January 23, 2026

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कौशाम्बी २३ जनवरी २६*समता, समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांत की रक्षा करता है शोषण के विरुद्ध अधिकार- डॉ. नरेन्द्र दिवाकर*

कौशाम्बी २३ जनवरी २६*समता, समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांत की रक्षा करता है शोषण के विरुद्ध अधिकार- डॉ. नरेन्द्र दिवाकर*

कौशाम्बी २३ जनवरी २६*समता, समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांत की रक्षा करता है शोषण के विरुद्ध अधिकार- डॉ. नरेन्द्र दिवाकर*

*बेला देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित हुआ विधिक साक्षरता एवं जागरुकता शिविर*

*कौशाम्बी* जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जनपद न्यायालय कौशाम्बी के तत्वावधान में दिनांक 22.01.2026 को बेला देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेंवढ़ा, चायल में मा. सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित निर्णयों का व्यापक प्रचार-प्रसार, नशा मुक्त एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान, शोषण के विरूध अधिकार, पॉश एक्ट व बच्चो के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

पराविधिक स्वयं सेवक ममता दिवाकर ने पॉक्सो एक्ट अर्थात यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 पर बात करते हुए कहा कि इस अधिनियम में गंभीर अपराधों में मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है।यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 या पॉश एक्ट यौन उत्पीड़न की शिकार पीड़िता की शिकायतों के समाधान के लिए संस्थान के भीतर आंतरिक परिवाद समिति और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की शिकायतों के निवारण के लिए स्थानीय परिवाद समिति के गठन का प्रावधान है जिससे महिला कर्मचारियों की भागीदारी और उत्पादकता में वृद्धि हो सके।साथ ही केन्द्र और राज्य सरकार के द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं यथा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, कन्या सुमंगला योजना, वृद्धापेंशन और निराश्रित महिला पेंशन योजना, दिव्यांग सहायता योजना, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा प्रदत्त सेवाओं आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान किया।

डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने शोषण के विरूद्ध अधिकार और बाल अधिकार पर बात करते हुए कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई कानूनी प्रावधान है।शोषण के विरुद्ध अधिकार किसी भी व्यक्ति को गुलामी और अमानवीय परिस्थितियों से बचाते हैं। शोषण के विरुद्ध अधिकार से जुड़े प्रावधान भारतीय संविधान (अनु. 23 और 24) सहित कई कानूनों में दिए गए हैं। अनैतिक व्यापार अधिनियम 1956,किशोर न्याय अधिनियम (2015), शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम (2009), बाल श्रम निषेध (संशोधन) अधिनियम (2016), और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (POCSO) अधिनियम (2012), बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 हैं, जो बच्चों को शिक्षा, शोषण से सुरक्षा प्रदान करते हैं और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करते हैं।शोषण के विरुद्ध अधिकार महिलाओं और बच्चों के अनैतिक व्यापार, बेगार, बंधुआ मजदूरी का उन्मूलन, बालश्रम पर रोक लगाने के साथ ही सुनिश्चित करता है कि श्रमिकों के साथ गुलामों की तरह व्यवहार न हो और उन्हें उनके काम करने के लिए न्यायसंगत वेतन व सम्मानजनक स्थितियां मिले।

शोषण के विरुद्ध अधिकार समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करके समता, समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांत की रक्षा करता है।शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों को नशा मुक्त भारत एवं बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की शपथ भी दिलवाई गई।कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका दीपा सक्सेना तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रबंधक अंजनी कुमार यादव ने दिया।इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ.अभिनव यादव, डॉ. संदीप दिवाकर, नेहा सिंह, जिज्ञासा शर्मा, राहुल दिवाकर, श्वेता यादव, सपना, विवेक कुमार यादव, एवं पैरा लीगल वालंटियर ममता दिवाकर अमरदीप दिवाकर सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

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