मिर्जापुर से बसन्त कुमार गुप्ता की रिपोर्ट यूपी आजतक
मिर्जापुर: 25अगस्त 25 *राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 में चयनित मधुरिमा की कुछ खास बातें*
मैं मधुरिमा तिवारी,को राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान
प्रभारी प्रधानाध्यापक पी.एम.श्री. कम्पोजिट स्कूल रानी कर्णावती, नगरपालिका क्षेत्र, मीरजापुर आप सभी का धन्यवाद एवं आभार प्रकट करना चाहती हूँ कि आपने मुझे राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान किया। शिक्षा हमारे देश के प्रकृति का आधार है। हमें देश के भविष्य को शिक्षित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में कार्य करके मुझे नौनिहालों का भविष्य एवं उन्हें गढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हमारी प्रथम नियुक्ति हमारे जिले मीरजापुर के ग्रामीण अंचल के अत्यन्त पिछड़ा ब्लाक पटेहरा बहरछठ ग्राम में हुई। हमारी नियुक्ति के समय विद्यालय की संख्या मात्र 92 थी। विद्यालय का परिवेश अत्यन्त निराशाजनक, भौतिक सुविधा शून्य थी। हमारे लिए सबसे बड़ा कार्य था नामांकन में वृद्धि करते हुए पठन-पाठन एवं भौतिक परिवेश को सुदृढ़ करना। अभिभावकों जन समुदाय की बैठक में हमें अप्रत्याशित सफलता प्राप्त हुई। सभी के सहयोग से विद्यालय के नामांकन बढ़ाने एवं भौतिक परिवेश को बदलने में अप्रत्याशित सफलता प्राप्त हुई। दो वर्ष के कार्य में हमने विद्यालय में चहारदीवारी, अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कराते हुए बृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया। साथ ही प्रधान एवं जनसमुदाय के सहयोग से बच्चों के बैठने हेतु डेस्क बेंच की व्यवस्था की। विद्यालय को भौतिक रूप से सम्पन्न बनाते हुए बिजली एवं इन्वर्टर की व्यवस्था करते हुए विद्यालय की संख्या में वृद्धि करते हुए 352 पहुँचाया। बच्चों की उपस्थिति अप्रत्याशित रहती थी जिसका परिणाम था अधिकारियों एवं समुदाय का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। नामांकन बढ़ाने में जनगणना के माध्यम से एवं बाल गणना से हमें बहुत लाभ प्राप्त हुआ। वर्ष 2011 में हमारा स्थानान्तरण नगरपालिका स्थित रानी कर्णावती प्राथमिक पाठशाला में होने पर विद्यालय में शिक्षण कार्य प्रारम्भ किया लेकिन विद्यालय की दयनीय स्थिति देखकर मन अत्यन्त व्यथित रहता था। सकारात्मक सोच के कारण पहले दिन से ही विद्यालय का परिवेश बदलने का प्रयास प्रारम्भ किया। संख्या मात्र 56 थी। बच्चों के शिक्षण पर ध्यान केन्द्रित किया। एक भी कक्षा पठन-पाठन के योग्य नहीं थी। विद्यालय नगरपालिका में था, चारों तरफ अराजक तत्व से विद्यालय घिरा था। अतिक्रमण से विद्यालय घिरा था। दिनभर पशु एवं अराजक तत्व विद्यालय के परिवेश को दूषित करते थे। विद्यालय में न तो चहारदीवारी थी और न ही किसी प्रकार का सुरक्षित स्थान। सभी कक्ष गिरी हालत में थे। हम लोग बच्चों को बरामदे में एक कोने में शिक्षण कार्य कराते थे। ऐसी स्थिति में हमने शिक्षण को जारी रखते हुए विद्यालय को अच्छा बनाने का प्रयास जारी रखा। 2015 में मुझे रानी कर्णावती उच्च प्राथमिक विद्यालय का प्रोन्नत होने का अवसर प्राप्त हुआ। 2016-17 में विद्यालय का प्रभार प्राप्त हुआ। हमने संकल्पित होकर विद्यालय को एवं विद्यालय के नौनिहालों को विकास हेतु जनसमुदाय, अधिकारीगण जन प्रतिनिधि के सहयोग से बीड़ा उठाया। प्रत्येक कदम पर लोगों का सहयोग प्राप्त होता है। जिससे मेरा मनोबल निरन्तर बढ़ता रहा। असम्भव सा कार्य सम्भव प्रतीत होने लगा। सबसे पहले
खण्डहर से विद्यालय को सुन्दर विद्यालय तक का सफर-
हमने रोटरी क्लब मीरजापुर के माध्यम से विद्यालय के कायाकल्प हेतु स्थानीय विधायक से सम्पर्क कर जीर्णशीर्ण अवस्था में पड़े कक्ष के निर्माण हेतु प्रयास प्रारम्भ किया। साथ ही विभाग के माध्यम से अतिरिक्त कक्षा कक्ष का निर्माण कराकर प्रत्येक कक्षों में टाईलीकरण, चहारदीवारी निर्माण, सुन्दर रंग रोगन से विद्यालय को आधुनिक बनाने का प्रयास किया। हमारा विद्यालय नगरपालिका में स्थित है जिसके चारों तरफ कानवेन्ट स्कूल स्थित है। वहां पर हमारा पहला प्रयास रहा कि हमारा विद्यालय उनसे किसी मामले में कम न हो। इसके लिए मुझे जनसमुदाय, पूर्व छात्र, अभिभावकों का पूर्ण साथ प्राप्त हुआ। आज हमारा विद्यालय कानवेन्ट स्कूल को भी पीछे छोड़ रहा है। प्रत्येक कक्ष में सुन्दर डेस्क, बेन्च, सुन्दर पेन्टिंग, आकर्षक चहारदीवारी, सुन्दर गेट, इण्टरलाकिंग, लोगों को अपने तरफ आकर्षित करते है।
प्रकृति से परिपूर्ण हरा-भरा स्कूल बनाने का संकल्प-
विद्यालय को प्रकृति से परिपूर्ण बनाने के लिए हमने अपने बच्चों के साथ संकल्प लेकर वृक्षारोपण का कार्य प्रारम्भ किया। जिसका परिणाम है कि आज हमारे विद्यालय में आकर्षक मैदान, सुन्दर बागवानी, सभी प्रकार के वृक्ष, विद्यालय का प्रत्येक कोना सुसज्जित कर रहे है। वर्तमान समय में हमारा विद्यालय ग्रीन विद्यालय के रूप में विकसित होकर हम सभी के लिए प्रेरणाप्रद है। हमारे विद्यालय को ग्रीन विद्यालय का पुरस्कार नगरपालिका के द्वारा एवं विभाग के द्वारा प्राप्त हुआ। विद्यालय के बच्चे मीना मंच एवं ईको क्लब के माध्यम से प्रत्येक दिवस बागवानी में पूर्ण सहयोग प्रदान करते है एवं अपने घर एवं समाज में भी वृक्षारोपण के लिए जागरूक करते है।
आरोग्य वाटिका-
प्राकृतिक चिकित्सा हेतु विद्यालय में सुन्दर आरोग्य वाटिका का निर्माण एक सुखद पहल है। जिसमें हमको पूर्ण सफलता बच्चों के सहयोग से प्राप्त हुई। बच्चे आरोग्य वाटिका के लाभ से भी परिचित हो रहे है। साथ ही प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति भी उनको जागरूक किया जा रहा है। अपने घर परिवार में भी इसका लाभ उठा रहे है।
बालिका शिक्षा-
हमारे द्वारा विद्यालय में अतिरिक्त दो घण्टे बालिकाओं के लिए सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, जूडो, कराटे आदि के माध्यम से बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। कुछ बच्चियां यहां से निकल कर अपने जीविकोपार्जन का भी कार्य रही है। साथ ही पठन पाठन में भी संलग्न है।
आधुनिक शिक्षणयुक्त विद्यालय बनाने में सफलता-
सन् 2016 में जनसहयोग के माध्यम से विद्यालय को पहला टी.वी. प्राप्त हुआ। उसी वर्ष रोटरी क्लब मीरजापुर के माध्यम से एक कम्प्यूटर एवं एक प्रोजेक्टर भी विद्यालय को मिला। उस वर्ष मेरा विद्यालय जिले का पहला स्मार्ट क्लास चलाने वाला विद्यालय बना। बाद में जनसमुदाय एवं पूर्व छात्रों एवं अभिभावकों के सहयोग से विद्यालय को तीन कम्प्यूटर, लैपटॉप प्राप्त हुआ जिससे बच्चे आधुनिक शिक्षण में कानवेन्ट स्कूल की बराबरी करने लगे। सन् 2016 से ही बच्चे कानवेन्ट की भांति टाई-बेल्ट, आई.डी. कार्ड लगाकर विद्यालय में प्रवेश करते हैं जो लोगों में चर्चा का केन्द्र रहता है। आई.सी.टी. लैब की स्थापना से हमारे विद्यालय के बच्चे पूर्ण रूप से आधुनिक शिक्षण करने लगे। आज हमारा विद्यालय पूरे जिले में निजी विद्यालयों को पीछे छोड़ते हुए आधुनिककता से परिपूर्ण हैं। बच्चों का कम्प्यूटर, प्रोजेक्टर, स्मार्ट टी.वी. का स्वतः संचालन विद्यालय की सफलता का राज है।
वार्षिकोत्सव-
हमारे विद्यालय का वार्षिकोत्सव निजी विद्यालय से बेहतर बनाने के उद्देश्य से हमने अपने स्टॉफ एवं अभिभावकों के सहयोग से प्रत्येक वर्ष आकर्षण सुसज्जित ढंग से वार्षिकोत्सव मनाना प्रारम्भ किया जिसकी चर्चा से साथ ही उसमें जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं महान हस्तियों को बुलाकर बच्चों को एवं अभिभावकों के मनोबल बढ़ाने का कार्य किया गया जिसका परिणाम है कि आज हमारे बच्चे कहते है कि हम किसी से कम नहीं।
कम शिक्षक होने के बावजूद हमने और हमारे स्टॉफ ने बच्चों के शिक्षण को प्रभावी बनाने एवं चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए इस ढंग से शिक्षण का प्रारूप बनाया कि कक्षा भी न प्रभावित हो और पठन-पाठन भी सुचारू रूप से चलता रहे। इसके लिए बच्चों को स्मार्ट टी.वी., पैनल, प्रोजेक्टर व टी.वी. के माध्यम से जागरूक करके सुगम बनाया। वर्तमान समय में हमारे विद्यालय को प्रत्येक कक्ष में आधुनिक शिक्षण सामग्री के साथ आई.सी.टी. लैब, लर्निंग बाई डूइंग लैब, आधुनिक पुस्तकालय, सी.सी.टी.वी. युक्त कक्ष, वाई-फाई से लैस परिसर, विद्यालय को आधुनिक शिक्षण से जोड़ते हुए बच्चों को निजी स्कूलों से भी आगे बना रहे है। यह हमारा सौभाग्य है कि कुछ सेवानिवृत्त, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार शिक्षक स्वप्रेरणा से विद्यालय का परिवेश देखते हुए स्वतः बच्चों को सहयोग प्रदान करने चले आते है। हम भाग्यशाली है आज हमारा विद्यालय किसी भी सरकारी कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम हेतु अपनी उपस्थिति बनाये हुए है। कोरोना काल के समय हमारे विद्यालय के द्वारा किये गये ऑनलाइन शिक्षण कार्य समाज में चर्चा का विषय रहा। सामाजिक संगठनों, माननीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारीगण, मीडिया एवं अभिभावकों का अपार स्नेह, हमारे बच्चों को एवं हमारे विद्यालय को प्राप्त हुआ। हमारे लिए सौभाग्य का समय है कि लोग हमारे विद्यालय को देखने व जानने के उद्देश्य से भ्रमण हेतु आते है। हमारा सौभाग्य है कि मेरी पहचान मेरे विद्यालय ने कराई। हमारा विद्यालय प्रत्येक क्षेत्र में सम्मानित होता रहा। मानव संसाधन मंत्रालय के द्वारा सन् 2018 में हमारा विद्यालय स्वच्छ विद्यालय से सम्मानित हुआ। सन् 2023 में हमें विद्यालय में उत्कृष्ट कार्य हेतु राज्य पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। विद्यालय के बच्चे प्रत्येक क्षेत्र में खेलकूद, प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सदैव विद्यालय का मान बढ़ाते है। आज समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा कार्य करने हेतु आमंत्रण प्रदान करते है तो हमें लगता है कि एक शिक्षक के रूप में बच्चों का भविष्य संवारने का कार्य हमें प्राप्त हुआ वह जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। बच्चों की सफलता सबसे बड़ी ताकत है। वर्तमान समय में हमारे विद्यालय के क्रिया कलाप, अनुशासन, स्वच्छता, वृक्षारोपण, पठन-पाठन, पाठ्य सहगामी क्रिया-कलाप अन्य विद्यालयों एवं समाज के लिए प्रेरणाप्रद है। वर्तमान परिवेश में हमारे बच्चे अपने आपको सबसे आगे पाते है। प्रत्येक राष्ट्रीय पर्व का आयोजन, जागरूकता अभियान, जन-जागरण अभियान, स्कूल चलो अभियान में विद्यालय की भूमिका सदैव अग्रणी रहती है।
उनकी सफलता ही मेरी सफलता है। आज हम सिर्फ दो शिक्षकों के साथ विद्यालय को सामाजिक, अभिभावकों, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों के साथ एवं सहयोग से विद्यालय को फर्श से अर्श तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त कर पायें है। आज हमें हमारे बच्चों की सफलता से विद्यालय को जो मान प्रतिष्ठा प्राप्त हुआ है, विद्यालय को बदलने में रात दिन संघर्ष करके हमने जो सफलता प्राप्त की है,
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