May 22, 2024

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मिर्जापुर10मई24*ज्ञानार्जन सत्ययुग है और उसका क्रियान्वय त्रेतायुग है : महामंडलेश्वर ब्रह्मचारी महाराज*

मिर्जापुर10मई24*ज्ञानार्जन सत्ययुग है और उसका क्रियान्वय त्रेतायुग है : महामंडलेश्वर ब्रह्मचारी महाराज*

मिर्जापुर से बसन्त कुमार गुप्ता की रिपोर्ट यूपी आजतक

मिर्जापुर10मई24*ज्ञानार्जन सत्ययुग है और उसका क्रियान्वय त्रेतायुग है : महामंडलेश्वर ब्रह्मचारी महाराज*

*अक्षय तृतीया पर प्रवचन विंध्याचल के नरसिंह आश्रम पर सत्संग और भंडारा*

*बालनाथ आश्रम में मानस साथ तो गैबीघाट में शर्बत का वितरण*

मिर्जापुर। विंन्ध्य क्षेत्र के संत समाज के महामंडलेश्वर ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि भौतिक धन से अनन्त गुना कीमती बौद्धिक धन होता है। उन्होंने शास्त्रोक्त उद्धरणों का हवाला दिया और कहा कि भारत के मनीषियों ने इसीलिए ‘यस्य बुद्धि: तस्य बलम्, निर्बुद्धस्य कुतो बलम्, स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते’ का मूल मंत्र दिया है।
सत्ययुग और त्रेतायुग के प्रारंभ की तिथि अक्षय तृतीया पर विन्ध्याचल परिक्षेत्र के अष्टभुजा में अत्यंत सिद्ध एवं जागृत नरसिंह बाबा एवं डमरू बाबा की साधना स्थली पर आयोजित पूजन, प्रवचन तथा भण्डार कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि इस आश्रम के साधक रहे दोनों महात्माओं द्वारा दो सौ वर्षों पूर्व दिए गए ज्ञान के दृढ़ संकल्प एवं उसकी पूर्णाहुति के अवसर पर सत्संग की उसी परंपरा का पालन किया जा रहा है। ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि वास्तव में अक्षय तृतीया का पर्व 18 पुराणों के अध्ययन-श्रवण के संकल्प के बाद पुनः इसी दिन उसकी पूर्णाहुति का दिन है। ज्ञान सत्ययुग है और पूर्णाहुति के बाद उसका क्षेत्र में प्रचार-प्रसार त्रेतायुग है। यही काम विष्णु के अवतार श्रीराम ने त्रेतायुग में किया था।
इस अवसर पर जनपद के अलावा उत्तर प्रदेश तथा बिहार के विभिन्न अंचलों से भारी संख्या में श्रद्धालु आए थे। इस अवसर पर सौ से अधिक महात्माओं का सम्मान किया गया।
इसी तरह रावर्ट्सगंज रोड पर स्थित बरकछा ग्राम के बालनाथ आश्रम में अक्षय तृतीया के अवसर पर रामचरितमानस पाठ, श्री सत्यनारायण व्रत कथा के साथ सामूहिक भोज कार्यक्रम आयोजित किया गया। ग्रामीण क्षेत्र में हर वर्ग के लोगों ने इस तरह के कार्यक्रम के जरिए सामाजिक सामजंस्य का संदेश दिया। आश्रम के महंत धर्मराज महाराज ने कहा कि ईश्वर सभी में विराज करता है। इसलिए आपस में छोटे-बड़े का भेदभाव नहीं करना चाहिए।
इस पर्व पर नगर के गैबीघाट मुहल्ले में स्थित बाल हनुमान मंदिर में पुजारी रामानुज महाराज द्वारा भक्तों को प्रसाद के रूप में शर्बत प्रदान किया गया।

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