March 14, 2026

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कौशाम्बी20नवम्बर*द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन पूजन आराधना से भक्तों के कट जाते हैं सम्पूर्ण पाप*

कौशाम्बी20नवम्बर*द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन पूजन आराधना से भक्तों के कट जाते हैं सम्पूर्ण पाप*

कौशाम्बी20नवम्बर*द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन पूजन आराधना से भक्तों के कट जाते हैं सम्पूर्ण पाप*

*द्वादश ज्योतिर्लिंग एवं एकादशी महत्तम पर कथावाचक ने किया वर्णन*

*पश्चिम शरीरा कस्बे में भक्तिमई संगीत पर चल रहा है शिव महापुराण कथा*

*कौशाम्बी* पश्चिम शरीरा कस्बे में आयोजित शिव महापुराण कथा आयोजन में कथा वाचक अनूप तिवारी राम जी महाराज ने द्वादश ज्योतिर्लिंग के महत्व के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए भक्तों को भावविभोर कर दिया है इस मौके पर उन्होंने प्रत्येक ज्योतिर्लिंग के अलग-अलग महत्व को विस्तार से बताया है उन्होंने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन पूजन आराधना से भक्तों के सारे पाप कट जाते हैं उन्होंने एकादशी महत्तम के बारे में भी विस्तार से चर्चा की कथावाचक ने कहा कि भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग देश के अलग-अलग भागों में स्थित हैं। इन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है इन ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजन, आराधना से भक्तों के जन्म-जन्मातर के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं। वे भगवान शिव की कृपा के पात्र बनते हैं। ऐसे कल्याणकारी ज्योतिर्लिंगों की कथा हमने एक साथ यहां उपलब्ध कराई हैं।

उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंग में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की चर्चा करते हुए कहा कि गुजरात प्रांत के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे सोमनाथ नामक विश्वप्रसिद्ध मंदिर में यह ज्योतिर्लिंग स्थापित है। पहले यह क्षेत्र प्रभासक्षेत्र के नाम से जाना जाता था। यहीं भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने जरा नामक व्याध के बाण को निमित्त बनाकर अपनी लीला का संवरण किया था। यहां के ज्योतिर्लिंग की कथा का पुराणों में इस प्रकार से वर्णन है-

शिव महापुराण की कथा को आगे बढ़ाते हुए कथावाचक ने कहा कि दक्ष प्रजापति की सत्ताइस कन्याएं थीं। उन सभी का विवाह चंद्रदेव के साथ हुआ था। किंतु चंद्रमा का समस्त अनुराग व प्रेम उनमें से केवल रोहिणी के प्रति ही रहता था। उनके इस कृत्य से दक्ष प्रजापति की अन्य कन्याएं बहुत अप्रसन्न रहती थीं। उन्होंने अपनी यह व्यथा-कथा अपने पिता को सुनाई। दक्ष प्रजापति ने इसके लिए चंद्रदेव को अनेक प्रकार से समझाया। किंतु रोहिणी के वशीभूत उनके हृदय पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अंततः दक्ष ने कुद्ध होकर उन्हें ‘क्षयग्रस्त’ हो जाने का शाप दे दिया। इस शाप के कारण चंद्रदेव तत्काल क्षयग्रस्त हो गए। उनके क्षयग्रस्त होते ही पृथ्वी पर सुधा-शीतलता वर्षण का उनका सारा कार्य रूक गया। चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई। चंद्रमा भी बहुत दुखी और चिंतित थे।

उनकी प्रार्थना सुनकर इंद्रादि देवता तथा वसिष्ठ आदि ऋषिगण उनके उद्धार के लिए पितामह ब्रह्माजी के पास गए। सारी बातों को सुनकर ब्रह्माजी ने कहा- ‘चंद्रमा अपने शाप-विमोचन के लिए अन्य देवों के साथ पवित्र प्रभासक्षेत्र में जाकर मृत्युंजय भगवान्‌ शिव की आराधना करें। उनकी कृपा से अवश्य ही इनका शाप नष्ट हो जाएगा और ये रोगमक्त हो जाएंगे।

उनके कथनानुसार चंद्रदेव ने मृत्युंजय भगवान्‌ की आराधना का सारा कार्य पूरा किया। उन्होंने घोर तपस्या करते हुए दस करोड़ बार मृत्युंजय मंत्र का जप किया। इससे प्रसन्न होकर मृत्युंजय-भगवान शिव ने उन्हें अमरत्व का वर प्रदान किया। उन्होंने कहा- ‘चंद्रदेव! तुम शोक न करो। मेरे वर से तुम्हारा शाप-मोचन तो होगा ही, साथ ही साथ प्रजापति दक्ष के वचनों की रक्षा भी हो जाएगी। कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन तुम्हारी एक-एक कला क्षीण होगी, किंतु पुनः शुक्ल पक्ष में उसी क्रम से तुम्हारी एक-एक कला बढ़ जाया करेगी। इस प्रकार प्रत्येक पूर्णिमा को तुम्हें पूर्ण चंद्रत्व प्राप्त होता रहेगा।’ चंद्रमा को मिलने वाले इस वरदान से सारे लोकों के प्राणी प्रसन्न हो उठे। सुधाकर चन्द्रदेव पुनः दसों दिशाओं में सुधा-वर्षण का कार्य पूर्ववत्‌ करने लगे।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की चर्चा करते हुए कथावाचक ने कहा कि आंध्रप्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर दक्षिण का कैलास कहे जाने वाले श्रीशैलपर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग स्थित है। महाभारत, शिवपुराण तथा पद्मपुराण आदि धर्मग्रंथों में इसकी महिमा और महत्ता का विस्तार से वर्णन किया गया है।पुराणों में इस ज्योतिर्लिंग की कथा इस प्रकार से वर्णन है। एक समय की बात है, भगवान शंकरजी के दोनों पुत्र श्रीगणेश और श्रीकार्त्तिकेय स्वामी विवाह के लिए परस्पर झगड़ने लगे। प्रत्येक का आग्रह था कि पहले मेरा विवाह किया जाए इसी तरह अन्य ज्योतिर्लिंग की चर्चा करते हुए उन्होंने बारह ज्योतिर्लिंग के दर्शन पूजन आराधना के महत्व को बताया है कथा के दौरान शिव महापुराण कथा की आयोजक माधुरी केसरवानी आराधना, शोभा , रीता देवी वृंदा लेखपाल, मिठाई लाल, पवन केसरवानी, आकाश कौशल, पप्पू, कृष्ण चंद्र, अशोक द्विवेदी, हीरालाल केसरवानी सहित सैकड़ों महिला-पुरुष भक्त मौजूद रहे