पटना22मार्च25*डायरिया प्रबंधन पर राज्यस्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन
• बच्चों को डायरिया से सुरक्षा एवं इसके प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने डाला प्रकाश
• राज्य के तीन जिले में चलाया जाएगा डायरिया जागरूकता अभियान
• पीएसआई इंडिया एवं इंडियन एकेडेमी ऑफ़ पेडियेट्रिक्स के संयोजन से कार्यशाला का हुआ आयोजन
पटना- 0 से 5 साल तक के बच्चों को डायरिया ग्रसित होने से सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सहयोगी संस्था पॉपुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई-इंडिया) एवं केनव्यू के सहयोग से लोगों को जागरुक करते हुए स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राज्य के तीन जिले में “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. कार्यक्रम के संबंध में स्वास्थ्य और आईसीडीएस अधिकारियों के साथ जिले के अन्य स्वास्थ्य सहयोगी संस्था द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए पीएसआई इंडिया, इंडियन एकेडेमी ऑफ़ पेडियेट्रिक्स एवं केनव्यू के सहयोग से पटना के एक निजी होटल में एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला में पीएसआई इंडिया की जनरल मेनेजर डॉ. नीता झा ने प्रतिनिधियों का स्वागत एवं उनका परिचय सभी से साझा किया.
ओआरएस एवं जिंक डायरिया की रोकथाम के लिए पर्याप्त:
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. ए.के.जायसवाल, पूर्व एचओडी, शिशु रोग विभाग, पीएमसीएच ने कहा कि डायरिया की रोकथाम के लिए लोगों की जागरूकता और चिकित्सकीय सहायता आवश्यक है. इसके लिए सरकारी चिकित्सकों के साथ साथ निजी चिकित्सकों द्वारा भी अपने मरीजों को जागरूक करना चाहिए. डायरिया के लक्षण एवं इसके प्रबंधन के लिए ओआरएस का घोल एवं जिंक की गोली पर्याप्त होती है. स्वच्छता का पालन कर एवं बच्चों में स्वच्छता की आदत डालकर डायरिया के प्रकोप से बचा जा सकता है.
बचाव है डायरिया से लड़ने का सर्वोत्तम तरीका:
कार्यशाला में मुख्य अतिथि डॉ. विजय प्रकाश राय, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य ने अपने संबोधन में कहा कि अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी समुदाय में डायरिया के बारे में जागरूक करने में और मेहनत करें. राज्य के उत्तरी पूर्व के जिलों में मानसून के मौसम में डायरिया का प्रकोप ज्यादा पाया जाता है. डायरिया से बचाव के लिए सरकारी एवं निजी तंत्र के साथ सहयोगी संस्थाओं की भी अहम् भूमिका होगी.
विशेषज्ञों के पैनल ने की डायरिया की रोकथाम एवं प्रबंधन पर की चर्चा:
कार्यशाला में सरकारी एवं निजी अस्पतालों के चिकित्सकों ने डायरिया से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की. सभी ने एकमत से कहा कि डायरिया के लक्षणों की ससमय पहचान एवं समुचित प्रबंधन एवं उपचार रोग से बचाव के लिए आवश्यक है. डायरिया से बचाव में हाथों की स्वच्छता के महत्त्व पर सभी विशेषज्ञों ने अपनी सहमती जतायी.
राज्य के तीन जिले में चलाया जाएगा अभियान “डायरिया से डर नहीं”:
इस मौके पर पीएसआई-इंडिया के उत्तर प्रदेश और बिहार के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर अनिल द्विवेदी ने बताया कि “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय में जागरूकता बढ़ाना और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करना है ताकि बच्चों में दस्त प्रबन्धन को प्रभावी बनाया जा सके. कार्यक्रम के तहत आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आजीविका दीदी/महिला आरोग्य समितियों के सदस्यों को प्रशिक्षित किया जाएगा. उन्हें डायरिया की सही पहचान और बचाव के बारे में बताया जाएगा. ओआरएस की महत्ता समझाई जाएगी. मीडिया के हर प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते हुए डायरिया के लक्षण, कारण और नियन्त्रण सम्बन्धी जरूरी सन्देश जन-जन में प्रसारित किया जाएगा. यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के सात जिलों के साथ साथ बिहार के तीन जिलों दरभंगा,सुपौल और पूर्णिया में स्वास्थ्य विभाग और पीएसआई इंडिया व केनव्यू के सहयोग से चलाया जायेगा.
कार्यशाला में पीएसआई इंडिया की जनरल मेनेजर डॉ. नीता झा, डॉ. विवेक द्विवेदी, जनरल मेनेजर, पीएसआई इंडिया से अकबर अली खान के साथ संस्था वरीय पदाधिकारी, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं चिकित्सक उपस्थित रहे. कार्यशाला के अंत में अरविंद उपाध्याय, स्टेट प्रोग्राम मेनेजर ने प्रतिनिधियों का धन्याद ज्ञापन किया.
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