July 17, 2024

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मथुरा30मार्च24*झुग्गी झोपड़ियों में बच्चो को पढ़ाने हेतु संकल्पित बाल अधिकार कार्यकर्ता सतीश चंद्र शर्मा।

मथुरा30मार्च24*झुग्गी झोपड़ियों में बच्चो को पढ़ाने हेतु संकल्पित बाल अधिकार कार्यकर्ता सतीश चंद्र शर्मा।

मथुरा30मार्च24*झुग्गी झोपड़ियों में बच्चो को पढ़ाने हेतु संकल्पित बाल अधिकार कार्यकर्ता सतीश चंद्र शर्मा।

ग्राम पचहरा जनपद मथुरा में 12 नवंबर सन 1973 को जन्मे सतीश चंद्र शर्मा छात्र जीवन से ही युवक मंगल दल, नेहरू युवा केंद्र तथा युवावस्था में नागरिक सुरक्षा संगठन एवं अन्य विभिन्न संस्थाओं से जुड़ कर मथुरा जनपद में सामाजिक सेवा एवम बाल अधिकारों के लिए कार्य कर रहे हैं। सामाजिक कार्यों के लिए वर्ष 2005 -2006 में जिलाधिकारी मथुरा द्वारा जिला युवा उत्सव उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया वर्ष 2010 से वर्ष 2016 तक बाल कल्याण समिति मथुरा में सदस्य के रूप में कार्य कर 2000 से ज्यादा देखरेख एवम संरक्षण की आवश्यकता वाले का निस्तारण कराया। झुग्गी झोपड़ियो में सड़क किनारे रहने वाले झुग्गी झोपड़ियां रेलवे स्टेशन या मलिन बस्तियों के बच्चो को जो कूड़ा कबाड़ा बिनने रेलवे प्लेटफार्म बस स्टैंड पर भिक्षावृत्ति या बालश्रम करने वाले तथा ऐसे बच्चे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं को जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निःशुल्क शिक्षा केन्द्रों के माध्यम से शिक्षा संस्कार एवम की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल की स्थापना वर्ष 2008 में की शिक्षा के साथ-साथ सफाई खेल खेलकूद सांस्कृतिक गतिविधियों से बच्चों को जोड़ा जा रहा है सभी राष्ट्रीय एवं त्योहार को इन बच्चों के बीच मानते हैं बच्चों के कल्याण के लिए सतीश चंद्र शर्मा की सामाजिक सेवाओं को देखते हुए डॉक्टर अंबेडकर संस्था द्वारा ब्रज रत्न जू वेलफेयर संस्था द्वारा बाल अधिकार के लिए कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया सतीश चंद्र शर्मा शर्मा बाल संरक्षण के क्षेत्र में सामाजिक कार्यकर्ता है कानून का उल्लंगल करने वाले बच्चों को निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करते हैं शोषण के शिकार बच्चों की विधिक मदद करते हैं तथा बच्चों के विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए पराविधिक स्वयंसेवक के रूप में काम किया है ।सतीश चंद्र शर्मा कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों जैसे रेलवे प्लेटफार्म पर पाए जाने वाले बच्चों घर से भागे हुए बच्चों नशे के आदी बच्चों के लिए भी कार्य करते हैं तथा बाल कल्याण समिति एवं बाल गृहों के माध्यम से ऐसे बच्चों को उनके पुनर्वासन करने और उनके परिवार में उन्हें पुनः मिलवाने का कार्य करते हैं । बच्चों के अधिकार कल्याण व संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रहे है जस्टिस फॉर चिल्ड्रन एंड वूमेन सोसायटी के अध्यक्ष सतीश चंद्र शर्मा जिला बाल श्रम उन्मूलन समिति बधुआ मजदूरी सतर्कता समिति के भी सदस्य हैं जिला बाल शिकायत निवारण परामर्श एवं अनुसंधान समिति के भी सदस्य हैं।वन स्टॉप जिला संचालन समिति के भी सदस्य हैं वर्ष 2010 से लगातार 7 वर्ष बाल कल्याण समिति मथुरा के सदस्य के रूप में 2500 से ज्यादा देखरेख एवम रह संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के केशो का निस्तारण करने में सहयोग किया वर्तमान में किशोर न्याय बोर्ड मथुरा के सदस्य हैं

भविष्य के लक्ष्य/सपने
1 ईंट भट्टों एवम निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के बच्चो के लिए स्कूल ऑन व्हील्स ताकि उन्हें उनके कार्य स्थलो पर ही जाकर पढ़ाया जा सके।
2घुमंतु जातियों एवम अप्रवासी मजदूरों के बच्चो के लिए आवासीय विद्यालय की स्थापना
3 बाल मित्र जनपद बनाने के लिए पूरे जनपद में बाल मित्र समितियों का गठन
4 भय अपराध एवम नशा मुक्त बचपन
5 आर्थिक अभाव के कारण कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे

समाज के निर्धन और निरक्षर बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने वाले और उन्हें संस्कारित करने में लगे हैं बाल अधिकार कार्यकर्ता सतीश चंद्र शर्मा जब इन बच्चों को कूड़ा बिनते भिक्षावृत्ति करते नशा करते आपस में लड़ते झगड़ते और अपना पूरा समय आवारागर्दी में नष्ट करते हुए देखे तो उन्हें उनकी की झोपड़िया में जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निःशुल्क केंद्र संचालित कर उन्हें शिक्षा संस्कार एवम समाज की मुख्य धारा से जोडना संस्कारों को पलवित करना होता है माता-पिता में यह सोच पैदा कर पाना की पढ़ने लिखने का अर्थ मात्र नौकरी पाना नहीं जीवन जीने की कला सीखना है । माता-पिता में यह सोच पैदा करना कि बच्चों के साफ-सफाई साफ कपड़े पहनना नहाना शरीर की सफाई और पढ़ना कितना जरूरी है यही जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निःशुल्क शिक्षा केन्द्रों की सबसे बड़ी सफलता है। यह बच्चे गंदे कपड़े पहनकर असभ्य भाषा बोलने गंदी आदतों के शिकार होते हैं क्योंकि माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं तो जल्दी सुबह जाकर देर रात झोपड़िया में लौटते हैं यह बच्चे माता-पिता के घर से निकलने के बाद गलियों में आवारा घूमते भिक्षावृत्ति करते कबाड़ बिनते फिरते हैं अपने छोटे भाई बहनों को संभालते हैं उनकी शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। मुझे अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं आखिर आपके यहां से बच्चे निकल कर स्कूल स्कूल में पड़ेंगे क्या आगे की शिक्षा जारी रख पाएंगे नौकरी मिलेगी ।मेरा उत्तर यही होता है बच्चे के अंदर अच्छे और बुरे की पहचान विकसित हो सके दूसरों के प्रति संवेदनशील बन सके जिम्मेदार नागरिक बन सके तो क्या यह सब काम काम है सामान्य सोच तो यही मांग रखता है कि बच्चा किस क्लास में पड़ता है या कभी नहीं पूछता कि उसके बच्चे ने क्या संस्कार सीखे ।बच्चो को शिक्षा संस्कार एवम समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश में संस्था लगी हुई है और काफी सफल भी हो रही है समयवध्य तरीके से अध्ययन करना समय पर उपस्थित होना अपना कार्य जिम्मेदारी से करना समाज के प्रति जागरूक करना और अच्छी आदतों का पनप जाना मनुष्य बनने की पहली शर्त हुआ करती है

वर्ष 2008 से झुग्गी झोपड़ियों मलिन बस्तियों में जरूरतमंद बच्चों में शिक्षा एवम संस्कार की अलख जगा रहे है सतीश चंद्र शर्मा
आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के सभी बच्चे शिक्षित हो यही है सपना
मथुरा जनपद के गांव पचहरा में श्री कैलाश चंद्र रावत प्रधानाचार्य के पुत्र के रूप में 12 नवंबर 1973 को जन्मे सतीश चंद्र शर्मा ने इंजीनियरिंग डिप्लोमा एवम समाजशास्त्र में परस्नातक की डिग्री की है । बचपन से ही अपने गांव पचहरा के मजदूरों के बच्चो को शिक्षा से जोड़ने के लिए उनके माता पिता को प्रेरित करने वाले अपने पिताजी श्री कैलाश चंद्र रावत प्रधानाचार्य से प्रेरित है। सतीश चंद्र शर्मा ने कई वर्ष पूर्व सड़क पर एक ही उम्र के दो बच्चो के दृश्य जिसमे एक बच्चे के कंधों पर किताब का थैला एवम दूसरे के कंधे पर कबाड़ का थैला एवम एक बच्चे के हाथ में भीख का कटोरा एवम एक के हाथ में कलम को देखकर मन उद्वेलित हुआ तथा कुछ नही होता सिर्फ कोसने से अंधेरे को अपने हिस्से का दीपक तो जलाना होगा की सोच एवम हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिले विचार ने वर्ष 2008 में झुग्गी झोपड़ियों में स्ट्रीट स्कूल की परिकल्पना को जन्म दिया । वर्ष 2008 में मथुरा हाइवे स्थित नवादा झुग्गी बस्ती में 35 बच्चो से स्ट्रीट टू स्कूल अभियान को शुरू किया। सड़क किनारे मालिन बस्तियों
झुग्गी झोपड़ियो में रहने वाले अप्रवासी एवम गरीब परिवारों के शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षा संस्कार एवं समाज की मुख्यधारा से बाल अधिकार कार्यकर्ता सतीश चंद्र शर्मा द्वारा संचालित जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निशुल्क शिक्षा केंद्रों के गोपाल नगर ,लाजपतनगर ट्रांसपोर्ट नगर पन्ना पोखर सेंटर्स के माध्यम से 300 से ज्यादा बच्चों को शिक्षा स्वास्थ्य संस्कार एवं समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इन सभी बच्चो को सरकारी एवम निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाता है।जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निः शुल्क सेंटर पर पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा संस्कार के साथ-साथ उन्हें विभिन्न विधाओं में पारंगत करने के लिए जैसे खेलकूद डांस जूडो कराटे एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं प्रतिभाग कराने के साथ-साथ उनका सेवाभावी डॉक्टरों की मदद से स्वास्थ्य परीक्षण उनकी जरूरतों की चीजें किताब कॉपी स्टेशनरी बैग खिलौने ड्रेस जूते सामाजिक सहयोग से प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें हर वर्ष शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जाता है ताकि उन्हें अन्य सभी बच्चों की तरह वह सभी मौके एवं अवसर प्राप्त हो और वह बड़े होकर समाज के एवं देश के जिम्मेदार नागरिक बने
जस्टिस फॉर चिल्ड्रन एंड वूमेन सोसायटी के अध्यक्ष सतीश चंद्र शर्मा द्वारा बाल अधिकारों के लिए विभिन्न प्रकल्प एवं कार्यक्रमों का सतत रूप से क्रियान्वयन किया जा रहा है जिसमें बच्चों को गुड टच बेड टच के बारे में जागरूक करना बाल श्रम एवं भिक्षावृत्ति के प्रति जागरूकता अभियान कार्यक्रम नशा एवम बाल श्रम मुक्त बचपन अभियान, भय मुक्त शिक्षा अभियान, खिलौना एवम बुक बैंक ,चरण पादुका अभियान एवं लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई कढ़ाई केंद्र का संचालन किया जा रहा है।
वर्तमान में 15 वॉलंटर्स जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निःशुल्क शिक्षा केन्द्रों के पांच सेंटर्स पर अपनी निशुल्क सेवाए दे रहे है।
बाल अधिकार कार्यकर्ता सतीश चंद्र शर्मा विभिन्न समितियों में सदस्य के तौर पर जिला बाल कल्याण समिति , जिला बाल श्रम उन्मूलन समिति,
जिला बंधुआ श्रम सतर्कता समिति ,जिला श्रम बंधु समिति किशोर न्याय बोर्ड
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से बच्चो एवम जरूरतमंदों को अधिकार दिलाने का कार्य कर रहे है

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