जोधपुर 23दिसम्बर 25*पारंपरिक हस्तशिल्प (लहरिया, बंधेज, चुनरी) को प्रदूषण नियमों से छूट देने एवं संरक्षण हेतु अपील
जोधपुर *हम आपका ध्यान जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों में सदियों से चल रहे लहरिया, बंधेज, और रंग रंगाई के पारंपरिक कुटीर उद्योग की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। यह कार्य मात्र एक व्यापार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत है जो राजवाड़ों के समय से चली आ रही है।
हमारी मुख्य चिंताएँ और माँगें:
* कुटीर बनाम औद्योगिक अंतर: प्रशासन प्रदूषण के नाम पर बड़ी फैक्ट्रियों के साथ-साथ घरों में चलने वाले छोटे लघु उद्योगों को भी बंद कर रहा है। हमारा काम मशीनी नहीं, बल्कि हाथ का हुनर है।
* आजीविका का संकटः हजारों कारीगर परिवार इस काम के बंद होने से भुखमरी की कगार पर हैं।
* ईको-फ्रेंडली ट्रांजिशनः हम प्रदूषण नियमों का सम्मान करते हैं। सरकार हमें बंद करने के बजाय ‘नेचुरल डाइंग’ (प्राकृतिक रंगों) के उपयोग की ट्रेनिंग और संसाधन उपलब्ध कराए।
* सरकारी संरक्षणः इस कला को ‘लुप्तप्राय श्रेणी’ में रखकर विशेष आर्थिक सहायता और अलग ‘वर्किंग ज़ोन’ दिया जाए जहाँ कारीगर बिना कानूनी डर के अपना काम जारी रख सकें।
निष्कर्षः
हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि मशीनरी प्रदूषण और हस्तशिल्प के बीच फर्क समझा जाए। हमारी कला को बचाने के लिए नीतिगत बदलाव किए जाएँ ताकि यह प्राचीन परंपरा जीवित रह सके।

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