नई दिल्ली20मई25*ज्योति मल्होत्रा पाकिस्तान हाई कमीशन के कर्मचार दानिश के चक्कर में पड़कर जासूस बन गई ।
ऐसा ही कुछ 15 साल पहले आईएफएस अधिकारी माधुरी गुप्ता ने किया था । साल 2009 था। भारत सरकार को एक गुप्त सूचना मिली कि इस्लामाबाद में भारत एक राजनयिक पाकिस्तान की आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा है। इस सीक्रेट टिप पर चौंकाने वाला नाम सामने आया। यह कोई और नहीं बल्कि राजनयिक माधुरी गुप्ता थी। माधुरी गुप्ता भारतीय विदेश सेवा की ग्रुप बी की एक सीनियर अफसर थी। उसने दुनिया भर में विभिन्न और अहम पोस्टिंग पर काम किया था। उसे पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में प्रेस और सूचना विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच में सामने आया कि माधुरी गुप्ता हनीट्रैप का शिकार हुई थी। उसे पाकिस्तान के एक आईएसआई एजेंट ने प्यार में फंसाया था। उसकी उम्र 30 साल थी जबकि माधुरी गुप्ता 52 साल की थी। अपने से आधी उम्र के लड़के साथ माधुरी गुप्ता ने रिलेशन बनाए। उस शख्स का नाम जमशेद था। माधुरी उसके लुक पर ऐसे फिदा हुई कि उसके कहने पर सूचनाएं लीक करने लगी। माधुरी गुप्ता की मुलाकात जमशेद के साथ एक पार्टी में हुई थी। यह पार्टी इस्लामाबाद में हुई थी। जमशेद उर्फ जिम ने माधुरी से घंटों बात की। उसके बाद दोनों का नंबर एक्सचेंज हुआ और फिर बात आगे बढ़ी और उनके बीच अफेयर हो गया। यहां तक कहा जाता है कि माधुरी ने जमशेद के प्यार में पड़कर धर्म परिवर्तन कर कर लिया था। माधुरी और जमशेद के रिश्तों को लेकर कई दस्तावेज मिले थे। इनमें एक मेल था, जो माधुरी ने एक पाकिस्तानी अधिकारी को भेजा था। उसने माधुरी ने लिखा, ‘मैंने जमशेद के लिए क्या कुछ नहीं किया। लेकिन उसने मेरे साथ जानवरों जैसा व्यवाहर किया। उसने मेरी कंडीशन तक जानने की कोशिश नहीं की। जमशेद को इस बात से ऐतराज हो कि मैं किसी दूसरे पाकिस्तानी से बात क्यों करती हूं।’ माधुरी ने इस मेल पर जिम से निकाह की बात भी लिखी थी।
रॉ और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने माधुरी गुप्ता पर नज़र रखनीं शुरु कर दी । यह मिशन इतना सीक्रेट था कि इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय तक को नहीं दी गई थी। माधुरी गुप्ता को रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। उसे एक फेक सूचना दी गई। आखिरकार इंटेलिजेंस एजेंसियों का संदेह सही साबित हुआ। माधुरी गुप्ता ने यह सूचना पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी तक लीक कर दी।इसके बाद माधुरी गुप्ता को भारत बुलाया गया और अरेस्ट कर लिया गया ।
मई 2018 में निचली अदालत ने माधुरी गुप्ता को दोषी ठहराया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने उसे तीन साल जेल की सजा सुनाई। इसके बाद अक्टूबर 2021 में सामने आया कि कोविड महामारी के दौरान माधुरी गुप्ता की मौत हो गई।

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