लखनऊ १० अप्रैल २६ * स्कूलों ने ज्यादा फीस वसूली तो 5 लाख तक जुर्माना और मान्यता होगी रद: जिलाधिकारी
जिलाधिकारी ने विद्यालयों पर कंसा शिकंजा बैठक में अधिकारियों को दिए निर्देश
विद्यालयों से संबंधित शिकायतों के लिए अभिभावक अपर जिलाधिकारी एवं जिला विद्यालय निरीक्षक से करें शिकयत
विद्यालय द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा तथा किसी भी प्रकार का कैपिटेशन शुल्क पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा: जिलाधिकारी
लखनऊ। जिलाधिकारी विशाख जी की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शुल्क नियामक समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 एवं संशोधन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना था।
इस अधिनियम की धारा-8 के अंतर्गत गठित जिला शुल्क नियामक समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष के रूप में नामित है। समिति के प्रमुख कार्यों में विद्यालयों द्वारा प्रस्तावित शुल्क वृद्धि की जांच, अभिभावकों की शिकायतों का निस्तारण, निर्धारित मानकों के अनुरूप शुल्क वृद्धि सुनिश्चित करना तथा अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की संस्तुति करना शामिल है।
जिलाधिकारी द्वारा अपर जिलाधिकारी (नागरिक आपूर्ति) ज्योति गौतम एवं जिला विद्यालय निरीक्षक को इस संबंध में नोडल अधिकारी नामित किया गया है। शुल्क वृद्धि एवं विद्यालयों से संबंधित शिकायतों के लिए अभिभावक इन अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
जनपद स्तर पर अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन किया जाने एवं प्राप्त शिकायतो का प्रारंभिक जांच हेतु क्षेत्रीय उप जिलाधिकारी/अपर नगर मजिस्ट्रेट एवं राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यो की संयुक्त टीम का गठन किया गया है। बैठक में जिलाधिकारी ने सभी अपर नगर मजिस्ट्रेटों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्राप्त शिकायतों के आधार पर शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए संयुक्त निरीक्षण कराएं तथा अपनी आख्या समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराएं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्रत्येक विद्यालय द्वारा अपनी वेबसाइट एवं सूचना पट्ट पर शुल्क का पूर्ण विवरण प्रदर्शित करेगा। यह भी निर्देशित किया गया कि किसी भी विद्यालय द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा तथा किसी भी प्रकार का कैपिटेशन शुल्क पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। प्रत्येक शुल्क के लिए विधिवत रसीद देना अनिवार्य होगा एवं विद्यार्थियों को किसी विशेष दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यह भी निर्देश दिए गए कि निर्धारित शुल्क का पूर्ण विवरण जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में उपलब्ध कराया जाए।
विद्यालयों की यूनिफॉर्म में लगातार पाँच शैक्षणिक वर्षों तक कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। शुल्क वृद्धि के संबंध में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान छात्रों के लिए शुल्क में वृद्धि केवल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (प्रतिशत में) एवं छात्र से वसूल किए गए पाँच प्रतिशत शुल्क के योग की सीमा से अधिक नहीं होगी।
एक्ट में यह प्रावधान है कि किसी छात्र को पुस्तके, जूता, मोजे व यूनिफार्म आदि किसी विशिष्ट दुकान से क्रय करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि कोई विद्यालय प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऐसी परिस्थिति उत्पन्न करता है कि छात्रों को किसी विशिष्ट दुकान से पुस्तके अथवा यूनिफार्म आदि क्रय करना पड़े तो उसकी जांच कराकर अधिनियम के प्रावधान के अनुसार दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। शिकायत सही पाए जाने पर उल्लेखन 5 लाख रुपए का दंड या विद्यालय मान्यता/NOC समाप्त करने की कार्यवाही की जाएगी। जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन विद्यालयों में NCERT का पाठ्यक्रम लागू है वहां अनिवार्यतः NCERT की पुस्तकों से ही पठन पाठन कराया जाए। शुल्क में वृद्धि अथवा पुस्तकों एवं स्टेशनरी आदि के क्रय के संबंध में शिकायत छात्र, उनके अभिभावक अथवा अभिभावक – अध्यापक एसोसिएशन के सदस्य कर सकते है।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (नागरिक आपूर्ति), शिक्षा विभाग के अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक एवं अन्य संबंधित अधिकारी एवं प्रतिनिधि भौतिक एवं वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

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