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कानपूर ८जुन २०२६ * पूर्व की सरकारों की तरह अब उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार में केडीए विभाग द्वारा गरीब पीड़ित किसानों का शोषण तो जारी है ही लेकिन अब केडीए द्वारा डाटा तक ब्लॉक कर दिया गया
न्यू कानपुर सिटी योजना में बड़ा खेल या बड़ा सवाल? गरीब किसानों ने मांगा 30 साल का हिसाब-किताब,बहुचर्चित न्यू कानपुर सिटी योजना को लेकर सामने आए ADM (भू-अधिपत्य) के पत्र ने एक बार फिर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं
वर्ष 1996 में धारा 17 के तहत तत्काल आवश्यकता बताकर उनकी जमीनों का अधिग्रहण किया गया, लेकिन तीन दशक बीत जाने के बाद भी कई स्थानों पर न तो विकास कार्य दिखाई दिए और न ही यह स्पष्ट किया गया कि वर्ष 2010 में घोषित अवार्ड के बाद क़रीब सात गांवों के कितने किसानों को मुआवजा दिया गया, कब दिया गया और कितने किसान आज भी अपने हक से वंचित हैं।
किसानों का आरोप है कि विभागीय फाइलों में सब कुछ पूर्ण दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में अनेक परिवार आज भी अपनी जमीन और मुआवजे की वास्तविक स्थिति जानने के लिए भटक रहे हैं।
पीड़ित किसानों का आरोप है कि वर्षों तक विभागीय अधिकारियों ने पारदर्शिता के बजाय भ्रम की स्थिति बनाए रखी, जिससे भोले-भाले किसान अपनी ही जमीनों पर हुए प्रशासनिक कब्जे और कानूनी स्थिति से अनजान रहे।
पीड़ित किसानों का कहना है कि जिन्होंने अदालतों में लंबी लड़ाई लड़कर अपने अधिकारों की रक्षा की और बाद में बढ़ा हुआ मुआवजा प्राप्त किया, उन्हीं मामलों को आधार बनाकर पूरे अधिग्रहण को सफल और न्यायपूर्ण बताया जा रहा है।
पीड़ित किसान सवाल उठा रहे हैं कि यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ था तो मुआवजा वितरण का पूरा रिकॉर्ड, लाभान्वित किसानों की संख्या और अधिग्रहित जमीनों पर हुए कार्यों का सार्वजनिक ब्यौरा क्यों नहीं जारी किया जा रहा? पीड़ित किसानों के अनुसार उनके बच्चों का भविष्य अधर में कर दिया गया है

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