कौशाम्बी 11दिसम्बर 25**रूपेश त्रिपाठी ने जन्मदिन पर 151 बच्चों को स्वेटर जैकेट और 40 वृद्धजनों को शॉल कंबल बांटकर दिया मानवता का संदेश*
*कड़ा कौशाम्बी* युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय लिखते हुए समाजसेवी रूपेश त्रिपाठी ने अपने जन्मदिन को निजी उत्सव के बजाय एक महा अभियान में बदल दिया उन्होंने किसी पार्टी या दिखावे से दूर रहकर एक ही दिन में दो महत्वपूर्ण स्थानों पर जाकर मानवता की मिसाल पेश की जिसमें कुल 151 स्कूली बच्चों और 40 वृद्धजनों को गर्म वस्त्र और खाद्य सामग्री वितरित की गई अभियान की शुरुआत रूपेश त्रिपाठी ने अपने गांव गनपा के प्राथमिक विद्यालय से की यहाँ उन्होंने 151 नन्हे छात्र छात्राओं को ठंड के कहर से बचाने के लिए गरम जैकेट और स्वेटर वितरित किए यह कदम केवल कपड़े बांटना नहीं था बल्कि यह समाज के प्रति उनके गहरे दायित्व और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने की उनकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में हुए इस भावनात्मक कार्यक्रम में रूपेश त्रिपाठी ने पूरी संवेदनशीलता के साथ हर बच्चे को गर्म वस्त्र भेंट किए जिससे बच्चों के चेहरों पर तत्काल राहत और खुशी झलक उठी प्रधानाचार्य राजेश मिश्रा ने इस नेक कार्य को परोपकार की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि ठंड चरम पर है और रूपेश जी का यह समय पर किया गया वितरण हमारे बच्चों के लिए जीवन रक्षक सिद्ध होगा हम उनकी सामाजिक चेतना को नमन करते हैं इस प्रेरणादायक पहल में रूपेश त्रिपाठी के छोटे भाई दिवेश त्रिपाठी और सहयोगी बच्चा सिंह सेंगर प्रधान प्रत्यासी भी सक्रिय रूप से शामिल रहे उन्होंने गर्म कपड़ों के साथ साथ सभी बच्चों के बीच स्नेह भरे लड्डू भी बांटे जिससे यह वितरण समारोह एक सामुदायिक पर्व में बदल गया इसके बाद रूपेश त्रिपाठी ने अपने सेवा अभियान को आगे बढ़ाते हुए मंझनपुर स्थित वृद्ध आश्रम पहुंचे यहाँ उन्होंने 27 पुरुष और 13 महिलाओं सहित कुल 40 वृद्धजनों को ठंड से बचाव के लिए शॉल और कंबल के साथ लड्डू वितरित किए वृद्ध आश्रम में रूपेश त्रिपाठी को अपने बीच पाकर वृद्धजन भावुक हो गए कई लोगों ने उन्हें गले लगाकर अपना हाल चाल बताया जिससे मौके पर अत्यंत भावुक माहौल बन गया इस दौरान रूपेश त्रिपाठी ने सभी से बातचीत की और उन्हें आश्वासन दिया कि हम आपके साथ हैं उन्होंने भविष्य में भी यहाँ आकर सेवा कार्य जारी रखने के लिए वचनबद्धता व्यक्त की रूपेश त्रिपाठी ने अपने कार्य से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जन्मदिन हो तो दूसरों के जीवन में रोशनी लाने वाला होना चाहिए उनकी इस पहल ने न केवल 191 परिवारों 151 बच्चे + 40 वृद्धजन को राहत दी है बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं को यह सोचने पर मजबूर किया है कि जीवन के खास पलों को किस तरह सार्थकता के साथ जिया जा सकता है उनका यह जन्मदिन एक व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं अधिक सामूहिक प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

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