April 28, 2026

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कोलकाता28अप्रैल26*झाड़ू से आगे: पूर्वी रेलवे कैसे पटरियों को स्वच्छता के कैनवास में बदल रहा है*

कोलकाता28अप्रैल26*झाड़ू से आगे: पूर्वी रेलवे कैसे पटरियों को स्वच्छता के कैनवास में बदल रहा है*

मालदा डिवीजन से शैलेन्द्र कुमार गुप्ता

2026/04/28

कोलकाता28अप्रैल26*झाड़ू से आगे: पूर्वी रेलवे कैसे पटरियों को स्वच्छता के कैनवास में बदल रहा है*

कोलकातता अप्रैल 28, 2026 :पटरियों पर दौड़ती ट्रेनों की लयबद्ध आवाज़ इस माह एक नई और सशक्त धुन के साथ गूंज रही है—“एक कदम स्वच्छता की ओर” के नारों और हजारों स्वयंसेवकों के दृढ़ संकल्प के साथ। वर्तमान में 15 अप्रैल से प्रारंभ होकर 14 मई तक चलने वाला एक व्यापक, माहव्यापी स्वच्छता अभियान अपने चरम पर है। यह महाअभियान पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देउसकर के प्रत्यक्ष नेतृत्व में संचालित हो रहा है, जिनकी दूरदर्शिता ने संगठन के प्रत्येक स्तर को सक्रिय कर दिया है। शीर्ष कार्यालयों से लेकर प्लेटफॉर्म स्तर तक, सियालदह, हावड़ा, आसनसोल और मालदा मंडलों के मंडल रेल प्रबंधक चौबीसों घंटे प्रगति की निगरानी कर रहे हैं, जिन्हें पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन (EnHM) तथा अन्य विभागों का सतत सहयोग प्राप्त है।

इस अभियान की वास्तविक ऊर्जा पूर्व रेलवे भारत स्काउट्स एवं गाइड्स द्वारा संचालित की जा रही है, जिन्होंने स्वच्छता को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। 27 और 28 अप्रैल को विभिन्न स्थानों पर इस अभियान ने विशेष गति प्राप्त की। सियालदह जिला अंतर्गत बैरकपुर समूह ने बैरकपुर हनुमान मंदिर एवं स्थानीय स्टेशन परिसर में जागरूकता अभियान चलाकर स्वच्छता एवं नागरिक कर्तव्यों के प्रति लोगों को प्रेरित किया। वहीं विवेकानंद समूह के आठ सदस्यों की टीम ने बी.बी.डी. बाग रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ट्रैक को स्वच्छ रखने के महत्व के प्रति जागरूक किया। इसी क्रम में बारासात एवं नैहाटी समूहों ने भी व्यापक जनसंपर्क किया, जिसमें नैहाटी समूह ने चलती ट्रेनों में यात्रियों के बीच जागरूकता सत्र आयोजित कर संदेश को सीधे लोगों तक पहुंचाया।

कांचरापाड़ा जिला संघ ने भी इस अभियान को नई दिशा दी है। दक्षिण समूह के 55 सदस्यों ने कांचरापाड़ा वर्कशॉप क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाते हुए प्लास्टिक कचरे का पृथक्करण किया, जिसके उपरांत गाइड्स द्वारा रेलवे सुरक्षा एवं स्वच्छता पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। ऑफिसर्स कॉलोनी समूह ने 46 सदस्यों एवं दो यूनिट लीडरों की सहभागिता से स्वच्छता को रचनात्मक स्वरूप प्रदान किया। रोवर्स एवं रेंजर्स के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई तथा कल्याणी प्लेटफॉर्म पर व्यंग्यात्मक नुक्कड़ नाटक के माध्यम से थूकने एवं गंदगी फैलाने के दुष्प्रभावों को उजागर किया गया। चित्तरंजन और मधुपुर जंक्शन के बीच की पटरियों पर, ट्रेन 63509 के स्वयंसेवकों ने डिब्बों को चलती-फिरती क्लासरूम में बदल दिया, जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि “स्वच्छ भारत, हरित भारत” का संदेश उतनी ही तेज़ी से आगे बढ़े, जितनी तेज़ी से खुद इंजन चलता है।

यह संपूर्ण पहल यात्रियों के हित को केंद्र में रखकर तैयार की गई है, क्योंकि स्वच्छ स्टेशन एवं स्वच्छ कोच एक स्वस्थ एवं सम्मानजनक यात्रा अनुभव सुनिश्चित करते हैं। तथापि, रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अत्याधुनिक सफाई व्यवस्था भी जन-जागरूकता के बिना प्रभावी नहीं हो सकती। “स्वच्छ रेल” का सपना तभी साकार होगा जब प्रत्येक यात्री अपने घर की भांति रेलवे परिसरों एवं कोचों को स्वच्छ रखने का संकल्प लेगा। कूड़ेदानों का उपयोग एवं प्लास्टिक का परित्याग प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

इन दो दिनों की सफलता पर विचार व्यक्त करते हुए, पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझी ने कहा कि महाप्रबंधक श्री मिलिंद देउसकर के मार्गदर्शन में रेलवे कर्मचारी एवं भारत स्काउट्स एवं गाइड्स निरंतर प्रयासरत हैं, परंतु इस अभियान की अंतिम सफलता यात्रियों की सक्रिय सहभागिता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि रेलवे एक राष्ट्रीय धरोहर है और केवल सामूहिक जिम्मेदारी एवं जागरूकता के माध्यम से ही हम अपने स्टेशनों को विश्वस्तरीय, स्वच्छ एवं स्वस्थ केंद्रों में परिवर्तित कर सकते हैं।

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