February 27, 2026

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औरैया 27 मार्च *श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह प्रसंग पर भक्तों ने मनाया उत्सव*

औरैया 27 मार्च *श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह प्रसंग पर भक्तों ने मनाया उत्सव*

औरैया 27 मार्च *श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह प्रसंग पर भक्तों ने मनाया उत्सव*

*फफूंद,औरैया।* नगर में स्थित महावीरधाम मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठे दिन रविवार को श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह का आयोजन हुआ। कथावाचक रामसखा जू ने रास पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भवसागर पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है।
कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालियावन का वध, उद्घव गोपी संवाद, ऊद्घव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणि विवाह के प्रसंग का संगीतमय कथा का श्रवण कराया गया। कथावाचक आचार्य रामसखा जू ने कहा, कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया, और महारास लीला द्वारा ही जीवात्मा का परमात्मा से मिलन हुआ। उन्होंने कहा, कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणि के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। रुक्मणि विवाह के आयोजन ने श्रद्घालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान कथा मंडप में विवाह का प्रसंग आते ही चारों तरफ से श्रीकृष्ण-रुक्मणी पर जमकर फूलों की बरसात हुई। कथावाचक ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा, कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मणि के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कथा वाचक ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है। यदि कोई कमी रहती है, तो वह मात्र संकल्प की होती है। संकल्प एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे उन्होंने महारास लीला, उद्घव चरित्र, श्रीकृष्ण मथुरा गमन और रुक्मणि विवाह महोत्सव प्रसंग पर विस्तृत रुप से कथा सुनाई। इस मौके पर बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।