March 25, 2026

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कौशाम्बी20नवम्बर23*भागवत कथा सुनने से राजा परीक्षित को मिला मोक्ष*

कौशाम्बी20नवम्बर23*भागवत कथा सुनने से राजा परीक्षित को मिला मोक्ष*

कौशाम्बी20नवम्बर23*भागवत कथा सुनने से राजा परीक्षित को मिला मोक्ष*

*कौशांबी* करारी क्षेत्र के शाहपुर टिकरी में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास चेतन दास महाराज ने परीक्षित श्राप प्रसंग सुनाया। बताया कि ऋषि पुत्र के श्राप से डरकर राजा परीक्षित ने इससे मुक्ति का उपाय खोजना शुरू किया। अपने पुत्र जनमेजय को राजपाट सौंप कर गंगा किनारे तपस्या को चले गए।वहां व्यास नंदन सुकदेव महराज से उनकी भेंट हुई। राजा परीक्षित ने सुकदेव मुनि से मुक्ति का उपाय पूछा। मुनि ने उन्हें श्रीमद् भागवत कथा सुनने की सलाह दी। यह कथा सुनने के बाद राजा परीक्षित मृत्यु के भय से मुक्त हो गए।

चेतन दास महाराज ने कहा कि
भागवत कथा सुनने से मन का शुद्धिकरण होता है कथा की सार्थकता तब ही सिद्ध होती है जब इसे हम अपने जीवन व व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हैं। अपने जीवन को आनंदमय, मंगलमय बनाकर अपना आत्म कल्याण करें। अन्यथा यह कथा केवल मनोरंजन, कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद‌् भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट हो जाते हैं। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है। कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है, जिसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद‌् भागवत मोक्ष दायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं। श्रीमदभागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है ।
कथा से पंडाल राधे राधे के जयकारे लगने लगा इस मौके पर वीरेंद्र सिंह, सुमित्रा देवी,शिव लाल,संदीप कुमार, जयकरन सिंह,सतेंद्र,सत्यम,भार्गव, आदि शामिल रहे।

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