जोधपुर25अक्टूबर23*ऊषा गर्ग का आमरण अनशन अनवरत जारी
उषा गर्ग जी धरने पर बैठी हुई उन्होंने ना गणेश पूजन किया नहीं गणेश विसर्जन किया और ना ही उन्होंने रक्षाबंधन में भी बाबा रामदेव जी के मेले में नही गई और ना ही उन्होंने रावण दहन नही किया उन्होंने बोला कि हम धरने पर हैं रावण बुराई में अच्छाई का प्रतीक माना जाता है अन्याय में न्याय का प्रतीक माना जाता है अहंकार में सौम्यता का प्रतीक माना जाता है तो कहां पर हो रहा है न्याय सत्य की जीत तो हो ही नही रही है तो हमें झूठा ढोंग क्यों करना है भूखी प्यासी धरने के दौरान रहते हैं जो वहां मौजूद रहते हैं कैमरे लगे हैं वही बैठती हूं तीसरा महीना चल रहा है और धरने के दौरान 7 घंटे 6 घंटे कुछ पानी सुपारी या कुछ भी नहीं खाया पिया जाता बुखार आया था जब भी धरने में होते हैं तो इस दौरान जब प्रशासन को और सरकार को राजस्थान सरकार के पदाधिकारी को कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा है इससे तो अच्छी जनता है जो बहुत चिंता कर रही है मेरी मेरे प्रिय लोग चिंता करते हैं और दूसरे लोग भी चिंता करते हैं तो हम क्या बताएं यह यशश्वी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साहब 2 दिन जोधपुर में रहे विभिन्न कार्यक्रमों में छोटे से छोटे कार्यक्रम में उन्होंने भाग लिया उनके जो देवाराम जी हैं महिपाल जी है osd उनसे बराबर संपर्क में उनको बोला गया कि हमको उषा गर्ग को समय देने 5 मिनट मांगे गए नहीं दिए गए तो इसका मतलब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तो हमने उंगली उठा नही सकते क्योंकि यह बिचौलियों को ही वहां तक पहुंचने के लिए हमें मिडिएटर का ही इस्तेमाल करना पड़ता है जो सिस्टम है हम इतने बड़े आदमी नहीं है उषा गर्ग ने उन्हें बताया क्या हम इतने बड़े ना आदमी है ना इतनी बड़ी हैसियत है हमारी कि हमारे पास अशोक गहलोत का पर्सनल नंबर हो और हम सीधे बात करें मुझे कहते हुए भी बार-बार शर्म आ रही है कि अशोक गहलोत जी ने अपने भाषण में बोला था उन्होंने की मनीषा जी हमारे पड़ोसी है जहां उनका क्षेत्र खत्म होगा वहां से हमारा क्षेत्र शुरू होगा लेकिन बहुत शर्म के साथ और गुस्से के साथ उषा गर्ग ने बताया कि जिस पथ में बैठी है वह एरिया मनीषा पवार का है एक दिन भी वह आई नहीं वह अपने काम से जेडी ए आती रही लेकिन उन्होंने उषा गर्ग की तरफ झांका भी नहीं एक दिन कुछ लोग बात कर रहे थे तो उन्होंने ऐसी फॉर्मेलिटी के लिए कहा कि क्या हुआ जब उनको कहा गया मनीष पवार को क्या आपको 50 बार फाइल दी गई तो एकदम मुकर गई कि हमें कब थी तो उषा गर्ग ने गुस्से में कहा कि आपको सा फा पहनना तो सब का याद है लेकिन काम करना बिल्कुल याद नहीं है और आप हमारे विधायक हैं आप झूठ भी बोलेंगे तो आपके साथ भीड़ आपका साथ दे रही है यह बहुत ही अचंभित करती है बात की जिसके वार्ड में अगर हम वरिष्ठ कार्य करता ना भी होते एक आम जनता बुजुर्ग महिला विधवा महिला हम बोले भी नहीं तुम वार पर वार करते जाओ और हम आवाज उफ्फ तक ना करें जब उषा गर्ग अत्यंत व्यथित हालत में होकर दुखी मन से उनको लिखना पड़ा है कि जब हमारा यह लोग आते भी हैं पर पदाधिकारी लोग चुपचाप निकल जाते हैं तो क्या हम आज महात्मा गांधी जी जिंदा होते तो क्या वह अपना यही हाल रखते आज कलयुग में तभी तो गांधी जी को लोग इस तरह कहते हैं कि आज नहीं वह टाइम है जो गांधीवादी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर तो हम तकलीफ पा रहे हैं हम गांधी जी के मार्ग में चलकर ही हम तकलीफ पर है हमने सोचा था हम महात्मा गांधी जी के मार्गदर्शन में उनके चलते आए हैं तो हमने सोचा था कि गांधीवादी तरीके से हम मौन तरीके से अपनी बात रख पाएंगे लेकिन हमारी हालत कई बार खराब हुई है तबीयत में लेकिन एक हद हो गई है सब अपने में कोई रावण जला रहा कोई अपने वार्ड में जा रहा कोई किसी के घर जा रहा है दो-तीन बार यशस्वी मुख्यमंत्री सबके घरों में गए है रात को सवा 12:00 बजे यशस्वी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सूर्यकांता व्यास जी विधायक सूरसागर के पास गए तो क्या वह मेरी कुशल क्षेम पूछने नहीं आ सकते थे मेरे पति की डेथ हुई है विमल स्वरूप गर्ग की डेढ़ साल पहले कोरोना में तो भी सब बड़े-बड़े पदाधिकारी में से कोई भी नहीं आया एक नरेश जोशी जिला अध्यक्ष आए ब्लॉक अध्यक्ष आए पूर्व और बाकी जो सहयोगी कार्यकर्ता है बस वो ही आए है पदाधिकारी है कोई नहीं आया इन लोगों को जहां आपको साफ माला पहनना हो वीडियो मां अपने नाम वरी करने के लिए आते हैं यह लोग तो हमने पार्टी में जीवन भर सेवा की है कार्यकर्ताओं का उत्साह खत्म हो रहा है की पार्टी में आपको सम्मान मान सम्मान बड़ा मिल रहा है सिर्फ जिनकी हैसियत बड़ाई है वह कुछ नहीं कर रहा है वह चमचागिरी करें लल्लू चप्पू कर रहा है लेकिन जिन्होंने सच में काम किया है जो न्योछावर होगा समर्पित हो गए लेकिन उनके लिए यह हालत है सभी कार्यकर्त्ता लोग आज कह रहे हैं मुझे बता रहे हैं कि जीते जी किसी की वैल्यू नहीं है जैसे कोई मरेगा पार्टी सरकार कहेगी तुरंत फलाने के घर वालों को एक को सरकारी नौकरी दी जाएगी ₹500000 दिए जाएंगे और एक प्लाट दिया जाएगा लेकिन जीते जी किसी की यह हालत हो रही है उसकी सुध भी नहीं ली जा रही है उषा गर्ग कहती है की यशस्वी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ऐसा कर ही नहीं सकते उन तक यह समाचार पहुंचाया ही नहीं गया है यह उनका पूरा विश्वास है क्या करें अशोक गहलोत साहब को यह पता चले कि मैं भूखी प्यासी धरने पर बैठी हूं तीसरा महीना चल रहा है तो वह जरूर सुध बुद्ध लेंगे लेकिन उषा गर्ग ने भी प्रण कर रक्खा है कितने त्योहार निकल गए अब चाहे कोई भी दिवाली भी हो रक्षाबंधन के दिन भी बैठी थी गणेश चतुर्थी रामदेवरा मेला तब उन्होंने सबसे वंचित होकर धरना ही स्थान है किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया किसी ने लेकिन उषा गर्ग बहुत गंभीर है 30 वर्षों से सक्रिय भूमिका निभाई खुद पार्टी की सेवा में समर्पित है उससे पहले उनके स्वर्ग में ससुर जी श्री चंपालाल जी गर्ग ने भी पार्टी में कोई पद न लेते हुए श्री लादूराम जी चौधरी श्री धर्मनारायण जी माथुर साहब के साथ राजस्थान बस एसोसिएशन के सचिव पद में थे स्वर्गीय श्री चंपालाल जी ने भी कोई पद नही लिया लेकिन पार्टी में सेवाए की है जो सोजती गेट कॉफी हाउस के पास राजस्थान बैंक के ऊपर उन्होंने पार्टियों में समर्पित भावना से अपनी सेवाएं दी आज यह हालत है की मेरा प्लॉट खुद का प्लाट भी मानसिंह देवड़ा जी से लिया गया था कांग्रेस पार्टी के द्वारा ही लिया गया था और कांग्रेस के समय उनसे काम नहीं होता चक्कर खाकर चक्कर काट काट के परेशान होकर थक हार के कहती है मुझे धरने पर बैठना पड़ा मेरी बात फिर भी सुनवाई नहीं हुई मैं धरने के दौरान मर जाऊं तो जनता के सामने सबसे अपील करना चाहती हैं ना ही मेरे मरने के बाद मेरे परिवार को प्लाट दिया जाए नहीं मेरे परिवार में किसी को सरकारी नौकरी दी जाए और ना ही कोई ₹1 भी मेरे परिवार को किसी को भी न दिया जाए आपको कुछ देना है तो मेरे जैसी परेशान विधवा व्यथित बुजुर्ग महिला कोई इस तरह की हो उसको आप जरूर न्याय देना मेरे मरने के बाद मुझे लग ही रहा है चुनाव से पहले ही मेरे प्राण निकल जाएंगे 62 साल की हो गई हूं और उन्होंने कहा उन्हे कोई भी अंडर एस्टीमेट कोई भी ना करें मुझे मेरा धरना बहुत मजबूत है और जब तक जिंदा हूं फिर प्रशासन के और पदाधिकारी के जू तक नही रेंगी है धरने में ही
रहेंगे मेरा काम नहीं होगा भले चुनाव की डेट भी हो तो भी मैं वोट जरूर दूंगी लेकिन फिर भी धरने में रहूंगी दिन पर सुबह वोट देने के बाद यह उषा गर्ग का प्रण है और यह न सोचे कोई मुझे हल्के में बिल्कुल भी ना ले अभी मुझे बहुत सारे लोग इतना बोलते हैं लेकिन मैं किसी की नहीं सुनती हूं कि आप क्यों पार्टी के लिए करते हो आपने बहुत के प्रश्न ये आपके साथ ही हालत है तो हम जनता के साथ क्या होती होगी उनका कोई जवाब नहीं देती हूं लेकिन दुखी तो बहुत ज्यादा हूं और मेरा धरना बिल्कुल मजबूती से है थकी हारी जरूर हूं लेकिन टूटी नहीं हूं उषा गर्ग ने बताया

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