[20/10, 12:41] +91 78608 31175: *कानपुर कमिश्नरेट ब्रेकिंग*
कानपुर में कमिश्नरेट प्राणी लागू होने के बाद भी यातायात व्यवस्था धड़ाम
पनकी क्षेत्र नो एंट्री जोन में भारी वाहन प्रवेश कर भर रहे फर्राटा
साइकिल सवार की जान जाने के बाद भी यातायात पुलिस ने नही लिया सबक
बीते सप्ताह नो एंट्री जोन में फर्राटा भर रहे ट्रक ने साइकिल सवार को था रौंदा
साइकिल सवार की मौके पर हुई थी दर्दनाक मौत, ट्रक चालक हुआ था फरार
नो एंट्री जोन में भारी वाहनों के प्रवेश पर लगाम लगाने में क्यों नकाम यातायात पुलिस
आखिर नो एंट्री जोन में फर्राटा भर रहे भारी वाहनों पर कब लगेगी लागाम
नो एंट्री जोन में तैनात यातायात पुलिस से सेटिंग-गेटिंग कर नो एंट्री माँ में भारी वाहन करते प्रवेश- सूत्र
कानपुर कमिश्नरेट पनकी थाना क्षेत्र का मामला
[20/10, 20:43] +91 93053 79233: *सड़क पर फिल्मी शूटिंग,कई घायल*
करीब तीन लोग पनकी मंदिर से रतनपुर जाने वाली रोड पर नारायणा के निकट होकर गुजर रहे थे… अचानक 4 से 5 लोग उनके वाहन को रोक लेते हैं। और लाठी-डंडों से प्रहार प्रारंभ कर देते हैं। कुछ मिनटों तक तेरे नाम फिल्म वाला मारपीट का सीन सड़क पर यथावत होता रहता है। और तीन लोग बीच सड़क पर मार खाते रहते हैं और तेरे नाम फिल्म के सलमान खान और उसके मित्र का रोल अदा कर रहे नवयुवकों की भीड़ उन्हें मारती रहती है। लेकिन सड़कों पर हीरो का रोल अदा कर रहे समाज के दुश्मनों के हाथों मे कौन अवरोधक लगाकर उन्हें थामने का प्रयास कर सकें?ये हिमाकत कोई कर नहीं पा रहा था। लेकिन उसी बीच से कोई अपनी जेब से अपना दूरभाष यंत्र निकालता है और समाज के दुश्मनों को पता ना चले…इस प्रकार चलचित्र संग्रहित करने लगता है!चंद मिनटों में तीनों लोग घायल हो जाते हैं। और अब बढ़ती भीड़ में से कुछ हिम्मत दिखाते हैं और आगे आकर समाजिक दुश्मनों को सबक सिखाने के लिए ठान लेते जिसके परिणाम स्वरूप चंद सेकंड में सभी के सभी अचानक रफूचक्कर हो जाते हैं…! जो प्रारंभ से मूकदर्शक बने हुए मात्र फिल्मी शूटिंग का मजा ले रहे थे वही भीड़ खुद न्यायाधीश बन जाती…यदि किसी पर चोरी का आरोप लगा होता! फिर सड़कों पर न्यायाधीश से कमिश्नर तक का रोल वहीं खड़े लोग अदा करने लगते! अपने हाथों से प्रहार करके चोरों को धरती मुक्त करने का दृढ़ संकल्प वही तत्काल रोड पर ही ले लिया जाता। समाजिक दुश्मनों के रफू चक्कर होते ही चौकी रतनपुर से कुछ खाकी वर्दी धारी घटनास्थल पर आ जाते हैं… और जांच पड़ताल करना शुरू कर देते हैं! समय बीतने के साथ गिरफ्तारी होना प्रारंभ हो जाती है…! लेकिन चंद मिनटों चला यह फिल्मी सीन आखिर आया कहां से?
हालांकि बाद में आने वाले लोगों में से कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाई लेकिन प्रारंभ से खड़ी भीड़ क्यों मूकदर्शक बनी हुई…मात्र आनंद लेती रही?
जहां की घटना है… वहां से कुछ ही मिनटों में डायल 112 गाड़ी गुजरती रहती है! आखिरकार डायल 112 ….?
यही घटना अगर विकराल हो जाती है तो चौकी इंचार्ज लेकर के कमिश्नर तक के खिलाफ कार्रवाई की रणनीति तय हो जाती है।
लेकिन डायल 112 और प्रारंभ में मूकदर्शक बनी रही भीड़ के साथ ही उन फिल्मों के निर्माताओं के खिलाफ जो फिल्मों से लोगों की भावनाओं को जोड़कर उनको इस कतार में लेकर खड़ा कर देते हैं कि वह सड़कों पर मारपीट का खुलेआम सीन को अंजाम देकर खुद को फिल्मी हीरो समझने में कोई कसर नहीं छोड़ते… उनके खिलाफ कार्रवाई शून्य होती!
स्वलिखित
विकास बाजपेई
९३०५३७९२३३

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