July 17, 2026

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नई दिल्ली16जुलाई26*हाइड्रोजन ट्रेन,हरित भविष्य की ओर भारतीय रेल की ऐतिहासिक छलांग

नई दिल्ली16जुलाई26*हाइड्रोजन ट्रेन,हरित भविष्य की ओर भारतीय रेल की ऐतिहासिक छलांग

नई दिल्ली16जुलाई26*हाइड्रोजन ट्रेन,हरित भविष्य की ओर भारतीय रेल की ऐतिहासिक छलांग

*स्टीम से डीजल, डीजल से विद्युत और अब हाइड्रोजन—विकसित भारत की नई विकासगाथा*

विनोद कुमार सिंह ‘तकियावाला’ स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

भारतीय रेल केवल एक परिवहन व्यवस्था नहीं,बल्कि भारत की सामाजिक,आर्थिक और तकनीकी प्रगति का जीवंत इतिहास है।पिछले लगभग डेढ़ सौ वर्षों में इसने अनेक परिवर्तन देखे हैं। कभी भाप के इंजन भारतीय रेल की पहचान थे। उसके बाद डीजल इंजनों ने गति और शक्ति का नया अध्याय लिखा।फिर विद्युत इंजनों ने भारतीय रेल को आधुनिकता, दक्षता और ऊर्जा बचत की नई दिशा प्रदान की। सीमित स्तर पर सीएनजी आधारित प्रयोग भी हुए। अब भारतीय रेल एक और ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुँच चुकी है।हरित हाइड्रोजन से संचालित देश की पहली ट्रेन भारत के परिवहन इतिहास में एक नई क्रांति का उद्घोष करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह केवल एक रेलगाड़ी का शुभारम्भ नहीं होगा,बल्कि विकसित भारत, हरित भारत और आत्मनिर्भर भारत के साझा संकल्प का साकार रूप होगा। देश के करोड़ों नागरिकों के साथ-साथ पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और रेलवे परिवार के लिए भी यह गौरव का क्षण होगा।
भारतीय रेल का इतिहास बताता है कि हर नई तकनीक ने देश के विकास को नई गति दी है। भाप के इंजनों ने औद्योगिक युग की शुरुआत का साथ दिया। डीजल इंजनों ने लंबी दूरी की रेल सेवाओं को नई क्षमता प्रदान की। विद्युत इंजनों ने गति बढ़ाई, लागत घटाई और प्रदूषण कम किया। अब हाइड्रोजन इंजन उस यात्रा का अगला चरण है, जहाँ विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलेंगे।हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल संचालन है। पारंपरिक डीजल इंजन जहाँ कार्बनडाइ ऑक्साइड,नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य प्रदूषक गैसों का उत्सर्जन करते हैं, वहीं हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित ट्रेन के संचालन से मुख्य रूप से जलवाष्प निकलती है।अर्थात् ऊर्जा भी प्राप्त होगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। यही कारण है कि पूरी दुनिया हरित हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन मान रही है।भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति केवल उद्योगों या बिजली उत्पादन से संभव नहीं होगी,बल्कि परिवहन क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव आवश्यक होंगे। भारतीय रेल पहले से ही विश्व की सबसे अधिक ऊर्जा-कुशल परिवहन प्रणालियों में शामिल है। अधिकांश रेलमार्गों का विद्युतीकरण, सौर ऊर्जा का विस्तार, ऊर्जा दक्ष स्टेशन और अब हाइड्रोजन ट्रेन—ये सभी प्रयास इस बात के प्रमाण हैं कि भारतीय रेल भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर परिवर्तित कर रही है।
हरित हाइड्रोजन की अवधारणा केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है।यह ऊर्जा सुरक्षा का भी प्रश्न है। भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है।अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।यदि परिवहन क्षेत्र में हाइड्रोजन का उपयोग बढ़ता है, तो आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी,विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी । भारतीय रेल की यह परियोजना राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के उद्देश्यों को भी नई गति प्रदान करेगी।यह मिशन भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और उपयोग के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है।रेल जैसी विशाल परिवहन व्यवस्था में इस तकनीक का सफल प्रयोग अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक अत्यंत आधुनिक है।ईंधन सेल में संग्रहित हाइड्रोजन और वायु की ऑक्सीजन रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करती है।यही विद्युत मोटरों को संचालित करती है और ट्रेन आगे बढ़ती है।इस प्रक्रिया में धुआँ नहीं निकलता और शोर भी अपेक्षाकृत कम होता है। इसलिए यह तकनीक पर्यावरण के साथ-साथ यात्रियों के लिए भी अधिक अनुकूल मानी जाती है।
विश्व के कई विकसित देशों ने हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।जर्मनी,फ्रांस,इटली और चीन जैसे देशों में इस तकनीक पर निरंतर कार्य हो रहा है। भारत का इस दिशा में आगे बढ़ना इस बात का संकेत है कि देश केवल नई तकनीक का उपभोक्ता नहीं रहना चाहता, बल्कि भविष्य की प्रौद्योगिकी के विकास और निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाने का इच्छुक है।यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की भावना को भी सशक्त बनाती है।भारतीय इंजीनियरों,वैज्ञानिकों और रेलवे के तकनीकी संस्थानों ने सीमित संसाधनों में जिस प्रकार इस परियोजना को आकार दिया है, वह देश की तकनीकी क्षमता का परिचायक है।भविष्य में यदि हाइड्रोजन ट्रेनों का व्यापक विस्तार होता है,तो भारत इस क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।जींद से प्रारंभ होने वाली यह यात्रा केवल एक रेलमार्ग तक सीमित नहीं रहेगी। यह भविष्य में उन रेलखंडों के लिए नई संभावना लेकर आएगी, जहाँ पूर्ण विद्युतीकरण व्यावहारिक नहीं है या जहाँ पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों,पर्यटन स्थलों और संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में हाइड्रोजन ट्रेनें एक उत्कृष्ट विकल्प बन सकती हैं।पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से यह उपलब्धि अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। आज विश्व जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और वायु प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।भारत के अनेक शहर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में यदि सार्वजनिक परिवहन स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता है,तो उसका लाभ केवल रेलवे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलेगा।स्वच्छ हवा, कम प्रदूषण और बेहतर स्वास्थ्य किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान होते हैं।निस्संदेह इस नई तकनीक के सामने चुनौतियाँ भी हैं। हाइड्रोजन उत्पादन,सुरक्षित भंडारण,परिवहन, ईंधन भरने की व्यवस्था और विशेष रखरखाव जैसी आवश्यकताओं पर व्यापक निवेश करना होगा। प्रारंभिक लागत भी अधिक होगी। लेकिन इतिहास साक्षी है कि हर नई तकनीक की शुरुआत कठिन होती है।जब भारत ने भाप से डीजल और डीजल से विद्युत इंजनों की ओर कदम बढ़ाया था,तब भी अनेक प्रश्न उठे थे।आज वही परिवर्तन भारतीय रेल की सबसे बड़ी शक्ति बन चुके हैं। हाइड्रोजन तकनीक भी आने वाले वर्षों में इसी प्रकार अपनी उपयोगिता सिद्ध करेगी।भारतीय रेल केवल पटरियों पर दौड़ने वाली गाड़ियों का नाम नहीं है।यह भारत की विकास यात्रा का प्रतीक है।हर नई तकनीक देश की आर्थिक शक्ति, वैज्ञानिक क्षमता और भविष्य की सोच को अभिव्यक्त करती है।हाइड्रोजन ट्रेन उसी दूरदृष्टि का परिणाम है, जिसमें विकास,पर्यावरण और आत्मनिर्भरता को एक साथ लेकर चलने का प्रयास दिखाई देता है।जींद से रवाना होने वाली यह ट्रेन केवल यात्रियों को उनके गंतव्य तक नहीं पहुँचाएगी,बल्कि भारत को स्वच्छ ऊर्जा,आधुनिक प्रौद्योगिकी और सतत विकास के नए युग की ओर भी अग्रसर करेगी। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा संदेश है कि विकास का मार्ग प्रकृति के साथ संघर्ष का नहीं, बल्कि उसके साथ सामंजस्य का होना चाहिए।भाप से डीजल, डीजल से विद्युत और अब हाइड्रोजन—भारतीय रेल की यह यात्रा वास्तव में भारत के बदलते स्वरूप की विकास गाथा है।यही कारण है कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं,बल्कि विकसित भारत के आत्मविश्वास, वैज्ञानिक क्षमता और हरित भविष्य की सशक्त घोषणा है। आने वाले वर्षों में जब भारतीय रेल के इतिहास के स्वर्णिम अध्याय लिखे जाएँगे, तब जींद से आरम्भ हुई यह हरित यात्रा निश्चित रूप से एक मील का पत्थर मानी जाएगी।

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