द्वारा किए गए स्वस्तिवाचन, डमरू वादन और वैदिक मंगलाचरण के साथ हुई। शंख की ध्वनि और घंट-घड़ियालों की गूंज के साथ संपूर्ण वातावरण पूरी तरह शिवमय और भैरवमय बन गया। इसके उपरांत स्थानीय कलाकारों ने बाबा की स्तुति में गणेश वंदना और भैरव अष्टक का सामूहिक पाठ कर संध्या को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।

​बनारस 22 अक्टूबर 26*नवरात्रि समापन पर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में सजी दिव्य भजन संध्या:

गायिका रंजना राय की सुरमयी प्रस्तुति ने बांधा समां

​जैसे ही बनारस की लोकप्रिय भजन गायिका रंजना राय ने मंच संभाला, प्रांगण में उपस्थित भक्तों ने हर-हर महादेव और काल भैरव बाबा के गगनभेदी उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया। रंजना राय ने अपनी सुरीली, ओजस्वी और भक्ति रस से परिपूर्ण वाणी में बाबा काल भैरव की महिमा, उनके चमत्कारों और काशी के आध्यात्मिक स्वरूप पर आधारित भजनों की अविरल श्रृंखला प्रस्तुत की।

​उन्होंने जब— “अरे रुद्राक्ष की माला गले में…” और “काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव…” जैसे प्रसिद्ध भजनों का गायन शुरू किया, तो श्रोता सुध-बुध खोकर भक्ति के सागर में गोते लगाने लगे। तबले की थाप, ढोलक की गूंज, मंजीरे और कीबोर्ड की मनमोहक धुनों के संगम ने माहौल को ऐसा बांधा कि श्रद्धालु अपने स्थानों पर खड़े होकर झूमने और ताली बजाने पर विवश हो गए। उनके गाए पारंपरिक पूर्वी व बनारसी अंदाज के भजनों ने स्थानीय भक्तों के साथ-साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के हृदय को भी छू लिया।

​बनारस 22 अक्टूबर 26*नवरात्रि समापन पर काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में सजी दिव्य भजन संध्या:

आयोजन समिति द्वारा कलाकारों का सम्मान

​भजन संध्या के सफल और भावपूर्ण आयोजन के उपरांत मंदिर प्रबंधन और आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने सभी कलाकारों का अभिनंदन किया। मंच पर गायिका रंजना राय को माता की चुनरी, अंगवस्त्रम् और बाबा काल भैरव का पावन स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन समिति के सदस्यों ने कहा कि बाबा के दरबार में गायन सेवा प्रस्तुत करना हर कलाकार के लिए परम सौभाग्य का विषय होता है और रंजना राय जी ने अपने भजनों से पूरे प्रांगण को दिव्य ऊर्जा से सराबोर कर दिया है।

​उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, वितरित हुआ महाप्रसाद

​शारदीय नवरात्रि के संपन्न होते ही बाबा काल भैरव के दर्शन और इस विशेष भजन संध्या का आनंद लेने के लिए काशी ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल और देश के विभिन्न कोनों से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर के बाहर मुख्य मार्ग तक भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्रद्धालुओं ने घंटों कतारबद्ध होकर बाबा के विग्रह का दर्शन-पूजन किया और भजन संध्या का आनंद उठाया।

​सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर स्वयंसेवकों ने मुस्तैदी से कमान संभाली, जिससे भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। भजन संध्या की पूर्णाहुति के उपरांत बाबा की महाआरती उतारी गई और उपस्थित समस्त जनसमूह में हलवा, फल एवं मिष्ठान्न युक्त महाप्रसाद का वितरण किया गया। देर रात तक भक्तजन प्रसाद ग्रहण करते रहे और बाबा की जय-जयकार करते हुए अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। यह आयोजन धर्मनगरी काशी की समृद्ध लोक और शास्त्रीय संगीत परंपरा तथा अटूट आस्था का अद्भुत उदाहरण बनकर स्मृतियों में दर्ज हो गया।

Taza Khabar