नई दिल्ली 29 सितंबर 26*मनरेगा और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़ा हमला- प्रमोद त्यागी
प्रमोद त्यागी बोले – “लोकतंत्र और गरीब मजदूरों के अधिकारों पर हो रहा खुला डाका”
फोकस कीवर्ड: प्रमोद त्यागी मनरेगा चुनाव आयोग दिल्ली बयान
दिल्ली से विकास जैन की रिपोर्ट, यूपीआजतक
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ऑल इंडिया लेबर मनरेगा मॉनिटरिंग कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन प्रमोद त्यागी ने केंद्र सरकार की नीतियों, मनरेगा योजना की जमीनी हकीकत और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं, खासकर निर्वाचन आयोग की भूमिका पर तीखा हमला बोला है। यूपीआजतक से बातचीत करते हुए उन्होंने मनरेगा में फैले कथित भ्रष्टाचार, मजदूरों की बदहाली, बेरोजगारी और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके साथ संगठन के राष्ट्रीय सचिव मनोज जी (पटना) तथा हाथरस से जुड़े उनके अन्य सहयोगी भी मौजूद रहे।
मनरेगा का उद्देश्य और जमीनी हकीकत
प्रमोद त्यागी ने बताया कि जब देश में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की शुरुआत हुई थी, तब उनके संगठन की स्थापना का मूल उद्देश्य उन गरीब मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना था, जो दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह अपना जीवन यापन करते हैं। उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। मजदूरों को मिलने वाला 100 दिन का रोजगार कागजों तक सीमित रह गया है।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम स्तर पर प्रधान और संबंधित अधिकारी मिलकर मनरेगा का बजट निकाल लेते हैं। वास्तविक मजदूरों के स्थान पर जेसीबी और अन्य मशीनों से काम कराया जाता है, जबकि मस्टर रोल पर अपने चहेतों और रिश्तेदारों के नाम चढ़ाकर सरकारी धन की बंदरबांट कर ली जाती है। जमीन पर पसीना बहाने वाले जरूरतमंद मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी दोनों से वंचित रखा जा रहा है, जिससे गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी और बच्चों की शिक्षा का संकट गहराता जा रहा है।
चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर सवाल
बातचीत के दौरान जब उनसे चुनाव आयोग को लेकर उठ रहे सवालों पर राय पूछी गई, तो उन्होंने देश के चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के दौर में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और साख पूरे देश और दुनिया में मानी जाती थी। लेकिन मौजूदा समय में संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले जहां निष्पक्ष व्यवस्था के तहत चयन होता था, वहीं अब नियमों में बदलाव कर विपक्ष और स्वतंत्र न्यायपालिका की भूमिका को सीमित कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूचियों में भारी विसंगतियां देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि एक-एक पते पर दर्जनों फर्जी वोट दर्ज पाए गए और कई क्षेत्रों में वोटों के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विसंगतियों पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल लीपापोती की जाती है।
बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं का भविष्य
देश के राजनीतिक और आर्थिक हालात पर चर्चा करते हुए प्रमोद त्यागी ने कहा कि पिछले एक दशक में युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिले हैं। देश के सार्वजनिक उपक्रमों और संसाधनों को चुनिंदा उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है, जिससे आम नागरिक, किसान और नौजवान हाशिए पर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि किसान अपनी फसलों और लागत को लेकर परेशान हैं, जबकि शिक्षित युवा सड़कों पर रोजगार की तलाश में भटकने को मजबूर हैं।
आगामी विधानसभा चुनावों पर दृष्टिकोण
आगामी विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश की जनता अब जमीनी मुद्दों को समझ रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार युवाओं, किसानों और श्रमिकों के हक की आवाज उठा रहे हैं और देश का युवा वर्ग अब बदलाव की दिशा में सोच रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले चुनावों में जनता महंगाई, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं के संरक्षण को ध्यान में रखकर अपना फैसला सुनाएगी और विपक्षी गठबंधन मजबूती से उभरकर सामने आएगा।
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