झांसी 12 नवंबर । ग्राम परसुवा में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान के नाम जप की महिमा का वर्णन किया।
आचार्य पीयूष मनु महाराज ने ध्यान पद्धति का वर्णन करते हुए कहा कि सबसे पहले आसन को जीतना चाहिए, इसके बाद पूरक, कुंभक एवं रेचक विधि के द्वारा भगवान का ध्यान करें। कपिल अष्टाध्यायी के माध्यम से उन्होंने कहा भगवान के ध्यान लगाने के लिए सबसे पहले अच्छी संगति एवं आसान का जीतना बहुत जरूरी है। भगवान का नाम बड़े से बड़े पातकों को से मुक्ति दिलाने वाला है। अजामिल कथा का व्याख्यान सुनाते हुए कहा कि जीवन में कभी दूषित दृश्य नहीं देखना चाहिए, क्योंकि दूषित दृश्य देखने से बुद्धि दूषित हो जाती है। उन्होंने बताया कि अजामिल ने जीवन में एक दूषित दृश्य देखा और उसका पतन हो गया। लेकिन भगवान के नाम में वह शक्ति है कि अजामिल ने धोखे से अपने पुत्र का नारायण का उच्चारण किया और उसका उद्धार हो गया। उन्होंने कहा कि कान से सुंदर कथाएं सुने ,आंख से सुंदर दृश्य देखें तथा मुख से भगवान के गुणों का वर्णन करें तभी आपका जन्म सार्थक है। कथा में ओमकार मिश्रा, अरविंद मिश्रा, पिंटू मिश्रा मौजूद रहे। कथा यजमान श्रद्धा अर्पित द्विवेदी एवं निशा सत्य प्रकाश द्विवेदी ने पुराण की आरती उतारी की।
झांसी से सुरेन्द्र द्विवेदी की रिपोर्ट यूपी आजतक।

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