औरैया08सितम्बर*आखिरकार गरीब मजबूर पीड़ित/पीड़िता व्यक्तियों को इस जुर्म की दुनियां में न्याय क्यों नहीं मिल पाता
आमबात है कि जो व्यक्ति दोषी होता है वह अपनी गलतियों को छिपाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहता है यहाँ कि अच्छा खासा मेहनताना देने को तैयार रहता है, यही कारण रहता है कि पीड़ित व्यक्ति की साधारण कोई सुनवाई नहीं होती हैं उल्टे पुलिस प्रशासन पीड़ित व्यक्ति को ही ज्यादा डराने धमकाने का काम करता है।
ज्ञात हो कि विगत 29 अगस्त को रज़िया खान को उसके ससुराल वालों ने अपना सामान उठाने जाने पर मारपीट की और उसके कपड़े बगैरह भी फाड् दिए थे।थाने में एप्लिकेशन देने पर कोई सुनवाई नहीं होने पर प्रार्थिनी पुलिस अधीक्षक महोदया के पास गई ,एसपी महोदया के कहने पर 1सितम्बर को प्राथमिकी तो दर्ज कर ली गयी, परन्तु आज एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी आजतक अभी कोई कार्यवाही नहीं हुई। दोषी खुलेआम मूंछों पर ताव देकर घूमते है कहते मैं सक्षम हूँ मेरा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता।।
सार्वजनिक रूप से अगर देखा जाय कि कोई मेहनताना देकर झूंठी शिकायत भी अगर कर दे तो उसके कहने पर विपक्षी को तुरंत उठाकर हवालात में बंद कर दिया जाता है और देखा जाय तो कलियुग के हिसाब से सही भी हो रहा है।
लेकिन योगी जी और मोदी जी समाज के अंदर जो साफ सुथरा माहौल पैदा करना चाहते हैं उनके करें कराए पर निश्चित तौर पर स्याही पोतने का काम जरूर किया जा रहा है ,जिससे साधारणतः गरीब मजबूर पीड़ित को न्याय मिलने की संभावना बहुत कम ही रहती है।
वैसे महिला पुलिस अधीक्षक होने के नाते हम सभी आशा ही नही बरन पूर्ण विश्वास है कि एसपी महोदया दोषी को सजा और पीड़ित/पीड़िता को न्याय निश्चित ही दिलाने का काम करेंगी।

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