लखनऊ30जुलाई26*जब तक जातिगत उत्पीड़न है, तब तक जाति आधारित आरक्षण रहना ही चाहिए :आर. मानसय्या*
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*लखनऊ।* सीपीआई (एमएल) के नेता आर. मानसय्या नें आज कहा कि भारत में जाति और वर्ग एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। भारत में पूंजी का संचय ही कुल-व्यवसाय, बेगार (free labour) और बंधुआ मजदूरों की मेहनत-शक्ति के शोषण से हुआ है। इसी कारण आज देश की 40% संपत्ति सिर्फ 1% सवर्ण-उच्च वर्ग के हाथों में है!
इसके अलावा, आरक्षण जाति व्यवस्था के उन्मूलन के लिए लाया गया था, गरीबी उन्मूलन के लिए नहीं। गरीबी उन्मूलन के लिए क्रांति चाहिए। वैसे भी आज 99% दलित अभी भी गरीबी में हैं। संपत्ति से वंचित हैं। मुख्यमंत्री बनने पर भी वे जातिगत भेदभाव का शिकार होते हैं।
जब तक देश की संपत्ति को जातिवार जनसंख्या के अनुपात में बांटने वाली आर्थिक नीति (आर्थिक आरक्षण) लागू नहीं होती, और जब तक जाति पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, तब तक जाति आधारित आरक्षण दलितों और कमजोरों का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसी को सामाजिक आरक्षण कहा जाता है। बाबा साहेब अंबेडकर ने भी यही प्रतिपादित किया था – जब तक जाति है, तब तक जाति आधारित आरक्षण चाहिए।
जाति उन्मूलन के महासंघर्ष में आरक्षण भी एक हथियार है। इसे छीनने की जातिवादियों की साजिश ही “आर्थिक आरक्षण” है! इसका भी हम पूर्ण विरोध करते हैं।

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