पूर्णियां बिहार 23मई26 भीड़ नारे लगाती है, मौलिक सोच इतिहास बनाती है” – सामाजिक चिंतक निसार अहमद का संदेश
मोहम्मद इरफान कामिल यूपीआजतक न्यूज़ चैनल पूर्णिया
डीवीजन बिहार
पूर्णियां बिहार।सोशल मीडिया पर इन दिनों सामाजिक चिंतक निसार अहमद का एक विचार खूब चर्चा में है। उनके पोस्टर में लिखे गए शब्द युवा पीढ़ी को मौलिक चिंतन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। निसार अहमद ने कहा है, _”याद रखिए, भीड़ नारे लगाती है, लेकिन मौलिक सोच रखने वाले लोग इतिहास में विचार छोड़ जाते हैं।
निसार अहमद को _सामाजिक चिंतक, मानवता के पुजारी और बेलौस जनसेवा में समर्पित_ व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है। उनका यह संदेश आज के दौर में बेहद प्रासंगिक माना जा रहा है, जहां अक्सर भीड़ की मानसिकता हावी रहती है। उन्होंने इशारों में समझाया कि नारे और शोरगुल अस्थायी होते हैं। जो लोग समाज को नई दिशा देते हैं, वे भीड़ से अलग हटकर सोचते हैं। उनका योगदान सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन जाते हैं।
स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि निसार अहमद का यह कथन युवाओं को तर्कशील बनने और आंख मूंदकर भीड़ का हिस्सा न बनने की सीख देता है। इतिहास गवाह है कि गांधी, भगत सिंह, डॉ. अंबेडकर जैसे महापुरुषों ने मौलिक सोच के दम पर ही समाज में बड़ा परिवर्तन किया। उनके विचार आज भी उतने ही जीवंत हैं।
निसार अहमद सीमांचल क्षेत्र में सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहते हैं। शिक्षा, भाईचारा और जनसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय रहा है। उनके इस संदेश को लोग व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बड़े पैमाने पर शेयर कर रहे हैं। खासकर छात्रों और युवाओं के बीच यह कोट्स तेजी से वायरल हो रहा है।
समाजशास्त्रियों का कहना है कि आज के डिजिटल युग में जब सूचनाएं और अफवाहें तेजी से फैलती हैं, तब मौलिक सोच और खुद के विवेक से निर्णय लेना सबसे जरूरी है। निसार अहमद का यह विचार उसी सोच को मजबूती देता है।

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