पूर्णिया बिहार 14 जून 25* गुंडाराज और आतंकराज के विरोध के प्रतीक थे शहीद अजीत सरकार : संतोष कुशवाहा
पूर्णिया से मोहम्मद इरफान कामिल की खास खबर चैनल यूपी आज तक
पूर्णिया बिहार । कामरेड अजीत सरकार सच्चे मायने में गरीबों के मसीहा थे।अपनी सादगी और बेबाकी के लिए मशहूर रहे अजीत दा ने अपने राजनीतिक जीवन मे कभी भी अपनी विचारधारा और सिद्धान्तों से समझौता नही किया।हालांकि इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उन्होंने नापाक गठजोड़ के सामने घुटने टेकने की बजाय अपनी जान देना पसंद किया। वे पूर्णियां में गुंडाराज और आतंकराज के विरोध के प्रतीक थे।वे गरीबों, शोषितों और वंचितों के लिए हमेशा नायक के रूप में याद किए जाएंगे।उक्त बातें सांसद संतोष कुशवाहा ने शनिवार को कॉमरेड अजीत सरकार के शहादत दिवस पर आर एन साह चौक पर स्थित स्व सरकार के शहीद स्मारक पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के बाद कही।
श्री कुशवाहा ने कहा कि राजनीति में असहमति सामान्य बात है। लेकिन असहमति की परिणति हिंसा में हो, यह शर्मनाक है। अपराध की पाठशाला से मैट्रिक करने वाले जब राजनीति के महाविद्यालय में प्रवेश करेंगे तो लोकतंत्र की ऐसी ही दुर्गति होती है, इतिहास गवाह है।श्री कुशवाहा ने कहा कि अजीत दा इतिहास-पुरुष हैं और वे हमारे प्रेरणास्रोत भी हैं।कहा कि वे इस मौके पर संकल्प लेते हैं कि अजीत दा के पदचिन्हों पर चलते हुए उन सभी आसुरी शक्तियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहेंगे जो पूर्णियां में अमन चैन, शांति और सदभावना में खलल डालने की कोशिश करेगा।उन्होंने जिला प्रशासन से अजीत सरकार जी के स्मारक की घेराबंदी करवाने की मांग किया।इस मौके पर महानगर जेडीयू अध्यक्ष अविनाश कुमार सिंह, प्रखण्ड प्रमुख रितेश कुमार, अविनाश कुशवाहा, सुशांत कुशवाहा, चंदन मजूमदार, प्रदीप मेहता आदि मौजूद थे।

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