कौशाम्बी31अक्टूबर23*पिता के वचनों की रक्षा हेतु वन वन भटके श्री राम*
*हम तो चले परदेश ,अब परदेशी हो गए*
*अझुवा कौशांबी* आदर्श नगर पंचायत अझुवा के गांधी चबूतरे मैदान में आयोजित रामकथा रामलीला के पांचवें दिन बीती रात्रि को राम वनवास की लीला देख दर्शक भाव विभोर हो गए।
राजा दशरथ गुरु वशिष्ठ की सलाह पर श्री राम को राजपाट सौंपने का फैसला करते हैं इस बात की जानकारी महारानी कैकेई की दासी मंथरा को होती है मंथरा दासी महारानी कैकेई के कान भरती है उसके बहकावे में आकर कैकेई कोपभवन में जाकर लेट जाती है राजा दशरथ कोपभवन में ककेयी को मनाने जाते हैं लेकिन कैकेई अपने 2 वरदान जो राजा दशरथ ने कैकेई को दिए थे उसकी याद दिलाते हुए वरदान मांगने पर अड़ जाती है राजा दसरथ से राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजपाट मांगती है महराजा दशरथ अपने वचनों को हारकर वरदान देते हैं पिता के वचनों की रक्षा हेतु राम वनगमन को चल देते हैं उनके बहुत समझाने पर भी सीता और लक्ष्मण भी वन गमन को तैयार हो कर चल देते हैं अयोध्यावासियों द्वारा राम को रुकने का अनुरोध मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो जाते हैं तमसा नदी के पास विश्राम का मंचन किया जाता है। मंचन देखने वालों में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष ओमप्रकाश कुशवाहा सहित कमेटी के पदाधिकारी एवम सैकड़ों रामभक्त मौजूद रहे हैं।

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