प्रयागराज02नवम्बर24**एक पत्रकार सबकी लड़ाई लड़ता है लेकिन जब उसकी अपनी बात आती है तो वो आख़िर कहाँ जाये-डॉ0 कँचन सिंह
*एक पत्रकार सबकी लड़ाई लड़ता है लेकिन जब उसकी अपनी बात आती है तो वो आख़िर कहाँ जाये? और शायद इसलिए चौथे स्तंभ की जो महिमा है वह सर्वोपरि है क्योंकि पत्रकार ही है जो समाज सरकार दोनों का सेवक है यह अलग बात है कि आज उसके मायने बदल गए हैं पूरब का आक्सफोर्ड कहा जानें वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय की बात करें तो पत्रकारिता की वेकेंसी तो आयी लेकिन शायद सिर्फ अपडेट के लिए और मेरी खु़द की ये पीड़ा है कि लगातार लगभग 8 वर्षों से मेरी खुद की पत्रकारिता में प्रोफेसर के लिए आयीं वेकेंसी अपडेट तो हो रही है पर अफसोस प्रोफेसर ना होने के बावजूद भी उसे फुलफिल नहीं किया जा रहा है ऐसा क्यों? पूर्व में कुलपति रहे प्रोफेसर हर्षे जी फिर कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हंगुलु जी उसके बाद आज कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव जी हैं 25 सालों से भी ज्यादा समय का नेशनल जर्नलिज्म का लंबा चौड़ा एक्सपीरियंस होने के बावजूद भी आज तक मामला सिर्फ अपडेट पर ही लटका हुआ है हालांकि उसके पीछे तमाम कारण है जिनका जिक्र मुझे नहीं लगता करने की ज़रूरत है लेकिन हां इतना ज़रूर कहूंगी कि आज किसी भी पद प्रतिष्ठा के लिए सिर्फ़ विदुषी होना ही ज़रूरी नहीं बल्कि रसूख़दार होना ज़रूरी हैं कुलपति महोदया भी स्वयं इसकी जीतीं जागतीं उदाहरण हैं अब सवाल ये उठता है कि आखि़र हर पत्रकार रसूखदार तो हो नहीं सकता और जिनके भी बच्चे खासतौर पर मां बहन बेटियां जिनकी भी पढ़ लिख रहीं हैं आखि़र वह बड़ी-बड़ी डिग्रीयां लेकर जाएंगी कहां? और करेंगी क्या? और सबसे आश्चर्यजनक बिडम्बना का विषय यह है कि हर कोई सिर्फ अपनी मां बहन बेटियों को ही उच्च पदासीन और सुरक्षित देखना चाहता है अब यहां पर फिर से वही बात कि क्या ये सिर्फ और सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी है?? या इसमें हमारी आपकी भी कुछ सहभागिता है??या यूँ कहें ये एक समाज की व्यवस्था है और समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है की हर कोई एक दूसरे को उठाने का प्रयास करें संरक्षण का प्रयास करें न कि दबाने और कुचलने का तभी सबका कल्याण संभव हो पाएगा क्योंकि आप जो देंगे वही प्राप्त होने वाला है या होगा आज गौ वर्धन पूजा पर भगवान श्री कृष्णा जी से यही सीखने और समझने का हमें प्रयास करना चाहिए कि आख़िर कैसे सबको संरक्षित किया जा सकता है और यह शक्तियां सबके पास निहित है बस सिर्फ और सिर्फ उसके उपयोग की आवश्यकता है और इसके लिए सबको आगे आना चाहिए वरना वो दिन दूर नहीं जब सभी को इस कटघरे में खड़ा होना पड़ेगा चूंकि हमारी आपकी सत्ता और महत्ता से पहले ऊपर वाले की सत्ता और महत्ता है जब जागो तभी सवेरा* * ** *डॉ कंचन सिंह* *वरिष्ठ पत्रकार*

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