February 17, 2026

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औरैया 04 दिसम्बर *नहर में चुल्लू भर पानी, कैसे हो पलेवा*

औरैया 04 दिसम्बर *नहर में चुल्लू भर पानी, कैसे हो पलेवा*

औरैया 04 दिसम्बर *नहर में चुल्लू भर पानी, कैसे हो पलेवा*

*नहर व बंबों में नाममात्र का पानी होने के कारण किसान की गेहूं की फसल को नुकसान*

*अछल्दा,औरैया।* नहर व बंबों में नाममात्र का पानी होने के कारण किसान अगली फसल की समय से बुआई नहीं कर पा रहे हैं। इस समय कई जगह गेहूं की बुआई के लिए पलेवा होना है। लेकिन पानी के अभाव में खेत तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
कभी बारिश तो कभी बाढ़ के कारण किसानों को मुसीबतों का सामना करना पड़ा। हजारों किसानों की फसल इन दोनों आपदाओं के कारण चौपट हो गई। वह अगली फसल की तैयारी में जुटे हैं। लेकिन अब उनके सामने सूखी नहरें व बंबे मुसीबत बनकर खड़े हो गए हैं। निचली नहर गंग नहर और रजवाहों में उड़ती धूल उनको मुंह चिढ़ा रही है। पहले से तैयार खडी गेहूं की प्यासी फसल को एक बार पानी की जरूरत है। पानी के अभाव में गेंहू, आलू फसलों अन्नदाताओं को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के ग्राम मढा निवासी किसान महावीर सिंह बताते हैं कि गेहूँ की फसल अब पानी पर आ चुकी है। एक पानी न मिला तो गेहूं की फसल में नुकसान होगा अरविंद सिह कहते हैं कि पानी न मिलने से उत्पादन में गिरावट आ सकती है। मेहनत भी बरबाद हो जाएगी और लागत भी चली जाएगी। निवासी पंची बताते हैं कि लेट गेंहू की बुआई का समय चल रहा है। खेत तैयार करने के लिये पलेवा की जरूरत है। हरगोविंद यादव बताते हैं कि नहर और रजवाहों के किनारे जिन किसानों के खेत हैं। वह इन्हीं नहर व रजवाहों पर निर्भर हैं।