अमेठी19दिसम्बर 25*मानवता को झकझोर देने वाली खबर: भूख और ठंड से युवक की दर्दनाक मौत, 21वीं सदी में जूट का बोरा बना आख़िरी सहारा
अमेठी जिले* से सामने आई यह खबर सिर्फ एक मौत की नहीं, बल्कि सिस्टम, संवेदनहीनता और गरीबी के उस भयावह सच की है, जो 21वीं सदी में भी ज़िंदा है। भीषण ठंड और तीन दिनों की भूख ने अमेठी के मुंशीगंज कोरारी लच्छनशाह निवासी अमर बहादुर यादव की जान ले ली। ठंड से बचने के लिए जहां आम इंसान ऊनी कपड़े, अलाव और घर का सहारा लेता है, वहीं अमर बहादुर यादव के हिस्से में जूट का बोरा ही आया—और वही उनकी जिंदगी का आख़िरी ओढ़ना बन गया।
बताया जाता है कि अमर बहादुर यादव बीते तीन दिनों से भूखे थे। घर में खाने को एक दाना तक नहीं था। जब भूख ने हदें पार कर दीं, तो वह उम्मीद लेकर खाना मिलने की तलाश में निकले। लेकिन गरीबी ने पीछा नहीं छोड़ा। खाली पेट ही उन्हें वापस लौटना पड़ा। रास्ते में अंधेरा हो गया, शरीर जवाब देने लगा और भूख का सब्र टूट गया। मजबूर होकर उन्होंने सड़क किनारे रात गुजारने का फैसला किया। पास पड़े एक जूट के बोरे को ओढ़कर सो गए, लेकिन ठंड और भूख की यह रात उनकी ज़िंदगी की आख़िरी रात बन गई। सुबह करीब पांच बजे उनकी मौत हो गई।
इस दर्दनाक घटना का सीसीटीवी वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें अमर बहादुर यादव जूट का बोरा ओढ़े मृत अवस्था में दिखाई दे रहे हैं। ये तस्वीरें देखने वालों का दिल दहला रही हैं और कई सवाल खड़े कर रही हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, अमर बहादुर यादव दो भाइयों में से एक थे। घर में एक बूढ़ी मां है। गरीबी का आलम यह है कि दोनों भाइयों की आज तक शादी नहीं हो सकी। घर में न तो पक्की छत है, न ढंग का बिस्तर—सिर्फ घास-फूस और चूल्हा-बर्तन। जमीन के नाम पर परिवार के पास एक इंच खेत तक नहीं है।
अमर बहादुर यादव की मौत के बाद प्रशासन पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने अपनी साख बचाने के लिए आनन-फानन में पोस्टमार्टम तो करा दिया, लेकिन मृतक की बूढ़ी मां और भाई आज भी उसी बदहाली और भूख के साए में जीने को मजबूर हैं। न कोई तात्कालिक मदद, न कोई स्थायी सहारा।
यह घटना उन तमाम सरकारी दावों पर सवाल है, जो गरीबों, बेसहारा और जरूरतमंदों की सुरक्षा की बात करते हैं। सवाल यह है कि जब एक युवक तीन दिन तक भूखा रहा, ठंड में जूट का बोरा ओढ़कर सोया और दम तोड़ दिया—तो सिस्टम कहां था?
अमर बहादुर यादव की मौत सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था पर लगा एक काला धब्बा है, जो आने वाले समय तक समाज की अंतरात्मा को झकझोरता रहेगा।
यह खबर अमेठी जिले से प्रसारित मीडिया चैनलों और पेपर से लिया गया है। अमेठी प्रेस किसी बात की पुष्टि नहीं करता है।

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