रीवा10जुलाई26*अंगद का पांव या राजनीतिक प्रभाव? ट्रांसफर सूची में फिर बच निकले हितेंद्र, अनिमा शर्मा! सहित अन्य धुरंधर*
*रीवा में थाना प्रभारी बदलते रहे, कुर्सियां बदलती रहीं, लेकिन दो नाम ऐसा जो हर सूची में सुरक्षित दिखाई देता है। आखिर वजह क्या हैकाबिलियत, कृपा या कोई अदृश्य दबाव?*
रीवा। रीवा पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी नवीन सूची में कई थाना प्रभारियों को इधर से उधर किया गया। किसी को शहर से गांव भेजा गया तो किसी को ग्रामीण क्षेत्र से शहर बुला लिया गया। लेकिन एक बार फिर जिस नाम ने सबसे अधिक चर्चा बटोरी, वह है विश्वविद्यालय थाना प्रभारी हितेंद्र शर्मा और यातायात प्रभारी अनिमा शर्मा ने! शहर के चाय ठेलों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर ऐसा कौन सा चमत्कार है जो हर तबादला सूची में हितेंद्र शर्मा, अनिमा शर्मा को सुरक्षित रखता है? क्या वह इतने लोकप्रिय थाना प्रभारी हैं कि उन्हें हटाने का जोखिम कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं उठाना चाहता, या फिर उनके ऊपर किसी राजनीतिक कृपा की ऐसी छतरी तनी हुई है जो हर मौसम में उन्हें बचा लेती है….? सूत्रों की मानें तो हितेंद्र शर्मा के राजनीतिक और पारिवारिक संबंधों की चर्चा लंबे समय से होती रही है। शहर में यह भी चर्चा है कि एक ओर उनके रिश्ते कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से बताए जाते हैं तो दूसरी ओर वर्तमान अमहिया सरकार के सत्ता प्रतिष्ठान के इर्द-गिर्द भी उनकी सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रहती है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यह प्रशासनिक संयोग है या राजनीतिक प्रभाव का परिणाम? रीवा जिले में कई थाना प्रभारी वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं और अवसर मिलने पर शहर आने की प्रतीक्षा करते हैं। वहीं हितेंद्र शर्मा का रिकॉर्ड देखिए तो अधिकांश समय उनकी तैनाती शहर के महत्वपूर्ण और चर्चित थानों में ही दिखाई देती है। ऐसा लगता है मानो तबादला सूची बनते समय उनके नाम के आगे किसी ने स्थायी स्याही से “यथावत” लिख दिया हो।
अब जनता यह भी जानना चाहती है कि क्या विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र अपराधमुक्त घोषित हो चुका है? क्या वहां चोरी, नशा, जुआ, सट्टा, अवैध कारोबार या अन्य कानून व्यवस्था से जुड़ी कोई चुनौती नहीं है? यदि ऐसा है तो फिर निश्चित रूप से हितेंद्र शर्मा को पुलिस विभाग का “सुपरमैन अवार्ड” मिलना चाहिए, क्योंकि जहां बाकी थानों में समस्याएं दिखाई देती हैं, वहां उनका थाना शायद आदर्श थाना बन चुका है। जन चर्चाओं में यह भी है कि यदि उत्कृष्ट कार्य ही मापदंड है तो फिर विभाग को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए कि हितेंद्र शर्मा की ऐसी कौन सी उपलब्धियां हैं जिनके कारण हर तबादला सूची में उनका नाम विशेष संरक्षण प्राप्त करता दिखाई देता है। इससे अन्य थाना प्रभारियों को भी सीख मिलेगी कि आखिर स्थायी पोस्टिंग का मंत्र क्या है। सबसे बड़ा प्रश्न पुलिस अधीक्षक पर भी खड़ा होता है। क्या यह पूरी तरह प्रशासनिक निर्णय है या फिर कहीं न कहीं राजनीतिक दबाव, सिफारिश और प्रभाव की भूमिका भी है? क्योंकि जब लगभग सभी अधिकारी तबादले की प्रक्रिया से गुजरते हैं और एक दो नाम बार-बार सुरक्षित निकल आता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। कटाक्ष यही है कि रीवा में तबादला सूची भले बदल जाए, थाना बदल जाएं, कुर्सियां बदल जाएं, लेकिन यदि कुछ नहीं बदलता तो वह है हितेंद्र शर्मा का “स्थायित्व”। अब इसे दक्षता कहें, लोकप्रियता कहें, राजनीतिक संरक्षण कहें या फिर किस्मत का कमाल फैसला जनता खुद करे।
*आखिर किसके आशीर्वाद से अटल है यातायात थाना प्रभारी की कुर्सी?*
लंबे समय से यातायात थाना प्रभारी के रूप में पदस्थ अनिमा शर्मा के कार्यकाल को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं और सवाल उठते रहे हैं। नागरिकों द्वारा समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शहर में बढ़ते जाम, अव्यवस्थित पार्किंग, अतिक्रमण, सड़कों पर बढ़ती भीड़ तथा कथित वसूली के आरोपों को लेकर शिकायतें किए जाने की बातें सामने आती रही हैं।दिलचस्प तथ्य यह है कि वर्षों के दौरान प्रशासनिक फेरबदल हुए, कई अधिकारियों के तबादले हुए, पुलिस अधीक्षक बदले, लेकिन यातायात थाना प्रभारी की कुर्सी पर कोई विशेष परिवर्तन देखने को नहीं मिला। यही कारण है कि शहर में यह चर्चा आम है कि आखिर ऐसी कौन सी विशेष उपलब्धि या कार्यशैली है, जिसके चलते उनकी पदस्थापना लगातार बरकरार है। जनता के बीच चर्चा का विषय यही है कि आखिर यह केवल संयोग है, उत्कृष्ट कार्य का परिणाम है या फिर किसी प्रभावशाली संरक्षण का असर, जिसके कारण यह कुर्सी वर्षों से अटल बनी हुई है।
*रातों-रात प्रभार ग्रहण कराने की चर्चा, कई तरह की अटकलें तेज*
रीवा पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी नवीन तबादला सूची के बाद जिले भर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जनचर्चा है कि कुछ थाना प्रभारियों के स्थानांतरण को लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से अपेक्षित संवाद नहीं किया गया। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि सूची भले ही पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी हुई हो, लेकिन इसके पीछे की निर्णय प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल नए पदस्थापना स्थल पर प्रभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए, जिसके चलते कई थाना प्रभारियों ने देर रात ही अपने नए थानों में पहुंचकर आमद दर्ज करा दी। चर्चा यह भी है कि सूची में कुछ ऐसे थाना प्रभारी भी शामिल हैं, जिन्होंने महज दो-तीन माह पूर्व ही अपने वर्तमान थानों में कार्यभार संभाला था। सियासी और प्रशासनिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि स्थानांतरण आदेशों के विरुद्ध किसी प्रकार की कानूनी चुनौती की संभावना को देखते हुए अधिकारियों को शीघ्र आमद दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। सूत्रों का दावा है कि प्रभार ग्रहण करने के बाद उसकी तस्वीरें भी तत्काल व्हाट्सएप के माध्यम से वरिष्ठ स्तर पर भेजी गईं। हालांकि इन सभी आरोपों/ चर्चाओं/ और दावों की पुष्टि न्यूज नेशन 81 सोशल मीडिया ग्रुप नहीं करता है।
*नोट:यह लेख स्थानीय चर्चाओं, जनभावनाओं एवं सार्वजनिक जन-विमर्शों पर आधारित व्यंग्यात्मक/विश्लेषणात्मक टिप्पणी है। समाचार में उल्लेखित आरोपों, दावों एवं जनचर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं न्यूज नेशन 81 चैनल अथवा संबद्ध सोशल मीडिया समूह इन दावों की पुष्टि नहीं करते। पाठकों से अपेक्षा है कि वे इसे जनचर्चा आधारित विश्लेषण के रूप में देखें।*

More Stories
भागलपुर10जुलाई26*भागलपुर रेलवे स्टेशन बना मालदा डिवीजन का पहला स्लीपिंग पॉड स्टेशन |
लखनऊ10जुलाई26*यूपीआजतक न्यूज चैनल पर शाम 7 बजे की बड़ी खबरें……………….*
नई दिल्ली10जुलाई26*यूपीआजतक न्यूज चैनल पर शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें*