वाराणसी २८ जनवरी २६*पुलिस ने 2000 करोड़ के कफ सीरप तस्करी मामले में तीन वांटेड को नेपाल सीमा से पकड़ा*
वाराणसी। दो हजार करोड़ के कफ सीरप तस्करी में आरोपित आजमगढ़ के नर्वे गांव निवासी 50 हजार का इनामी तस्कर विकास सिंह, मेड रेमेडी लाइफकेयर प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्जी दवा फर्म का संचालक आकाश पाठक और उसके साथी अंकित श्रीवास्तव को पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी की एसआइटी टीम ने सिद्धार्थ नगर में नेपाल बार्डर के पास से गिरफ्तार किया है। आकाश पाठक की कंपनी में शुभम जायसवाल डायरेक्टर के पद पर तैनात था।
डीसीपी क्राइम सरवणन टी ने बताया कि गिरफ्तार तीनों आरोपितों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद ये तीनों आरोपित नेपाल भागने के प्रयास में बार्डर तक पहुंच गए थे, लेकिन पुलिस की सतर्कता के कारण उन्हें पकड़ लिया गया। उन्होंने बताया कि विकास सिंह देवनाथ फार्मेसी का अधिष्ठाता था। इसने 5,13,000 शीट कोडीनयुक्त कफ सीरप शैली ट्रेडर्स से खरीदे और लगभग 15 करोड़ का कारोबार करने का आरोपित है। कफ सीरप तस्करी गिरोह में इसकी भूमिका समूचे गिरोह द्वारा की गई तस्करी से कमाए गए रुपये को हैंडल करने की थी।
पुलिस की जांच में विकास के कई बार दुबई जाने के सबूत मिले हैं। आकाश पाठक को शुभम ने अपने हस्ताक्षर से लाइसेंस दिलाने के लिए कंपीटेंट सर्टिफिकेट जारी किया था। कोडीनयुक्त कफ सीरप तस्करी में एक और बड़ी गिरफ्तारी मंगलवार को वाराणसी पुलिस ने की है। कफ सीरप मामले में शुभम जायसवाल का सबसे करीबी विकास सिंह नरवे गिरफ्तार किया गया है। जानकारी मिलने के बाद वाराणसी पुलिस ने सिद्धार्थनगर से उसे गिरफ्तार किया है।
विकास सिंह नरवे ने ही शुभम जायसवाल को अमित टाटा और आलोक सिंह से मिलवाया था। विकास सिंह नरवे के खिलाफ आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी समेत कई जिलों में अभियोग पंजीकृत हैं। विकास की यूपी एसटीएफ को भी तलाश लंबे समय से थी। पुलिस अब आरोपित से पूछताछ कर उसकी संलिप्तता के साथ ही अवैध संपत्तियों के बारे में जानकारी हासिल करेगी।
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि कफ सीरप तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। वाराणसी पुलिस की इस सफलता से तस्करी के गिरोहों में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए भी प्रयास तेज कर दिए हैं।
इस प्रकार की तस्करी न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह समाज में अपराध को बढ़ावा देती है। पुलिस की इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि कानून के हाथ लंबे हैं और अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आगे की जांच में पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि इस गिरोह के अन्य सदस्य कौन हैं और वे किस प्रकार से इस अवैध कारोबार में संलिप्त हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से यह भी उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में इस प्रकार की तस्करी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के बाद और भी महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आ सकती हैं, जो इस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी में सहायक सिद्ध होंगी। वाराणसी पुलिस की इस कार्रवाई ने तस्करों के मन में भय पैदा किया है और यह दर्शाता है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस पूरी तरह से तत्पर है।

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