भागलपुर बिहार से शैलेन्द कुमार गुप्ता यूपी आजतक 03सितम्बर 2025
पटना बिहार 03सितंबर 2025*मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार सरकार कार्यशाला के संयोजक और वक्ता डॉ. दिव्यानन्द*
पटना/भागलपुर। कथेतर शब्द का अर्थ है, कथा से इतर। कथा का आशय कथा साहित्य से है। कथा साहित्य में कहानी, उपन्यास की चर्चा की जाती है लेकिन इसमें लघु कथा, नाटक, एकांकी आदि भी आते हैं। इसलिए कथेतर साहित्य का मतलब कहानी, लघु कहानी, लम्बी कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी आदि से अलग हुआ। यह कथेतर शब्द का अर्थ हुआ और कथेतर साहित्य का मतलब साहित्य की उस प्रवृत्ति से है जिसमें दर्शाए गए स्थान, व्यक्ति, घटनाएँ और सन्दर्भ पूर्णतः वास्तविकता पर ही आधारित होते हैं। संस्मरण-रेखाचित्र, आत्मकथा-जीवनी, यात्रावृत्तांत-रिपोर्ताज, डायरी, पत्र-लेखन, साक्षात्कार आदि कथेतर साहित्य के अंतर्गत आते हैं। मोटे तौर पर साहित्य के दो रूप हैं। गद्य और पद्य साहित्य। पुराने समय में इन दोनों को ही काव्य कहा जाता था। आज काव्य का आशय पद्य से है।एक चम्पू साहित्य भी है जो गद्य-पद्य में लिखा जाता है। गद्य साहित्य के दो वर्ग हुए : पहला कथा साहित्य और दूसरा कथेतर साहित्य। अंग्रेजी में इसे फिक्शन और नॉन-फिक्शन कहा गया। इसका मतलब हुआ कि कथा साहित्य और कथेतर साहित्य के बीच विभाजन का एक महत्वपूर्ण बिंदु कल्पना है। उपर्युक्त बातें मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, पटना, बिहार सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय कथेतर साहित्य कार्यशाला के संयोजक और वक्ता के रूप में डॉ. दिव्यानन्द ने कही। दिनांक 02 और 03 सितम्बर 2025 को आयोजित होने वाली इस कार्यशाला में पाँच सत्र होने हैं। प्रथम सत्र के वक्ता डॉ. दिव्यानन्द हैं। बाकी के चार सत्रों का उन्हें संयोजन करना है। दो दिवसीय कार्यशाला की पूरी रूपरेखा संयोजक के रूप में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के लिए इन्होंने ही बनायी है। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और लेखक-कलाकार आदि हिस्सा ले रहे हैं।

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