औरैया12मार्च*पत्रकारों संग सौतेला ब्यवहार करती आ रहीं है, सरकारें -:- सतेन्द्र सेंगर*
?चंद पत्रकार शासन से मान्यता मिलते ही वह स्वयं को योग्य एवं बहुत बड़ा पत्रकार समझने की भूलकर बैठते है -: सतेन्द्र सेंगर
?सरकारों में बैठे जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी अपने चंद चहेते पत्रकारों को मान्यता देकर कॉलम पूरा करते आ रहे है -: सतेन्द्र सेंगर
?समाज और देश को जगाने वाला पत्रकार ही अपने मौलिक अधिकारों के प्रति सोया हुआ है -: सतेन्द्र सेंगर
जैसा कि देश की आजादी से लेकर वरावर यह देखने को मिलता आ रहा है कि देश और प्रदेश की सरकारें ने पत्रकारों व मीडिया कर्मियों को शाशन से मान्यता देकर एक बहुत बड़ा बिवाद खड़ा कर दिया है, जिससे पत्रकार, मीडिया कर्मी आपस में एक दूसरे को नीचा दिखाने का कार्य करते आ रहे, शासन के इस कृत्य पर सतेन्द्र सेंगर जोकि मीडिया अधिकार मंच भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने टिप्पणी करते कहा हैकि यहाँ की सरकारों ने चंद पत्रकार साथियों को शासन द्वारा मान्यता देकर उनपर बहुत बड़ा परोपकार या अहसान करने जैसा कार्य करते आ रहे है, जिसपर हमारे चंद पत्रकार साथी शासन से मान्यता मिलते ही वह स्वयं को एक योग्य एवं बहुत बड़ा पत्रकार समझने की भूल कर बैठते है जबकि ना तो वह स्वयं सुरक्षित है और ना ही उनकी कलम, कटु सत्य तो यह हैकि जिन लोगो को शासन ने मान्यता दे रखी है, उन पत्रकारों का यदि तिमाही, छमाही, सालाना सर्वे किया जाये या समाचारों का सरकुलर सर्वे किया जाये तो आधे से ज्यादा पत्रकारों की मान्यतायें धरी की धरी रह जायेंगी, कुछ दलाल एवं चापलूस प्रकित के लोग पत्रकारिता का हिस्सा बनकर जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियो की चापलूसी करके शासन से पत्रकारिता का मान्यता ले लिया है वहीं शासन भी पत्रकारों के हिस्से का कॉलम पूरा करने का काम करते हुये पल्ला झाड़ती आ रहीं है, जिनके बजह से ही जो समाज की निष्पक्ष आवाज़ उठाने का काम करते आ रहे उन पत्रकारों को यहाँ की सरकारें अनदेखी करती आ रहीं है, सतेन्द्र सेंगर ने कहा हैकि सरकारें, जनप्रतिनिधि, अथवा प्रशासनिक अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाते समय अपनी खबर को प्रकासित करते समय या फिर पत्रकारों का वोट लेते समय भी शासन द्वारा दिये गये मान्यता का जिक्र होना चाहिये परन्तु ऐसा नही होता है, क्योंकि वह जानते है उन्होंने अपने निजी स्वार्थ के लिये चंद लोगों को मान्यता देकर उपकार किया है जिनसे उनका भला नही हो सकता है, हाल में ही बिधानसभा चुनाव सम्पन्न हुये है क्या किसी भी राजनैतिक दल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में खबर प्रकासित कराने से पहले पूछा है कि आप मान्यता प्राप्त पत्रकार है, सतेन्द्र सेंगर ने कहा कि देश और दुनियां को जगाने वाला पत्रकार ही अपने मौलिक अधिकारों को भूल चुका है जिसे मीडिया अधिकार मंच भारत के माध्यम देश के प्रत्येक कर्मयोगी पत्रकार को जागरूक कर उनके अधिकारों को मुहैया कराने का प्रयास कर रहा है

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