सुल्तानपुर24जुलाई26*बरियार चोर सेन्हिया में बिरहा गावे,
खड़े सभासद पीछे ताली बजावे।
सुल्तानपुर*पिछले अंक में आपने पढ़ा कि कैसे पालिकाध्यक्ष न्यायाधीश बन कर अदालत चलाते हुए नगर पालिका के असेसमेंट अभिलेख और विवादित प्रकरणों पर अपने अविधिक व मनमाने आदेश पारित कर रहे हैं। जिस पर विद्वान अधिवक्ता मूकदर्शक बने हुए हैं और सभासद शुतुरमुर्गी निद्रा में सो रहे हैं। पदेन सदस्य, अपर जिलाधिकारी की चुप्पी एक तरह से निरंकुश अध्यक्ष को शह प्रदान करती हुई प्रतीत हो रही है।
आज के इस अंक में पालिकाध्यक्ष द्वारा पालिका एक्ट व शासनादेश के विरूद्ध अधिशासी अधिकारी के अधिकार का प्रयोग करते हुए म्यूटेशन व विवादित प्रकरणों के निस्तारण की कार्यवाही करने पर सभासदों के विचार……
नगर पालिका बोर्ड के सभासद से पूछने पर इस सम्बन्ध में बताया कि पालिकाध्यक्ष द्वारा नगर पालिका बोर्ड की पहली बैठक में म्यूटेशन आदेश पारित करने अधिकार प्राप्त कर नगर पालिका में विवादित/अविवादित सभी वादों में नामांतरण का आदेश पारित रहे हैं, जो एक्ट व शासनादेश के विरूद्ध है……….
लेकिन कुछ सभासद ऐसे हैं जो प्रातः होते ही अध्यक्ष की चरण वंदना करते हुए अपनी वाकपटुता और रसूख के प्रभाव से इस विधि विरूद्ध अधिकार को पारित कराया था। दूसरी तरफ बोर्ड के कुछ सभासद पालिका के इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ते हुए प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय/अपर जिलाधिकारी को पत्र के माध्यम से कई बार शिकायत किये।
प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय/अपर जिलाधिकारी भी अधिशासी अधिकारी व पालिकाध्यक्ष के रसूख के आगे हार मान गए। जिसके बाद जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी अपनी आंख बंद कर ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे सभासद की किसी ने नहीं सुना। आज भी पालिकाध्यक्ष की अदालत लाठी के बल पर वैसे ही चल रही है।
नाम न बताने की शर्त पर एक सभासद ने बताया कि शासन से एक वर्ष पूर्व नामांतरण का नया प्रारूप आया। जिसे बोर्ड में पास करके नामांतरण उपविधि बनाया जाना था। लेकिन पालिकाध्यक्ष की अदालत बंद न हो पाये और अनुचित लेन देन की व्यवस्था बनी रहे। इसलिए कई बार बोर्ड में प्रस्ताव आया, उस पर खूब चर्चा हुई और आपत्तियां मांगी गई, जिस पर कोई आपत्ति भी नहीं आई। अभी हाल ही में हुई बैठक में जानबूझकर अकारण ही नासमझ प्रभावशाली सभासदों की मदद से इस उपविधि को बोर्ड में फाइनलाइज होने नहीं दिया गया।
नए बाइलाज़ में नामांतरण के समस्त अधिकार अधिशासी अधिकारी के पास हैं। पालिकाध्यक्ष की तुगलकी अदालत को बचाने के लिए यह सब नासमझ प्रभावशाली सभासदों द्वारा कुकृत्य किया गया। हम सभी लोग पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार के आगे बेबस व नतमस्तक हो गये हैं, क्योंकि वार्ड की जनता केवल विकास कार्य को जानती व पूछती है। हीरा मोती के द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार के काकस को तोड़ना अब हमारे बस की बात नहीं है।
यहां बताते चलें कि सबसे बड़ी हैरानी का विषय यह है कि पूर्व कार्यकाल में पालिकाध्यक्ष बबिता जायसवाल ने इसी प्रकार पद का दुरूपयोग कर म्यूटेशन नियम को बदला था। जिसको रोकने के लिए बोर्ड की पहली बैठक में ही सभासदों की एक समिति बनाई गई थी। जिसमें वही सभासद सदस्य भी थे, जो कि वर्तमान पालिकाध्यक्ष को अदालत का जज बने रहने में आंख मूंद सहयोग कर रहे हैं। और यही गत कार्यकाल में इस अदालती व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया था।
सभासद नामांतरण समिति की रिपोर्ट को बोर्ड के समक्ष रखते हुए सभी सभासदों को प्रति उपलब्ध कराया। जिसमें नामांतरण सम्बन्धी शासनादेश व एक्ट का उद्धरण करते हुए नामांतरण के समस्त अधिकार अधिशासी अधिकारी के पास है की पुष्टि की गई है। इसके बावजूद पालिकाध्यक्ष द्वारा जानबूझकर इस विषय पर चर्चा नहीं कराई गई। शासन में शिकायत होने पर पूर्वपालिकाध्यक्ष तो दोषी साबित होंगी ही, साथ ही वर्तमान पालिकाध्यक्ष भी भ्रष्टाचार की इस आग से बच नहीं पाएंगे। क्योंकि पूर्व पालिकाध्यक्ष जैसा कुकृत्य वर्तमान पालिकाध्यक्ष जानबूझकर कर रहे हैं। इस सम्बन्ध में समिति की रिपोर्ट की प्रति पढ़ने पर पता चला कि यह तो स्वयं ही भ्रष्टाचार की कलई खोलने वाला एक दस्तावेज है। इससे ज्यादा आनंददाई बात यह है कि इस प्रति को प्राप्त करने वाले पालिका के पदेन सदस्य मा विधायक विनोद सिंह व सदस्य विधान परिषद शैलेन्द्र प्रताप सिंह भी रहे, जो पूर्व अध्यक्षा के खिलाफ तो खुलकर लड़ाई लड़े थे। आज यही पालिकाध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी के इसी भ्रष्टाचार के खिलाफ मूकदर्शक क्यों बने हुए हैं।
मैं आज आम जनमानस के लिए इस प्रश्न को छोड़ता हूं कि नगर पालिका के राजस्व अभिलेख में ही छेड़खानी? का जिम्मेदार कौन है?
किसी का भी घर उसकी दुनिया होती है, उस घर को चंद पैसों के लालच में एक झटके में किसी दूसरे के नाम कर देने वाले रसूखदार के आगे आज जिला प्रशासन, अधिशासी अधिकारी, पदेन सदस्य, सभासद या विद्वान अधिवक्ता गण नतमस्तक क्यों हैं………………………….
अधिशासी अधिकारी को यह खबर इतनी चुभती है कि फोन ही नहीं उठाते….बरियार चोर सेन्हिया में बिरहा गावे….
सुल्तानपुर नगर पालिका से इस लेख का संबंध 100 किलोमीटर दूर से भी संबंध नहीं है……..
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शेष अगले अंक में..निर्माण में कैसे हो रहा खुलकर भ्रष्टाचार..क्रमशः…

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