September 13, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

नई दिल्ली28जुलाई26* परीक्षा सुधारों को लेकर PM मोदी का बड़ा ऐलान! नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी हाई पॉवर टास्क फ़ोर्स

नई दिल्ली28जुलाई26* परीक्षा सुधारों को लेकर PM मोदी का बड़ा ऐलान! नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी हाई पॉवर टास्क फ़ोर्स

नई दिल्ली28जुलाई26* परीक्षा सुधारों को लेकर PM मोदी का बड़ा ऐलान! नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी हाई पॉवर टास्क फ़ोर्स, पेपर लीक रोकने पर देगी राय_,*

*नई दिल्ली:* लगातार दो वर्षों तक NEET-UG परीक्षा को लेकर उठे विवादों ने देश की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2024 के बाद 2026 में भी पेपर लीक की घटना सामने आने से लाखों छात्रों का भरोसा परीक्षा प्रणाली से डगमगा गया। अब केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के जाने-माने तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक हाई-पावर टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है। सरकार का दावा है कि यह नई टीम केवल कमियों की पहचान नहीं करेगी, बल्कि भविष्य के लिए ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करने का रोडमैप देगी, जिसमें पेपर लीक और सुरक्षा में सेंध जैसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम हो।

*2024 और 2026 में क्या रहा सबसे बड़ा अंतर:*

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्ष 2024 में सामने आया NEET विवाद मुख्य रूप से कुछ राज्यों तक सीमित माना गया था। जांच के दौरान आरोप सामने आए कि प्रश्नपत्र सीमित स्तर पर लीक हुआ था। बाद में मामला अदालत तक पहुंचा और राष्ट्रीय स्तर पर दोबारा परीक्षा नहीं कराई गई। लेकिन 2026 का मामला कहीं अधिक गंभीर माना गया। इस बार प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले व्यापक स्तर पर फैलने के आरोप लगे। इसके चलते परीक्षा की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ और अंततः परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करनी पड़ी। इससे लाखों विद्यार्थियों को मानसिक तनाव, अतिरिक्त तैयारी और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ा।

*पहली समिति और नई टास्क फोर्स में क्या फर्क है:*

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में सरकार ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। इस समिति का मुख्य उद्देश्य NTA की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना और परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देना था। वहीं 2026 में गठित नई हाई-पावर टास्क फोर्स का दायरा पहले से कहीं बड़ा माना जा रहा है। इस टीम में केवल शिक्षा विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि तकनीक, साइबर सुरक्षा, खुफिया तंत्र और प्रशासन के अनुभवी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है, ताकि परीक्षा प्रणाली को आधुनिक तकनीक के अनुरूप अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

*नई टास्क फोर्स में कौन-कौन शामिल हैं:*

विदित है कि इस नई टीम में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।

नंदन नीलेकणी – तकनीक एवं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ

एस. सोमनाथ – पूर्व इसरो अध्यक्ष

तपन डेका – पूर्व आईबी प्रमुख

वी. कामकोटी – निदेशक, आईआईटी मद्रास

अनिता करवाल – पूर्व शिक्षा सचिव

*अमृत लाल मीणा – लॉजिस्टिक्स एवं प्रशासनिक विशेषज्ञ:*

सरकार का मानना है कि इन विशेषज्ञों का अनुभव भविष्य की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

*पहली समिति ने क्या सुझाव दिए थे:*

राधाकृष्णन समिति ने कई महीनों के अध्ययन के बाद विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। रिपोर्ट में NTA के स्थायी ढांचे को मजबूत करने, आउटसोर्सिंग कम करने, कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का विस्तार करने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और राज्य स्तर पर बेहतर समन्वय जैसी कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई थीं। हालांकि, इन सुझावों का सीमित स्तर पर ही क्रियान्वयन हो सका। कई बड़े संरचनात्मक सुधार समय पर लागू नहीं हो पाए, जिसके कारण परीक्षा प्रणाली पर सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए।

*नई टास्क फोर्स से क्या उम्मीदें हैं:*

नई समिति से सबसे बड़ी उम्मीद यह है कि वह केवल रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था सुझाए, जिससे भविष्य में पेपर लीक, डेटा चोरी और परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक डिजिटल सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मजबूत डेटा प्रबंधन और बेहतर निगरानी व्यवस्था परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बना सकती है।

*सरकार ने क्या संकेत दिए हैं:*

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विद्यार्थियों का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, भरोसेमंद और आधुनिक तकनीक से लैस बनाया जाएगा। सरकार ने परीक्षा में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों की दिशा में भी कदम बढ़ाने की बात कही है।

*अब छात्रों की निगाहें नई व्यवस्था पर:*

देशभर के लाखों छात्र और अभिभावक अब इस नई टास्क फोर्स से ठोस बदलाव की उम्मीद लगाए हुए हैं। यदि इसकी सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को नई मजबूती मिल सकती है। अब देखना होगा कि यह पहल भारतीय परीक्षा प्रणाली में कितना बड़ा बदलाव ला पाती है।

Taza Khabar