[4/21, 6:50 PM] Ram Prakash Upaajtak: *बढ़ते पारे ने रुलाया, बिजली कटौती ने तड़पाया*
*रुरुगंज,औरैया।* आसमान से आग बरसी तो सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। गर्मी से व्याकुल लोग गला तर करने के लिए पानी की तलाश करते नजर आए। छायादार स्थानों पर खड़े होकर लोग गर्मी को कोसते दिखे। बुधवार के बाद गुरुवार को भी जनपद का पारा 43 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। भीषण गर्मी के बीच चल रही गर्म हवाओं से बेचैन हो उठे।
गुरुवार की सुबह 9 बजे ही चिलचिलाती धूप ने लोगों को पसीना-पसीना करना शुरू कर दिया। आवश्यक कार्यों के लिए जो लोग घरों से निकले वे गमछा बांधकर निकले। महिलाएं भी पूरे बदन को गर्मी से बचाने के लिए कपड़ों से ढकी नजर आयीं। दोपहर 12 बजते-बजते गर्म हवाओं के थपेड़े बदन को झुलसाने लगे। औरैया, दिबियापुर, फफूंद,अछल्दा, रुरुगंज, बिधूना,एरवाकटरा हर जगह गर्मी का कोहराम हर वर्ग में नजर आया।
*गेहूं कटाई दिन में की जा रही बंद* भीषण गर्मी के बीच किसानों की गेहूं की कटाई थम गई है। सुबह तड़के और देर शाम को कटाई का काम हो पा रहा। दिन में कटाई पूरी तरह से बंद है। किसान प्रदीप, कमलेश, पप्पू, रामप्रकाश, अखिलेश का कहना है कि सालों बाद मौसम के ऐसे तेवर देखे हैं। 15 से 20 अप्रैल तक 80 फीसदी कटाई हो जाती थी लेकिन इस बार 40 से 50 फीसदी ही कटाई हो पायी है।
*आधी रात को काटी बिजली तो छतो पर टहल कर गुजरा समय*
भीषण बिजली कटौती से लोगों को निजात नहीं मिल पा रही। लोगों के जेहन में सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि रात को बिजली कटौती क्यों हो रही है। रात 10 बजे बिजली चली गई जो 12 बजे वापस आई। इसके बाद हर घंटे 30-30 मिनट की कटौती होती रही। लोग इस कटौती से बेहद परेशान हैं। जिससे लोगों के बिजली चलित उत्पादों पर संकट खड़ा हो गया। बिजली कटौती से लोग सो नहीं पा रहे जिससे उनका पारा चढ़ने लगा है। गौरव, सुनील गुप्ता, रविन्द्र यादव, राजू यादव, सोनू राजपूत, नन्दू पोरवाल ने बताया कि कस्बा रुरुगंज में सुबह 11 बजे दिन में बिजली काट दी गई जो शाम 5 बजे तक नहीं आयी। शाम 9 बजे से रात 12 बजे तक लगातार कटौती होती रही।
*ग्रामीणों का कटौती से बुरा हाल :* शहर में तो लोग कटौती से परेशान हैं ही, ग्रामीण क्षेत्रों में तो हाल बहुत बुरा हो गया है। अछल्दा, रुरुगंज, कुसमरा, रुरुकलां, ऐली, मलिकपुर, उड़ेलापुर, चन्दैया, रुरुखुर्द, कछपुरा आदि इलाकों में आधी रात को होने वाली कटौती से लोग गुस्से में हैं। लोगों का कहना है कि 18 घंटे बिजली देने का दावा झूठा हो गया है। लोगों को 8 से 10 घंटे ही बिजली नहीं मिल पा रही।
[4/21, 6:58 PM] Ram Prakash Upaajtak: *रमजान : तीसरे अशरे में इबादत से मिलेगी जहन्नुम से निजात*
*रुरुगंज,औरैया।* मुकद्दस रमजान का वैसे तो हर लम्हा इबादत का है लेकिन शुक्रवार शाम से शुरू होने वाले जहन्नुम से निजात के तीसरे अशरे की खास अहमियत बताई गई है। आज मगरिब की नमाज के बाद रमजानुल मुबारक का तीसरा अशरा शुरू हो जाएगा, जो जहन्नुम से आजादी का है। इस अशरे में ही शबे कद्र है। शबे कद्र की एक रात का सवाब एक हजार रातों की इबादत से भी ज्यादा है।
रमजान का अंतिम अशरा दोजख से निजात की खुसूसियात के लिए जाना जाता है। इस अशरे में अल्लाह रब्बुल इज्जत अपने इबादतगार बंदे के गुनाहों को माफ कर देता है। शुक्रवार शाम को मुकद्दस रमजान का 20वां रोजा मुकम्मल हो जाएगा। रोजा इफ्तार के बाद रमजान का आखिरी अशरा शुरू हो जाएगा। इमाम मोहम्मद सालिम बताते हैं कि रसूले खुदा फरमाते हैं कि आखिरी अशरा दोजख से आजादी का है। यह अशरा 21वें रोजे से 30वें रोजे की शब तक चलता है। बताया कि वैसे तो रमजान का पूरा महीना ही रहमतों और बरकतों का महीना है लेकिन तीसरा अशरा सबसे अफजल कहा गया है। इसी अशरे की ताक रातों में यानी 21, 23, 25, 27, 29 रमजान की रात कुरआन पाक नाजिल हुआ। इन रातों में से जिस रात को कुरआन नाजिल हुआ, उसे शबे कद्र की रात कहते हैं। इसलिए, रमजान में इन रातों की अहमियत काफी बढ़ जाती है। शबे कद्र की रात को हजार महीने की रातों के बराबर बताया गया है। लेकिन वह कौन सी रात है, किस रात को कुरान शरीफ नाजिल हुआ, यह किसी को मालूम नहीं है। इसलिए रोजेदार इन पांचों रात को जागकर अल्लाह रब्बुल इज्जत की इबादत करते हैं। रमजान के तीसरे अशरे में ही फितरा और जकात भी अदा की जाती है। जिससे ईद की नमाज गरीब लोग भी खुशी से अदा कर सकें।
*इन रातों में है शबे कद्र*
मुकद्दस रमजान का आखिरी अशरा यूं तो तमाम खुसूसियात से भरा हुआ है लेकिन इस अशरे की ये पांच रातें 21, 23, 25, 27 व 29वीं रात बेहद खास मानी जाती है। इनमें किसी एक रात में कुरआन पाक नाजिल हुआ। जिस रात को कुरआन पाक नाजिल हुआ उसे शबे कद्र कहते है। शबे कद्र की रात इबादत की हजार रातों से बेहतर है।
*एताकाफ के लिए मस्जिदों में आज से शुरू होगा कयाम*
शुक्रवार को 20 वें रोजे के साथ रमजान का दूसरा अशरा मुकम्मल हो जाएगा। मगरिब की नमाज के बाद से तीसरा अशरा शुरू होगा। तीसरे अशरे में शबे कद्र पाने के लिए एताकाफ की नीयत से रोजेदार दस दिन तक मस्जिदों में कयाम करते है। एताकाफ रमजान के मुकद्दस महीने की खास इबादत में से एक है। मस्जिद में अल्लाह की इबादत यानी जिक्र-ए-इलाही की नीयत से ठहरने को एताकाफ कहते हैं। एताकाफ के लिए 20वें रमजान को असर की नमाज के बाद सूरज डूबने से पहले मस्जिद में दाखिल होना होता है। ईद का चांद दिखने के बाद मस्जिद से बाहर निकला जाता है। इमाम मोहम्मद सालिम कहते हैं कि हर मस्जिद में एताकाफ के लिए एक रोजेदार का बैठना जरूरी है।
[4/21, 9:02 PM] Satya Prakash Bajpai Upaajtak: *औरैया । ककोर चौकी इंचार्ज को चाहिए 5 हजार व रिस्वत देने के बाद भी चौकी इंचार्ज व मालखाना इंचार्ज विकलांग युवक को कर रहे परेशान*
*कोर्ट के आदेश के उपरांत जब युवक रिलीजिंग का आदेश लेकर दिबियापुर थाने पहुँचा तो जेडी नामक पुलिसकर्मि ने पैसे लेकर चौकी इंचार्ज के पास भेजा – पीड़ित*
*पीड़ित का आरोप चौकी इंचार्ज ने की 5000 रुपए की तो बमुश्किल कम रुपए में बनी सहमति व आज चौकी इंचार्ज ने बताया कि आलाधिकारियों की डिमांड भी करनी पड़ती है पूरी तो इतने में नही बनेगी बात*
*लगातार विकलांग को टरकाया तो विकलांग ने सुनाई आप बीती कि दरोगा व सिपाही दे रहे अपने अधिकारी तक माल पहुचाने की दुहाई*
*वही मालखाने के इंचार्ज ने मामला बिगड़ता देख विकलांग को फोन कर पैसे वापस करने का दिया ऑफर*
*बड़ा खुलासा जल्द-*

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