October 10, 2026

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हरिद्वार 10 अक्टूबर 26*धर्मनगरी हरिद्वार में सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल:

हरिद्वार 10 अक्टूबर 26*धर्मनगरी हरिद्वार में सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल:

हरिद्वार 10 अक्टूबर 26*धर्मनगरी हरिद्वार में सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल:

श्री बहावलपुर भवन ट्रस्ट समिति द्वारा हर अमावस्या और पूर्णिमा पर विशाल भंडारे का आयोजन

​हरिद्वार से कालूराम जयपुरिया, यूपीआजतक

​https://youtu.be/rQ1milY_l1U?si=NKI4xxsrmSK3JOGh

हरिद्वार।मोक्षदायिनी मां गंगा की पावन गोद में बसी धर्मनगरी हरिद्वार हमेशा से ही तप, त्याग, दान और मानव सेवा की पुण्यस्थली रही है। इसी पावन परंपरा को पूरी निष्ठा और भक्ति भाव से आगे बढ़ाते हुए रामलीला मैदान स्थित ‘श्री बहावलपुर भवन ट्रस्ट समिति’ की ओर से समाज सेवा और नर सेवा-नारायण सेवा का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है। ट्रस्ट द्वारा प्रत्येक माह की अमावस्या और पूर्णिमा के पावन पर्व पर नियमित रूप से भव्य एवं दिव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और जरूरतमंद प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण करते हैं।

​भक्ति, श्रद्धा और सेवा का संगम

​अमावस्या और पूर्णिमा सनातन धर्म में दान-पुण्य, जप-तप और पितरों के निमित्त सेवा कार्य करने के विशेष दिन माने जाते हैं। इन पावन तिथियों पर गंगा स्नान के लिए देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। इसी धार्मिक महत्व को आत्मसात करते हुए श्री बहावलपुर भवन परिसर में सवेरे से ही भंडारे की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।

​भवन के प्रांगण में पूरी स्वच्छता, सात्विकता और श्रद्धा के साथ विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इसके उपरांत भगवान को भोग लगाकर विधिवत पूजन-अर्चन किया जाता है और फिर ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष के साथ सभी उपस्थित भक्तों एवं राहगीरों के बीच प्रेमपूर्वक प्रसाद का वितरण प्रारंभ होता है।

​स्वयं पंगत में उतरकर सेवा करते हैं पदाधिकारी और ट्रस्टी

​इस आयोजन की सबसे बड़ी और प्रेरक विशेषता यह है कि ट्रस्ट के सभी प्रमुख पदाधिकारी और ट्रस्टीगण केवल व्यवस्थाएं देखने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे स्वयं अपने हाथों से भोजन परोसने और भक्तों की सेवा करने का कार्य करते हैं। बड़े-बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सदस्य कतारबद्ध होकर बाल्टियों और बर्तनों से शुद्ध घी व तेल में बने पकवान, पूड़ी, सब्जी, दाल, चावल और मिष्ठान/खीर का वितरण करते नजर आते हैं। सेवादारों के चेहरों पर झलकती विनम्रता और संतुष्टि का भाव यह साबित करता है कि सच्ची ईश्वर सेवा केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि भूखों को भोजन कराने में निहित है।

​मजबूत संगठन और समर्पित कार्यकारिणी (2025–28)

​श्री बहावलपुर भवन ट्रस्ट समिति की कार्यकारिणी (सत्र 2025–28) पूरे समर्पण के साथ इस पुनीत कार्य का संचालन कर रही है। समिति में विभिन्न नगरों—जैसे दिल्ली, आगरा, देहरादून, रुड़की और चांदपुर से जुड़े समाजसेवी शामिल हैं, जो समय-समय पर हरिद्वार आकर सेवा कार्यों में अपनी आहुति देते हैं।

​समिति के प्रमुख पदाधिकारियों एवं ट्रस्टियों का विवरण इस प्रकार है:

  • ​प्रधान: श्री दिनेश भाटिया (चांदपुर)
  • ​उप प्रधान: श्री तिलक राज मदान ‘शम्मी’ (दिल्ली)
  • ​सचिव: श्री नवीन कुमार मदान (हरिद्वार)
  • ​उप सचिव: श्री नरेश कुमार चुघ (आगरा)
  • ​कोषाध्यक्ष: श्रीमती वीना मदान (दिल्ली)
  • ​अन्नक्षेत्र प्रभारी: श्री गिरीश चंद वर्मा (हरिद्वार)
  • ​मन्दिर प्रभारी: श्री शिव किंगर (हरिद्वार)

​इसके साथ ही ट्रस्ट मंडल के समर्पित सदस्यों में प्रमुख रूप से:

  • ​श्री राकेश दुरेजा (दिल्ली)
  • ​श्री सुधीर कुमार जग्गया (आगरा)
  • ​श्री प्रेम मेहता (आगरा)
  • ​श्रीमती रचना खन्ना (दिल्ली)
  • ​श्री अनिल मुन्डेजा (आगरा)
  • ​श्री राजेन्द्र वाधवा (देहरादून)
  • ​श्रीमती नीलम अरोड़ा (रूड़की)

​शामिल हैं, जिनकी देखरेख और सक्रिय सहयोग से यह संपूर्ण अन्नक्षेत्र सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

​‘अन्नदान ही सबसे बड़ा महादान’ — पदाधिकारियों का संदेश

​आयोजन के अवसर पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘अतिथि देवो भव:’ और ‘अन्नपूर्णा साधना’ का सर्वोच्च स्थान है। हरिद्वार आने वाला कोई भी यात्री या तीर्थयात्री भूखे पेट न सोए, इसी संकल्प के साथ यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। अन्नक्षेत्र प्रभारी और मंदिर प्रभारी ने बताया कि अमावस्या और पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से भक्तों की भारी भीड़ रहती है, जिसे ध्यान में रखते हुए भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुगम वितरण का विशेष प्रबंध किया जाता है।

​स्थानीय नागरिकों व तीर्थयात्रियों ने की मुक्तकंठ से सराहना

​बहावलपुर भवन के इस नियमित सेवा कार्य की स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और तीर्थयात्रियों द्वारा खूब प्रशंसा की जा रही है। भोजन ग्रहण करने आए श्रद्धालुओं का कहना है कि हरिद्वार के हृदय स्थल रामलीला मैदान में इतनी आत्मीयता और सम्मान के साथ प्रसाद वितरण होना अपने आप में अद्भुत अनुभव है। समिति की महिला सदस्यों की सक्रिय भागीदारी नारी शक्ति और सेवा भावना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है।

​ट्रस्ट समिति ने संकल्प दोहराया कि मानव कल्याण और सनातन संस्कृति के संवर्धन के लिए यह भंडारा निरंतर इसी उत्साह और भव्यता के साथ आगे भी जारी रहेगा।

​रिपोर्ट: कालूराम जयपुरिया विशेष संवाददाता, हरिद्वार यूपीआजतक

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